राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: जांच लंबित होने पर भी मिलेगी प्रोविजनल पेंशन, 50% ग्रेच्युटी

Ashish Bhardwaj | Oct 27, 2026, 14:53 IST
जांच लंबित होने से नहीं रुकेगी पेंशन
राजस्थान हाईकोर्ट ने रिटायर कर्मचारियों के पेंशन को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि विभागीय कार्यवाही लंबित होने से किसी कर्मचारी को पेंशन और 50 प्रतिशत ग्रेच्युटी से वंचित नहीं किया जा सकता। जस्टिस कुलदीप माथुर ने सहकारिता विभाग से रिटायर अर्जुन सिंह की याचिका स्वीकार कर ली। उन्होंने जरूरी दस्तावेज जमा होने के 60 दिन के भीतर अर्जुन सिंह को लाभ जारी करने के निर्देश दिए।

राजस्थान हाई कोर्ट ने कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण फैसला दिया है। इस फैसले से उन रिटायरमेंट कर्मचारियों को फायदा होगा जो विभागीय जांच या न्यायिक कार्यवाही लंबित होने के कारण अपने पेंशन लाभ का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, कोर्ट का यह आदेश प्रोविजनल पेंशन और 50 प्रतिशत ग्रेच्युटी से संबंधित है। इसे हर मामले में पूरी नियमित पेंशन और पूरी ग्रेच्युटी जारी करने का आदेश नहीं माना जा सकता है।



रिटायरमेंट के दिन ही मिली थी चार्जशीट

याचिकाकर्ता अर्जुन सिंह चारण राजस्थान सरकार के सहकारिता विभाग में अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी के पद पर कार्यरत थे। वे 31 दिसंबर 2025 को रिटायर हुए। चारण के अनुसार, रिटायरमेंट वाले दिन ही उन्हें राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के नियम 16 के तहत चार्जशीट थमा दी गई।



चारण ने इस चार्जशीट को हाईकोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने 20 जनवरी 2026 को चार्जशीट पर रोक लगा दी। इसके बाद 7 अप्रैल 2026 को विभाग ने उनके खिलाफ रिकवरी का आदेश जारी कर दिया। चारण ने इस आदेश को भी चुनौती दी। हाईकोर्ट ने 21 अप्रैल 2026 को संबंधित अधिकारियों को उस आदेश के आधार पर रिकवरी करने से रोक दिया।



इसके बावजूद नहीं मिली पेंशन और ग्रेच्युटी

चार्जशीट और रिकवरी आदेश पर कोर्ट से राहत मिलने के बावजूद चारण को प्रोविजनल पेंशन और ग्रेच्युटी का लाभ नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने नई याचिका दायर कर इन लाभों को जारी करने की मांग की।



याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अवर दान उज्ज्वल ने पैरवी की। उन्होंने राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1996 के नियम 90 और 12 अक्टूबर 2021 की राज्य सरकार की अधिसूचना का हवाला दिया। उनका कहना था कि लागू नियमों के तहत लंबित विभागीय या न्यायिक कार्यवाही के दौरान भी संबंधित कर्मचारी को प्रोविजनल पेंशन और निर्धारित शर्तों के अनुसार ग्रेच्युटी का लाभ मिल सकता है।



सरकार ने क्या दलील दी?

राज्य सरकार की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल आई.आर. चौधरी और अधिवक्ता विक्रम चौधरी पेश हुए। सरकार ने कहा कि चारण के खिलाफ विभागीय कार्यवाही अभी लंबित है। साथ ही, उन्होंने पेंशन और ग्रेच्युटी जारी करने के लिए जरूरी सभी दस्तावेज भी जमा नहीं किए हैं।



सरकार का तर्क था कि आवश्यक दस्तावेज मिलने से पहले इन लाभों को जारी करने का निर्देश नहीं दिया जाना चाहिए। ऐसे में कोर्ट के सामने यह सवाल था कि लंबित कार्यवाही और दस्तावेजों की कमी के आधार पर कर्मचारी को पेंशन संबंधी राहत से वंचित रखा जा सकता है या नहीं।



कोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस कुलदीप माथुर ने मामले के तथ्यों और संबंधित नियमों पर विचार किया। कोर्ट ने कहा कि विभागीय कार्यवाही लंबित होने और चार्जशीट को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला नहीं आने के आधार पर चारण को प्रोविजनल पेंशन और 50 प्रतिशत ग्रेच्युटी से वंचित नहीं किया जा सकता।



इसी आधार पर हाईकोर्ट ने उनकी याचिका स्वीकार कर ली। कोर्ट ने चारण को निर्देश दिया कि यदि उन्होंने जरूरी दस्तावेज पहले जमा नहीं किए हैं, तो उन्हें तुरंत जमा करें। इसके बाद संबंधित अधिकारियों को राजस्थान सिविल सेवा (Rajasthan Civil Services) नियम, 1996 और 12 अक्टूबर 2021 की अधिसूचना के तहत निर्धारित लाभ जारी करने होंगे।



60 दिन में पूरी करनी होगी प्रक्रिया

हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) ने अधिकारियों को जरूरी दस्तावेज मिलने के बाद प्रोविजनल पेंशन और 50 प्रतिशत ग्रेच्युटी जारी करने की पूरी प्रक्रिया 60 दिन के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया है। यह समयसीमा 3 अक्टूबर 2026 के आदेश से जुड़ी है।



इस फैसले से साफ है कि विभागीय जांच और पेंशन लाभ की प्रक्रिया को अलग-अलग नियमों के तहत देखना होगा। जांच लंबित होने का मतलब अपने आप यह नहीं है कि रिटायर कर्मचारी को हर पेंशन लाभ से वंचित कर दिया जाए। हालांकि, अंतिम पेंशन और ग्रेच्युटी का निर्धारण संबंधित नियमों और कार्यवाही के नतीजे के अनुसार होगा।



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