75 साल की उम्र में बुजुर्ग दंपती ने मांगा तलाक, हाई कोर्ट बोला- नहीं दे सकते, जानिए क्यों

Mukesh Sharma | Feb 13, 2026, 16:17 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान हाई कोर्ट ने 75 साल पार की उम्र में एक दंपती के तलाक को मंजूरी देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि उम्र के इस पड़ाव पर तलाक देने से पत्नी के साथ बच्चों की सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान होगा।

News in Short

  • हाई कोर्ट का 75 साल पार के दंपती का तलाक मंजूर करने से इनकार
  • छोटे-मोटे झगड़े और असहमति को नहीं माना जा सकता क्रूरता
  • परेशानी समय के साथ सहनशीलता से हो जाती हैं आसान
  • तलाक से पत्नी ही नहीं, बल्कि बच्चों की सामजिक प्रतिष्ठा होगी धूमिल
  • इस दंपती के तलाक का केस चलते हुए हो गए 12 साल

News in Detail

राजस्थान हाई कोर्ट ने 58 साल से विवाहित 75 साल पार के दंपती के तलाक को मंजूरी देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि वैवाहिक संबंधों में तकरार और आए दिन छोटे-मोटे झगड़े होना सामान्य है। लेकिन, इन्हें क्रूरता मानकर तलाक की इजाजत नहीं दी जा सकती। जस्टिस अनिल उपमन व जस्टिस सुदेश बंसल ने यह आदेश समुद्र सिंह की याचिका को खारिज करते हुए दिए। यह मामला भरतपुर के रहने वाले समुद्र सिंह और उनकी पत्नी उमा देवी के बीच का है।



46 साल से साथ हो तो यही मानेंगे कि

कोर्ट ने कहा है कि दंपती 46 साल से साथ रह रहे हैं तो यही माना जाएगा कि दोनों के बीच समय के साथ समझ बेहतर ​तरीके से विकसित हो चुकी होगी। प्रारंभ में जिन बातों से चिडचिड़ापन होता है धीरे-धीरे समय के साथ उन आदत होने व सहनशीलता विकसित होने से वही बातें आसान हो जाती हैं।



पत्नी और बच्चों को होगी तकलीफ

कोर्ट ने कहा है कि दंपती के दो बेटे व एक बेटी है। तीनों विवाहित हैं। प्रोपर्टी का विवाद तलाक देने का उचित कारण नहीं हो सकता। विशेषकर उस दंपत्ति का जिसने 1967 से 2013 तक सुखपूर्वक जीवन व्य​तीत किया हो। उम्र के इस पड़ाव तलाक से ना केवल पत्नी को परेशानी होगी बल्कि विवाहित बच्चों की सामाजिक प्रतिष्ठा भी धूमिल होगी। वैसे भी तलाक का केस चलते हुए ही 12 साल हो चुके हैं। दोनों 75 साल की आयु पार कर चुके हैं। इसलिए तलाक की मंजूरी नहीं दी जा सकती।



यह है मामला

याचिकाकर्ता समुद्र सिंह का विवाह 1967 में हुआ था। वह 2010 में प्रिसिंपल पद से सेवानिवृत्त हुआ था। एक संपत्ति को बड़े बेटे के नाम करने को लेकर पति-पत्नी में विवाद हो गया था। पत्नी उमा देवी ने याचिकाकर्ता के खिलाफ दहेज प्रताड़ना व मारपीट की एफआईआर भी करवा दी थी। इस पर पुलिस ने एफआर लगा दी थी।



समुद्र सिंह ने अपनी पत्नी पर क्रूरता करने के आरोप लगाते हुए 2014 में फैमिली कोर्ट भरतपुर में तलाक की अर्जी दायर की थी। फैमिली कोर्ट ने सुनवाई के बाद क्रूरता के आरोप सही नहीं माने और 18 अक्टूबर,2019 को तलाक देने से इनकार कर दिया था। इस आदेश को याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने भी फैमिली कोर्ट के आदेश को सही मानते हुए दखल देने से इनकार कर दिया है।



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