सरपंच आरक्षण की नई लॉटरी निकालने के आदेश पर डीबी ने लगाई रोक,राज्य सरकार ने दी एसबी के आदेश को चुनौती
राजस्थान में पंचायत चुनाव से पहले सरपंच पदों के आरक्षण को लेकर चल रहे विवाद में हाईकोर्ट से बड़ा फैसला आया है। राजस्थान हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने भरतपुर और करौली जिले की तीन ग्राम पंचायतों में सरपंच पद के आरक्षण के लिए दोबारा लॉटरी निकालने के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है।
जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल और जस्टिस भुवन गोयल की बेंच ने राज्य सरकार की अपील पर यह अंतरिम आदेश दिया है। इससे पहले सिंगल बेंच ने 1 अक्टूबर 2026 को तीनों ग्राम पंचायतों में आरक्षण तय करने के लिए नए सिरे से लॉटरी निकालने के निर्देश दिए थे।
इन तीन ग्राम पंचायतों का मामला
यह विवाद भरतपुर जिले की पंचायत समिति उच्चैन की ग्राम पंचायत बरहदा और करौली जिले की पंचायत समिति श्रीमहावीरजी की दो ग्राम पंचायतों श्रीमहावीरजी और अकबरपुर से जुड़ा है।
महेंद्र सिंह, धीरज जाटव और रवींद्र सिंह की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सिंगल बेंच ने 1 अक्टूबर को सरपंच पद के आरक्षण की लॉटरी दोबारा निकालने का आदेश दिया था। इस फैसले को राज्य सरकार, पंचायती राज विभाग, राज्य निर्वाचन आयोग और संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारियों ने डिविजन बेंच में चुनौती दी।
सरकार बोली- 2020 से चल रहा आरक्षण का चक्र
राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल राजेंद्र प्रसाद ने कोर्ट में पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि सरपंच पदों का आरक्षण तय करते समय पूरे राज्य में आरक्षित वर्गों की जनसंख्या के प्रतिशत और निर्धारित रोटेशन व्यवस्था को ध्यान में रखा जाता है। इसे किसी एक ग्राम पंचायत की स्थिति के आधार पर तय नहीं किया जाता।
सरकार ने दलील दी कि विवाद से जुड़ी तीनों ग्राम पंचायतें किसी नई या हाल में पुनर्गठित पंचायत समिति का हिस्सा नहीं हैं। ये वर्ष 2020 में पुनर्गठित पंचायत समितियों में ही शामिल थीं।
सरकार के मुताबिक, 2020 के पंचायत चुनाव से आरक्षण का जो नया चक्र शुरू हुआ था, वर्ष 2026 के चुनाव में भी उसी क्रम को जारी रखा जा रहा है। सरकार ने तर्क दिया कि सिंगल बेंच ने संबंधित कानूनी प्रावधानों और रोटेशन व्यवस्था पर पर्याप्त ध्यान दिए बिना नई लॉटरी निकालने का आदेश दिया था।
याचिकाकर्ताओं ने आरक्षण दोहराने पर उठाए सवाल
दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं का कहना है कि संबंधित ग्राम पंचायतों में सरपंच पद का आरक्षण तय करते समय रोटेशन के नियमों का सही पालन नहीं किया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि अनुसूचित जाति यानी एससी श्रेणी का आरक्षण गलत तरीके से दोहराया गया है। इससे दूसरे वर्गों के योग्य उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने के अवसर प्रभावित हुए हैं।
याचिकाकर्ताओं ने एक ग्राम पंचायत में पिछले चुनावों के आरक्षण का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 1995 से 2020 तक अलग-अलग श्रेणियों के लिए सीट आरक्षित रही है। ऐसे में 2026 के चुनाव के लिए आरक्षण तय करते समय पुराने रोटेशन क्रम को ध्यान में रखा जाना चाहिए था।
14 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
दोनों पक्षों की दलीलों के बाद डिविजन बेंच ने सिंगल बेंच के 1 अक्टूबर के आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी है। साथ ही याचिकाकर्ताओं को अपना पक्ष रखने के लिए कहा है।
मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को होगी। फिलहाल यह अंतिम फैसला नहीं है। हाईकोर्ट में अब इस बात पर आगे सुनवाई होगी कि संबंधित ग्राम पंचायतों में सरपंच आरक्षण तय करने के लिए अपनाई गई रोटेशन व्यवस्था नियमों के अनुसार है या नहीं।