कैचमेंट एरिया में अतिक्रमण पर हाई कोर्ट सख्त, कहा- प्राकृतिक बहाव रोकना घातक

Mukesh Sharma | Jul 04, 2026, 07:11 IST
हाईकोर्ट ने जल स्रोतों से अतिक्रमण हटाने के दिए निर्देश
राजस्थान हाई कोर्ट ने जल स्रोतों के संरक्षण हेतु अधिकारियों को कैचमेंट एरिया और नालों से तुरंत अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने निचली अदालतों की सुनवाई पर रोक लगाते हुए कहा कि पानी का प्राकृतिक बहाव रोकना रेगिस्तानी प्रदेश के लिए घातक है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • राजस्थान हाई कोर्ट ने जल स्रोतों से अतिक्रमण हटाने के दिए सख्त निर्देश।
  • नदी-नालों और कैचमेंट एरिया में पानी के प्राकृतिक बहाव को रोकना घातक- हाई कोर्ट।
  • कैचमेंट एरिया से जुड़े दीवानी मुकदमों पर सिविल-राजस्व कोर्ट की सुनवाई पर रोक।
  • रामगढ़ झील और कूकस के पूरे कैचमेंट एरिया पर लागू होगा यह आदेश।
  • कृषि भूमि पर चारदीवारी बनाने वालों को निर्देश- पानी का बहाव न रोकें।

राजस्थान हाई कोर्ट ने जल संरक्षण से जुडे मामले में कहा है कि प्रदेश में नदी, नालों व कैचमेंट एरिया में पानी का बहाव होना जरूरी है, ताकि बारिश का पानी नदी व झीलों में जा सके।



इसके साथ ही अदालत ने संबंधित अफसरों को कहा है कि यदि कैचमेंट एरिया में कोई कब्जे या अतिक्रमण हैं तो उन्हें तुरंत हटाया जाए।



एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा व जस्टिस मनीष शर्मा की बैंच ने यह आदेश सांगानेर तहसील के ग्राम खटवाड़ा में गैर मुमकिन नाले में अवैध अतिक्रमण को चुनौती देने वाली गोविन्द राम की याचिका पर दिया।



अदालत ने कहा है कि जलग्रहण क्षेत्र से संबंधित दीवानी मुकदमों को लेकर सिविल कोर्ट और राजस्व कोर्ट सुनवाई नहीं करेंगी।



रामगढ़ व कूकस पर भी लागू होगा आदेश

कोर्ट ने कहा कि पूर्व में कैचमेंट एरिया में बहुत ज्यादा निर्माण होने के कारण रामगढ़ बांध व कूकस तक पानी का बहाव रुकने के कारण अदालत ने स्वप्रेरित प्रसंज्ञान (suo motu) लिया था।



इसलिए यह आदेश न केवल मौजूदा याचिका में बताए क्षेत्र पर ही नहीं, बल्कि रामगढ़ और कूकस के पूरे कैचमेंट क्षेत्र पर भी लागू होगा।



भूजल ही एकमात्र जल स्त्रोत

कोर्ट ने कहा कि रेगिस्तानी इलाके में जमीन के नीचे के पानी को बढ़ाने का एकमात्र जरिया ये जल स्रोत ही हैं। लोग कृषि भूमि खरीदकर उस पर पक्की चारदीवारी निर्माण कराते हैं। जिससे पानी का बहाव रुक जाता है।



हालांकि कृषि भूमि का सीमांकन भी जरूरी है। लेकिन साथ ही यह भी देखा जाए की चारदीवारी से पास के जल निकायों में पानी जाना नहीं रुके। इसके लिए चारदीवारी के नीचे पानी जाने के लिए पर्याप्त रास्ता होना चाहिए। प्राकृतिक जल मार्गो के नालों को पाटने से पानी प्रवाह का प्राकृतिक रास्ता बाधित हो गया है।



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