राजस्थान हाई कोर्ट ने दुग्ध संघों में प्रशासक लगाने पर लगाई रोक, सरकार से मांगा जवाब

Jageshwar prasad | May 15, 2026, 13:30 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसके तहत जिला दुग्ध संघों और प्राथमिक समितियों में प्रशासक नियुक्त किए जाने थे। अदालत ने चुनाव समय पर न कराने को लेकर सरकार और को-ऑपरेटिव चुनाव ट्रिब्यूनल को नोटिस जारी किया है।

News In Short

  • राजस्थान हाई कोर्ट ने दुग्ध संघों व समितियों में प्रशासक लगाने पर लगाई रोक।
  • कोर्ट ने पूछा कि प्रशासक नियुक्त करने का निर्णय किस आधार पर लिया गया।
  • कोर्ट ने को-ऑपरेटिव चुनाव ट्रिब्यूनल से समय पर चुनाव न कराने का मांगा जवाब।
  • याचिका में प्रशासकों की नियुक्ति को सहकारी सिद्धांत में हस्तक्षेप माना।
  • हाई कोर्ट ने को-ऑपरेटिव चुनाव ट्रिब्यूनल को निर्देश दिया है कि जल्द चुनाव कराए।

News In Detail

राजस्थान में सहकारी समितियों और डेयरी संघों के प्रबंधन को लेकर चल रही खींचतान में हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप किया है। जयपुर डेयरी की गणेशपुरा दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति सहित 10 अन्य समितियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने साफ किया है कि चुनाव में देरी का आधार बनाकर प्रशासक नियुक्त करना सही नहीं है।



क्या था पूरा मामला?

अधिवक्ता डॉ. अभिनव शर्मा ने कोर्ट को बताया कि राजस्थान के सभी जिला दुग्ध संघों और उनसे जुड़ी प्राथमिक समितियों के चुनाव साल 2021 में हुए थे। इनका 5 साल का कार्यकाल इस साल फरवरी में समाप्त हो गया। कार्यकाल खत्म होने के बाद, रजिस्ट्रार (सहकारी संस्थाएं) ने इन समितियों का प्रबंधन संभालने के लिए प्रशासक नियुक्त करने का आदेश जारी कर दिया।



ट्रिब्यूनल की जिम्मेदारी पर सवाल

याचिकाकर्ताओं का मुख्य तर्क यह है कि नियमों के मुताबिक समय पर चुनाव कराने की जिम्मेदारी को-ऑपरेटिव चुनाव ट्रिब्यूनल की थी। ट्रिब्यूनल को पता था कि फरवरी में कार्यकाल खत्म हो रहा है, फिर भी कोई चुनाव कार्यक्रम घोषित नहीं किया गया। प्रार्थियों ने दलील दी कि अपनी ही विफलता (चुनाव न कराना) का फायदा उठाकर सरकार इन लोकतांत्रिक संस्थाओं पर अपना नियंत्रण नहीं थोप सकती।



हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासक लगाने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सहकारी संस्थाओं का स्वरूप लोकतांत्रिक होता है और इनमें निर्वाचित प्रतिनिधियों का होना आवश्यक है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर इस देरी का कारण बताने को कहा है।



आगे क्या होगा?

हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब गेंद चुनाव ट्रिब्यूनल के पाले में है। अदालत ने ट्रिब्यूनल को छूट दी है कि वह जल्द से जल्द चुनाव प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय ले सकता है।



अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

हाई कोर्ट ने प्रशासक लगाने पर रोक क्यों लगाई?

अदालत का मानना है कि सहकारी समितियों का ढांचा लोकतांत्रिक है और सरकार चुनाव कराए बिना मनमाने ढंग से प्रशासक नियुक्त कर इसमें दखल नहीं दे सकती।



दुग्ध संघों के चुनाव पिछली बार कब हुए थे?

राजस्थान में जिला दुग्ध संघों और प्राथमिक दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों के चुनाव आखिरी बार वर्ष 2021 में आयोजित किए गए थे।



अब चुनाव कब हो सकते हैं?

हाईकोर्ट ने को-ऑपरेटिव चुनाव ट्रिब्यूनल को जल्द चुनाव प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है। उम्मीद है कि ट्रिब्यूनल जल्द ही नया चुनाव कार्यक्रम घोषित करेगा।



ये भी पढ़ें:-

शिक्षकों का 4 साल पुरानी सूची से होगा प्रमोशन, 25 जून तक आएगी फाइनल लिस्ट



पेट्रोल-डीजल पर सीलिंग की आहट; राजस्थान में अब पंपों पर तेल मिलने की सीमा तय



जादूगर गहलोत की नई बिसात, डोटासरा को ढाल बना पायलट पर साध रहे निशाना!



नीट पेपर लीक 2025: विकास के परिवार ने पेपर 25 लाख में खरीदा, पांचों भाई-बहन का सरकारी कॉलेज में हुआ सलेक्शन



Tags:
  • राजस्थान हाई कोर्ट
  • हाई कोर्ट
  • सहकारी समिति
  • जस्टिस समीर जैन
  • को-ऑपरेटिव चुनाव ट्रिब्यूनल