राजस्थान में 10 साल में 48% घटे भेड़िए, 892 से सिमटकर 467 रह गई संख्या
राजस्थान में भारतीय ग्रे भेड़ियों की संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। पिछले 10 साल में इनकी संख्या 892 से घटकर 467 रह गई, यानी करीब 48 प्रतिशत की कमी आई है। जोधपुर में भी भेड़ियों की मौजूदगी तेजी से कम हुई है। वर्ष 2024 में यहां 55 भेड़िए दर्ज किए गए थे, जबकि 2026 की गणना में केवल 26 भेड़िए मिले।
प्राकृतिक आवास और भोजन पर बढ़ता दबाव
राजस्थान में भारतीय ग्रे भेड़ियों की घटती संख्या वन्यजीव संरक्षण के लिए चिंता का विषय बन गई है। वर्ष 2016 की गणना में प्रदेश के संरक्षित क्षेत्रों में 123 और संरक्षित क्षेत्रों के बाहर 769 भेड़िए दर्ज किए गए थे। इस तरह कुल संख्या 892 थी। वर्ष 2026 की गणना में यह आंकड़ा घटकर 467 रह गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, प्राकृतिक शिकार की कमी, आवास में बदलाव और मानवीय गतिविधियों का बढ़ता दबाव भेड़ियों के लिए चुनौती बन सकता है। इनके प्राकृतिक क्षेत्र सिमटने और भोजन की उपलब्धता प्रभावित होने से इंसानों तथा वन्यजीवों के बीच टकराव की आशंका भी बढ़ती है।
लूणी नदी क्षेत्र में कम हुई मौजूदगी
जोधपुर के लूणी नदी क्षेत्र में पहले भेड़ियों के झुंड दिखाई देते थे, लेकिन अब इनकी मौजूदगी कम होती जा रही है। वर्ष 2024 में जोधपुर में 55 भेड़िए दर्ज हुए थे, जबकि 2026 की गणना में इनकी संख्या घटकर 26 रह गई। यह गिरावट स्थानीय स्तर पर संरक्षण की जरूरत को उजागर करती है।
हमलों के बाद दो भेड़ियों को मार दिया गया
पिछले साल जोधपुर के शिकारपुरा और लूणी पंचायत समिति क्षेत्र के आसपास भेड़ियों के हमलों में 10 ग्रामीण घायल हुए थे। इसके बाद ग्रामीणों ने दो भेड़ियों को मार दिया था। एक अन्य भेड़िया जोधपुर हाईवे पर मृत मिला था। हाल ही में बालोतरा जिले में भी एक महिला पर भेड़िए के हमले की घटना सामने आई।
ऐसी घटनाओं से ग्रामीणों की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण, दोनों को लेकर सवाल खड़े होते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हमले की घटनाओं में परिस्थितियों की जांच करना जरूरी है। यदि किसी भेड़िए के व्यवहार में असामान्य बदलाव दिखे, तो उसके स्वास्थ्य की वैज्ञानिक जांच की जानी चाहिए।
संरक्षण के लिए वैज्ञानिक निगरानी जरूरी
भारतीय ग्रे भेड़िया वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-1 में शामिल है। इस प्रजाति को बचाने के लिए प्राकृतिक आवास सुरक्षित रखने, शिकार प्रजातियों की उपलब्धता बनाए रखने और वैज्ञानिक निगरानी बढ़ाने की जरूरत है। साथ ही ग्रामीणों को जागरूक करना और हमले की स्थिति में त्वरित सहायता उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
आगे क्या?
वन विभाग के सामने अब भेड़ियों की घटती संख्या के कारणों की वैज्ञानिक पड़ताल करने की चुनौती है। प्राकृतिक आवास और भोजन की उपलब्धता सुधारने के साथ उन क्षेत्रों की निगरानी बढ़ानी होगी, जहां इंसानों और भेड़ियों के बीच टकराव की घटनाएं सामने आई हैं। इससे वन्यजीवों के संरक्षण और ग्रामीणों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने में मदद मिल सकती है।