हाई कोर्ट ने दो टूक कहा- नौकरी करनी है तो ट्रांसफर के लिए तैयार रहें
समझें क्या है पूरा मामला
- CSD के कर्मचारी छत्रपाल सिंह का जयपुर से मुंबई ट्रांसफर विवाद अदालत तक गया।
- उन्होंने दावा किया कि ट्रांसफर उनके पद के अनुरूप नहीं और बदले की कार्रवाई है।
- CAT ने उनकी याचिका खारिज कर दी, विभागीय जरूरतों को आधार बताया।
- राजस्थान हाई कोर्ट ने भी ट्रांसफर को वैध मानते हुए याचिका ठुकरा दी।
- कोर्ट ने कहा कि 2011 की ट्रांसफर पॉलिसी केवल दिशानिर्देश है, कानूनी अधिकार नहीं।
CSD (कैंटीन स्टोर्स डिपार्टमेंट) में कार्यरत कर्मचारी छत्रपाल सिंह का फरवरी 2025 में जयपुर से मुंबई ट्रांसफर किया गया था। उन्होंने इस ट्रांसफर को CAT में चुनौती दी थी। CAT से याचिका खारिज होने के बाद हाईकोर्ट पहुंचे। राजस्थान हाई कोर्ट ने भी याचिका ठुकरा दी। कोर्ट ने कहा - ट्रांसफर पॉलिसी कानून नहीं, सिर्फ दिशानिर्देश है।
क्यों दी गई चुनौती
छत्रपाल सिंह गौर रक्षा मंत्रालय के अधीन कैंटीन स्टोर्स डिपार्टमेंट (CSD – Canteen Stores Department) में एलडीसी (LDC – Lower Division Clerk) के पद पर काम करते हैं। नवंबर 2018 में उनकी नियुक्ति जयपुर में हुई थी। शुरुआत में वे बठिंडा में तैनात थे।
मार्च 2023 में उनके अपने अनुरोध पर जयपुर ट्रांसफर हुआ। फिर 3 फरवरी 2025 को विभाग ने उन्हें मुंबई के CSD मुख्य कार्यालय भेज दिया।
कर्मचारी ने क्या दलीलें दीं
छत्रपाल का कहना था कि LDC (स्टोर्स) के रूप में उन्हें केवल स्टोर यूनिट में तैनात किया जा सकता है। मुंबई का प्रशासनिक कार्यालय उनके पद के अनुकूल नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि विभाग ने 2011 की ट्रांसफर पॉलिसी का उल्लंघन किया। "सबसे लंबे समय से एक जगह टिके कर्मचारी को पहले भेजा जाए" वाले नियम को नजरअंदाज किया गया। 25 वरिष्ठ कर्मियों को छोड़कर उन्हें निशाना बनाया गया।
सबसे बड़ा आरोप यह था कि यह ट्रांसफर बदले की कार्रवाई है। उन्होंने 2022-23 के बकाया बोनस को लेकर रक्षा मंत्री को ईमेल किया था। साथ ही सूचना का अधिकार (RTI – Right to Information) अधिनियम के तहत जानकारी मांगी थी।
CAT ने क्या कहा था
केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT – Central Administrative Tribunal) ने पहले उन्हें विभाग में अभ्यावेदन देने का मौका दिया। विभाग ने मुंबई में कर्मचारियों की भारी कमी का हवाला दिया। प्रशासनिक आधार पर अभ्यावेदन खारिज कर दिया।
छत्रपाल फिर CAT गए। 26 मई 2026 को यह नई अपील भी खारिज हो गई। इसके बाद वे राजस्थान हाई कोर्ट पहुंचे।
हाई कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया
जस्टिस उमाशंकर व्यास और जस्टिस अशोक कुमार जैन की अवकाशकालीन खंडपीठ ने याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने CAT के आदेश को सही माना।
कोर्ट ने साफ कहा - ट्रांसफर सेवा की एक अंतर्निहित शर्त है। इसे लागू करवाने का कर्मचारी को न कानूनी अधिकार है, न मौलिक अधिकार।
एम्प्लॉयर का विवेक सर्वोपरि
कोर्ट ने जोर देकर कहा कि कर्मचारी की तैनाती और उपयुक्तता का फैसला एम्प्लॉयर का है। अदालत इसमें अपनी राय नहीं थोप सकती।
CSD का एक LDC यह दावा नहीं कर सकता कि उसे सिर्फ स्टोर यूनिट में ही रखा जाए। प्रशासनिक कार्यालय में काम करने से इनकार करने का उसे कोई अधिकार नहीं है।
2011 की ट्रांसफर पॉलिसी कानून नहीं
कोर्ट ने 2011 की ट्रांसफर पॉलिसी पर भी स्थिति साफ की। ऐसी पॉलिसी सामान्य कामकाज के लिए दिशानिर्देश होती हैं। यह अनिवार्य वैधानिक नियम नहीं है।
जब नीति में खुद यह प्रावधान हो कि प्रशासनिक जरूरत पड़ने पर नियमों से हटा जा सकता है, तो कोर्ट उसमें दखल नहीं दे सकती।
तीन साल से ज्यादा जयपुर में रहे
कोर्ट ने यह भी ध्यान दिलाया कि छत्रपाल ने अंतरिम रोक के आदेश की मदद से जयपुर में तीन साल से अधिक समय बिता लिया। ट्रांसफर पॉलिसी में दो से तीन साल का मानक कार्यकाल तय है। वे पहले ही इससे आगे निकल चुके हैं।
बदले की कार्रवाई का आरोप खारिज
कोर्ट ने RTI और रक्षा मंत्री को ईमेल वाले बदले की कार्रवाई के आरोप को भी नकार दिया। एक ही आदेश से छत्रपाल के साथ दो अन्य कर्मचारियों का भी ट्रांसफर हुआ था। इससे साफ है कि यह प्रशासनिक जरूरत के आधार पर हुआ, बदले की भावना से नहीं।
FAQ
- क्या कोई कर्मचारी अपने ट्रांसफर को कोर्ट में रोक सकता है?
राजस्थान हाईकोर्ट के अनुसार ट्रांसफर रोकना कर्मचारी का कानूनी या मौलिक अधिकार नहीं है। ट्रांसफर सेवा की अंतर्निहित शर्त होती है। सिर्फ असाधारण परिस्थितियों में ही अदालत दखल देती है। - ट्रांसफर पॉलिसी का उल्लंघन होने पर क्या राहत मिलती है?
ट्रांसफर पॉलिसी को कोर्ट ने दिशानिर्देश माना है, अनिवार्य कानून नहीं। प्रशासनिक जरूरत पड़ने पर विभाग इससे हट सकता है। ऐसे में कर्मचारी को कोर्ट से राहत मिलना मुश्किल होता है। - RTI दाखिल करने के बाद ट्रांसफर हो तो क्या बदले की कार्रवाई मानी जाएगी?
केवल RTI दाखिल करने या शिकायत भेजने से ट्रांसफर को बदले की कार्रवाई नहीं माना जाता। कोर्ट देखती है कि क्या अन्य कर्मचारियों का ट्रांसफर भी उसी आदेश से हुआ। यदि प्रशासनिक आधार स्पष्ट हो तो बदले का आरोप नहीं टिकता।
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