अस्पतालों की बदहाली पर सरकार को नोटिस, हाई कोर्ट ने 19 अगस्त तक मांगा जवाब
समझें क्या है पूरा मामला
- अस्पतालों की बदहाली को लेकर हाई कोर्ट ने अपनाया सख्त रुख।
- हाई कोर्ट ने सरकार को नोटिस देकर 19 अगस्त तक मांगा जवाब।
- कैग की चेतावनी के बावजूद नहीं चेती सरकार, हादसों को मिला बढ़ावा।
- IPHS, बायो-मेडिकल वेस्ट और फायर सेफ्टी नियमों का सरेआम उल्लंघन।
- चिकित्सा लापरवाही से पीड़ितों के लिए समान मुआवजे की बने नीति।
राजस्थान हाई कोर्ट ने सरकारी अस्पतालों में बुनियादी ढांचे और सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर कमियों पर राजस्थान सरकार से जवाब मांगा है।
कोर्ट ने प्रमुख सचिव चिकित्सा को कैग की 2024 की रिपोर्ट में बताई खामियों के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी का शपथ पत्र मांगा है।
एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा व जस्टिस मनीष शर्मा ने यह अंतरिम आदेश असीम सिमलोट की जनहित याचिका पर दिए।
मानदंड की नहीं हो रही पालना
याचिका में कहा है कि सरकारी अस्पतालों में बुनियादी सुरक्षा और परिचालन मानकों की पालना नहीं हो रही है। इनमें भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानक (IPHS), बायो-मेडिकल वेस्ट (कचरा) प्रबंधन नियम और अनिवार्य अग्निशमन (फायर) सुरक्षा मानदंड शामिल हैं।
इन व्यवस्थागत विफलताओं को पहले कैग की 2024 की रिपोर्ट में भी रेखांकित किया गया है। कैग (CAG) की स्पष्ट चेतावनियों के बावजूद सरकार ने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए हैं। इसके कारण अस्पतालों में मरीजों की मौत, चिकित्सा लापरवाही और अन्य मामले सामने आ रहे हैं।
खामियां समय रहते दूर करते तो
कोर्ट को बताया गया कि यदि कैग की सिफारिशों को समय रहते और प्रभावी ढंग से लागू किया होता, तो कई घटनाओं को रोका जा सकता था। इनमें सरकारी दवाओं के सेवन से बच्चों की मौत और एसएमएस ट्रॉमा सेंटर में लगी आग की घटना शामिल है।
याचिकाकर्ता ने स्वयं एसएमएस अस्पताल का दौरा किया। इसमें वहां टूटी हुई छतें व अन्य बुनियादी कमियां पाईं हैं। इससे साफ है कि सुरक्षा मानकों और आधिकारिक निर्देशों का ठीक से पालन नहीं हो रहा है।
सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा लापरवाही के शिकार लोगों के लिए समान मुआवजा नीति नहीं होने से प्रभावित परिवारों के साथ असमान व्यवहार होता है।
समान मुआवजा नीति बनाए सरकार
याचिका में राज्य सरकार से तत्काल और जवाबदेह कार्रवाई की मांग की गई है। इसमें अस्पतालों में IPHS दिशानिर्देशों, बायो-मेडिकल कचरा नियमों और फायर सेफ्टी मानकों को कड़ाई से लागू करने का मांग की है।
साथ ही कैग रिपोर्ट की सिफारिशों का पालन करने का आग्रह किया है। चिकित्सा लापरवाही और अस्पताल से जुड़ी दुर्घटनाओं के पीड़ितों को एक समान मुआवजा योजना तैयार करने की भी पैरवी की गई है।
19 अगस्त तक दे सरकार जवाब
कोर्ट ने मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा है। प्रमुख चिकित्सा सचिव से कैग रिपोर्ट में बताई कमियों को दूर करने के लिए उठाए कदमों पर शपथ पत्र पेश करने को कहा है।
कोर्ट ने अतिरिक्त महाधिवक्ता विज्ञान शाह को नोटिस थमाते हुए जवाब पेश करने व अगली सुनवाई 19 अगस्त को तय की है।
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