हाई कोर्ट का फुटपाथ-सड़क से अवैध मंदिर हटाने का आदेश, वैध मंदिरों में शिफ्ट करों मूर्तियां

Mukesh Sharma | Jan 28, 2026, 20:36 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान हाई कोर्ट ने जयपुर में सड़क किनारे बने अवैध मंदिरों को हटाने का आदेश दिया है। मूर्तियों को वैध मंदिरों में शिफ्ट करने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

News in Short

  • फुटपाथ व सड़कों से अवैध मंदिर हटाने के आदेश
  • अवैध मंदिर से मूर्तियां वैध रुप से बने मंदिर में लगाने के निर्देश
  • प्रतापनगर में आम रास्ते पर दुकानें व मंदिर बनाने का मामला
  • पूरे शहर में फुटपाथ व सड़कोंं से अवैध मंदिर हटाने के निर्देश
  • जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई करने के निर्देश

News in Detail

राजस्थान हाई कोर्ट ने जयपुर शहर में फुटपाथ,सड़क और आम रास्ते पर अवैध रूप से बने मंदिरों को हटाने का आदेश दिया हैं। एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की बैंच ने यह आदेश सनी मीणा की जनहित याचिका पर दिए। अदालत ने जयपुर नगर निगम कमिश्नर को निर्देश दिए कि वह अगली सुनवाई पर कोर्ट में शपथपत्र पेश करके बताए कि उन्होने शहर में फुटपाथ और अन्य स्थानों पर अवैध रूप से बने मंदिरों को हटाने के लिए क्या कदम उठाए।



हाई कोर्ट ने सरकार से कहा है कि वह अवैध रूप से बने मंदिरों के भवन को धवस्त करने और उनकी मूर्तियों को पास के वैध मंदिरों में शिफ्ट करने के लिए आवश्यक दिशा निर्देश जारी करें। अदालत 4 फरवरी को मामले की अगली सुनवाई करेगी।



प्रताप नगर के अवैध मंदिर को 7 दिन में हटाने के निर्देश

एडवोकेट अखिलेश पारीक ने बताया कि प्रताप नगर सेक्टर-7 में आम रास्ते पर बनी दुकानों और मंदिर को लेकर सनी मीणा ने एक जनहित याचिका दायर की थी। इसमें कहा गया है कि कुछ लोगों ने आम रास्ते पर अतिक्रमण करके दुकानों और मंदिर का निर्माण कर लिया हैं। यह लोग मंदिर की आड़ में दुकानें संचालित कर रहे हैं। अदालत में जनहित याचिका लगने के बाद नगर-निगम ने कुछ दुकान तो हटा दीं, लेकिन ना तो मंदिर हटाया और ना बाकी दुकानें हटाई हैं।



ताजा फोटो पेश कर बताया पुराना नहीं है मंदिर

नगर निगम और अन्य पक्षकारों की ओर से कहा गया कि मंदिर पुराना है और लोगों की आस्था से जुड़ा हैं। इस पर याचिकाकर्ता ने अदालत के सामने मंदिर निर्माण की ताजा तस्वीरें पेश की। जिसके बाद कोर्ट निगम के डिप्टी कमिश्नर को 7 दिन में मंदिर हटाने और मूर्ति को अन्य मंदिर में शिफ्ट करने के आदेश दिए।



नगर निगम की है जिम्मेदारी

हाउसिंग बोर्ड की ओर से एडवोकेट अजय शुक्ला ने अदालत को बताया कि प्रताप नगर को नगर निगम को ट्रांसफर कर दिया है। इसलिए प्रताप नगर में निर्माण की अनुमति व अवैध निर्माण पर कार्रवाई की जिम्मेदारी नगर निगम की है।



जिम्मेदारों के खिलाफ हो कार्रवाई

अदालत ने कहा कि यह स्पष्ट है कि मंदिर का निर्माण बिना अनुमति के किया गया है। इस निर्माण के लिए संबंधित अधिकारी भी जिम्मेदार ठहराए जाने के पात्र है। इसलिए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की जाए।



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