राज्यपाल ने गहलोत सरकार के लौटाए 9 विधेयक, इनमें ऑनर किलिंग, मॉब लिंचिंग जैसे बिल भी शामिल

Purshottam Kumar Joshi | Jan 28, 2026, 20:11 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार के समय विधानसभा में पारित 9 विधेयकों को लौटा दिया है। इसमें ऑनर किलिंग और मॉब लिंचिंग के खिलाफ बने बिल शामिल हैं।

News in Short

राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने पूर्ववर्ती गहलोत सरकार के 9 विधेयकों को कानूनी कारणों से विधानसभा को लौटा दिया।



ऑनर किलिंग और मॉब लिंचिंग संबंधित विधेयकों के प्रावधानों को केंद्रीय कानूनों से टकराव पाया।



गहलोत सरकार के समय पारित प्राइवेट यूनिवर्सिटी बिल पर भी सवाल उठाए गए।



राज्यपाल ने इन विधेयकों को वापस भेजने के पीछे केंद्रीय कानूनों के प्रावधानों का हवाला दिया।



राज्यपाल के अभिभाषण में यमुना जल योजना, निवेश और रोजगार वृद्धि की चर्चा की गई।



News in Detail

राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार के दौरान पारित 9 विधेयकों को विधानसभा को लौटा दिया। इन विधेयकों में 2019 से लेकर 2023 तक पारित कई महत्वपूर्ण बिल शामिल हैं। राज्यपाल ने इन विधेयकों के प्रावधानों को केंद्रीय कानूनों से टकराव पाया। इसके बाद उन्होंने अपनी टिप्पणी के साथ ये विधेयक वापस भेज दिए।



राज्यपाल ने इसलिए लौटाए विधेयक

राजस्थान में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कांग्रेस शासन के 9 विधेयकों का कानूनी पहलुओं पर परखा। इनमें से अधिकांश बिल केंद्रीय कानूनों से टकराते हुए पाए गए। इन विधेयकों में खासतौर पर ऑनर किलिंग और मॉब लिंचिंग के खिलाफ बनाए गए विधेयक थे, जिन्हें पहले से ही भारतीय दंड संहिता में मौजूद पाया गया। राज्यपाल ने इन बिलों के कानूनी पहलुओं पर सवाल उठाते हुए इन्हें वापस भेज दिया।



सुप्रीम कोर्ट से लौटा विधेयक

सबसे अहम बात यह है कि राज्यपाल ने ऑनर किलिंग और मॉब लिंचिंग के खिलाफ बने विधेयकों को भी लौटा दिया। इन विधेयकों में ऑनर किलिंग के लिए उम्रकैद और पांच लाख रुपए का जुर्माना लगाने का प्रस्ताव था। मॉब लिंचिंग पर कड़ी सजा का प्रावधान रखा गया था। राजभवन ने अवलोकन पर पाया कि दोनों विधेयकों में पहले से भारतीय दंड संहिता (IPC) में प्रावधान मौजूद थे।



प्राइवेट यूनिवर्सिटी बिल और धर्म स्वातंत्र्य विधेयक

वसुंधरा राजे सरकार के समय पारित "राजस्थान धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2008" को पहले ही वापस लेने का फैसला किया जा चुका है। इसके बाद धर्मांतरण विरोधी कानून को लागू किया गया है। इसी तरह गहलोत सरकार के तहत पारित दो प्राइवेट यूनिवर्सिटी के बिल के प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए राज्यपाल ने इन्हें भी वापस भेज दिया।



राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने जनवरी 2026 में पूर्ववर्ती गहलोत सरकार के कार्यकाल के समय के 9 महत्वपूर्ण बिलों को राज्य विधानसभा को वापस लौटा दिया है। राज्यपाल ने इन बिलों के कानूनी पहलुओं और केंद्रीय कानूनों के साथ टकराव का हवाला देते हुए इन्हें पुनर्विचार के लिए भेजा है।



गहलोत सरकार के समय के यह लौटाए 9 विधेयक

  1. राजस्थान लिंचिंग से संरक्षण विधेयक-2019
  2. राजस्थान सम्मान और परंपरा के नाम पर वैवाहिक संबंधों की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप का प्रतिषेध विधेयक-2019
  3. कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) (राजस्थान संशोधन) विधेयक-2020
  4. कृषक (सशक्तीकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार (राजस्थान संशोधन) विधेयक-
    2020
  5. आवश्यक वस्तु (विशेष उपबंध और राजस्थान संशोधन) विधेयक-2020
  6. व्यास विद्यापीठ विश्वविद्यालय जोधपुर विधेयक-2022
  7. सौरभ विश्वविद्यालय, हिंडौन सिटी (करौली) विधेयक-2022
  8. राजस्थान विद्युत (शुल्क) विधेयक-2023
  9. नाथद्वारा मंदिर (संशोधन) विधेयक-2023

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