राजस्थान सरकार ने किया मां योजना में बड़ा बदलाव, हॉस्पिटल को देनी होगी जियो टैग फोटो
समझें क्या है पूरा मामला
- मां योजना में निजी अस्पतालों के लिए नए नियम लागू होंगे।
- ICU मरीजों की फोटो हर 8 घंटे में अपलोड करनी होगी।
- फोटो में मरीज, डॉक्टर, बेड और मॉनिटर दिखना जरूरी।
- जियो टैग के साथ मां योजना पोर्टल पर फोटो डालनी होगी।
राजस्थान सरकार ने मां योजना को लेकर निजी अस्पतालों के लिए नया आदेश जारी किया है। अब ICU में भर्ती मरीज और डॉक्टर की फोटो हर 8 घंटे में अपलोड करनी होगी। फोटो में बैड और पीछे लगा मॉनिटर भी साफ दिखना चाहिए। फोटो जियो टैग करके मां योजना के पोर्टल पर डालनी होगी। यह नियम 30 सितंबर से लागू होगा।
किसने जारी किया आदेश
यह आदेश राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी ने जारी किया है। यह आदेश मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना यानी मां योजना से जुड़ा है। आदेश निजी अस्पतालों के लिए है।
हर 8 घंटे में फोटो
अगर कोई मरीज निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती होता है तो यह नया नियम लागू होगा। उस मरीज की फोटो हर 8 घंटे में अपलोड करनी होगी। मरीज को देखने वाले डॉक्टर भी फोटो में होने चाहिए। यानी मरीज और डॉक्टर, दोनों की मौजूदगी दर्ज होगी।
फोटो में क्या दिखना जरूरी
सिर्फ मरीज और डॉक्टर की फोटो काफी नहीं होगी। फोटो में मरीज का बैड भी दिखना चाहिए। बैड के पीछे लगा मॉनिटर भी फोटो में आना जरूरी है।मॉनिटर पर मरीज की पल्स रेट दिखनी चाहिए। ऑक्सीजन लेवल भी साफ नजर आना चाहिए। मॉनिटर पर दिख रही बाकी जानकारी भी फोटो में होनी चाहिए।
जियो टैग के साथ अपलोड
यह फोटो जियो टैगिंग के साथ अपलोड करनी होगी। जियो टैग से फोटो खींचने की जगह की जानकारी जुड़ जाती है। फोटो मां योजना के पोर्टल पर डाली जाएगी।
डे-केयर मरीज भी दायरे में
नया नियम डे-केयर मरीजों पर भी लागू होगा। ये वे मरीज हैं, जो सुबह अस्पताल आते हैं। इलाज के बाद शाम तक घर लौट जाते हैं। ऐसे मरीजों की फोटो भी डॉक्टर के साथ ली जाएगी। इसे भी जियो टैग करके पोर्टल पर अपलोड करना होगा। इसमें कैंसर और किडनी के मरीज शामिल हैं। न्यूरो से जुड़ी बीमारियों के मरीज भी इसके दायरे में हैं।
30 सितंबर से लागू
यह नया नियम 30 सितंबर से लागू होगा। इसके बाद मां योजना के तहत ICU और डे-केयर इलाज पर यह व्यवस्था जरूरी होगी।
अस्पतालों पर क्या असर
नए नियम से निजी अस्पतालों का काम बढ़ेगा। हर ICU मरीज के लिए दिन में कई बार फोटो लेनी होगी। हर बार डॉक्टर की मौजूदगी भी जरूरी होगी। अस्पतालों को इसके लिए अलग व्यवस्था करनी पड़ सकती है।