राजस्थान हाईकोर्ट की वेबसाइट पर फर्जी जमानत आदेश अपलोड, एनडीपीएस आरोपी की रिहाई की आशंका

Jyoti Mahender Bhardwaj | Nov 04, 2026, 11:15 IST
हाईकोर्ट वेबसाइट की सुरक्षा पर सवाल
एनडीपीएस आरोपी को फर्जी आदेश से जमानत मिलने की आशंका
राजस्थान हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर एनडीपीएस मामले के आरोपी कलविंदर सिंह को जमानत देने का कथित आदेश अपलोड होने से न्यायिक प्रशासन में गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि 26 अक्टूबर 2026 की तारीख वाले इस आदेश को हाईकोर्ट ने पारित ही नहीं किया था। मामले की जानकारी सामने आने के बाद हाईकोर्ट प्रशासन ने इसे मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखा है। फिलहाल शुरुआती जांच जारी है और आरोपी की रिहाई से जुड़ी खबरों की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

हाईकोर्ट ने पारित नहीं किया था जमानत आदेश

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, आदेश श्रीगंगानगर जिले के राजियासर थाने में दर्ज एनडीपीएस मामले से संबंधित है। आदेश में जिस न्यायाधीश का नाम बताया गया है, वे संबंधित तारीख को खंडपीठ में सुनवाई कर रहे थे।



इसके अलावा, आदेश में दर्ज जमानत याचिका संख्या भी हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में मौजूद नहीं बताई जा रही है। इन तथ्यों के सामने आने के बाद आदेश की सत्यता पर सवाल उठे हैं।



आरोपी से जुड़े तीन अलग-अलग आदेश अपलोड

कलविंदर सिंह से संबंधित तीन अलग-अलग आदेश विभिन्न तारीखों में हाईकोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किए जाने की जानकारी सामने आई है। हाईकोर्ट प्रशासन इन सभी आदेशों की जांच कर रहा है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि बिना न्यायिक आदेश के ऐसे दस्तावेज वेबसाइट पर कैसे अपलोड हुए और इसके पीछे कौन जिम्मेदार है।



सूरतगढ़ जेल से रिहाई की आशंका

सूत्रों के हवाले से आशंका जताई जा रही है कि आरोपी कथित फर्जी जमानत आदेश के आधार पर सूरतगढ़ जेल से बाहर आ गया। उसके देश छोड़ने की संभावना भी व्यक्त की जा रही है। आरोपी की रिहाई और देश छोड़ने से संबंधित इन दावों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।



वेबसाइट की सुरक्षा में सेंध या तकनीकी गड़बड़ी?

हाईकोर्ट प्रशासन यह जांच कर रहा है कि कथित आदेश वेबसाइट पर किस प्रक्रिया से अपलोड हुए।



जांच में इन संभावित पहलुओं पर ध्यान दिया जा रहा है:



  • वेबसाइट की सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगी या नहीं।
  • किसी अधिकृत लॉगिन का दुरुपयोग हुआ या नहीं।
  • आदेश अपलोड करने में तकनीकी गड़बड़ी हुई या किसी अन्य तरीके का इस्तेमाल किया गया।
  • तीनों आदेशों के अपलोड होने के पीछे एक ही व्यक्ति या समूह की भूमिका है या नहीं।

मुख्य न्यायाधीश के निर्देश के बाद होगी कार्रवाई

मामला मुख्य न्यायाधीश के सामने रखे जाने के बाद मुकदमा दर्ज कराने और कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर निर्णय लिया जा सकता है। जांच के जरिए यह भी पता लगाया जाएगा कि कथित फर्जी आदेशों से किसी अन्य मामले में भी फायदा उठाने की कोशिश हुई या नहीं।



यह खबर क्यों जरूरी है

न्यायालय के आदेशों की प्रामाणिकता न्यायिक व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ी होती है। यदि आधिकारिक वेबसाइट पर बिना पारित हुए आदेश अपलोड होने की आशंका सही साबित होती है, तो यह डिजिटल न्यायिक रिकॉर्ड की सुरक्षा और जेलों में रिहाई की सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।



आगे क्या?

हाईकोर्ट प्रशासन की जांच में आदेश अपलोड करने वाले व्यक्ति, वेबसाइट की सुरक्षा और आरोपी की संभावित रिहाई से जुड़े तथ्यों का पता लगाया जाएगा। मुख्य न्यायाधीश के निर्देश के बाद एफआईआर और अन्य कार्रवाई पर निर्णय हो सकता है। फिलहाल मामले से जुड़े सभी प्रमुख दावों की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।



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