स्टेनोग्राफर भर्ती 2024 की मेरिट लिस्ट निरस्त, अब नए सिरे से जारी होगी मेरिट

Mukesh Sharma | Mar 19, 2026, 17:46 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान हाई कोर्ट ने स्टेनोग्राफर भर्ती 2024 को लेकर बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने मेरिट सूची को रद्द कर दिया है। कोर्ट के आदेश पर अब बिना अतिरिक्त छूट दिए नए सिरे से मेरिट सूची जारी होगी।

News In Short

  • स्टेनोग्राफर भर्ती 2024 को लेकर राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा आदेश।
  • कोर्ट ने रद्द की मेरिट लिस्ट, 5 फीसदी अतिरिक्त छूट को बताया गलत।
  • कोर्ट के आदेश पर बिना अतिरिक्त छूट के नए सिरे से जारी होगी मेरिट।
  • स्किल टेस्ट में गलतियों के लिए 5 फीसदी अ​तिरिक्त छूट अवैध घोषित।
  • कोर्ट ने कहा, भर्ती नियम में अपवाद स्वरुप ही दी जा सकती है छूट।

News In Detail

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्टेनोग्राफर भर्ती 2024 की 25 सितंबर, 2025 की प्रोविजनल और 21 अक्टूबर, 2025 को जारी मेरिट लिस्ट रद्ध कर दी है। कोर्ट ने कहा है कि स्किल टेस्ट में सभी श्रेणियों के लिए गलतियों पर अतिरिक्त 5 प्रतिशत छूट देना नियम विपरीत है। इसके साथ ही कोर्ट ने नए सिरे से मेरिट लिस्ट जारी करने को कहा है।



नई मेरिट में नियमों के तहत निर्धारित अधिकतम गलतियों की सीमा सामान्य वर्ग के लिए 20 फीसदी तथा एससी-एसटी के लिए 25 फीसदी को लागू किया जाएगा। कोर्ट ने कहा है कि अतिरिक्त 5 फीसदी की छूट स्किल टेस्ट में पर्याप्त मात्रा में कैंडीडेट नहीं मिलने पर ही दी जाए। ज​स्टिस आनंद शर्मा ने यह फैसला दिनेश शर्मा व अन्य की याचिकाओं को स्वीकार करते हुए दिया।



यह था मामला

आरएसएसबी ने स्टेनोग्राफर व निजी सहायक ग्रेड-दो की भर्ती 2024 का विज्ञापन जारी किया था। परीक्षा दो फेज में होनी थी। पहले फेज में न्यूनतम 40 फीसदी नंबर वाले ही दूसरे फेज की स्किल टेस्ट के लिए पात्र थे।



नियम के अनुसार स्किल टेस्ट में गलतियों में अनारक्षित श्रेणी को 20 फीसदी व एससी-एसटी कैंडीडेट को 25 फीसदी की छूट है। दोनों फेज के कुल नंबर के आधार पर मेरिट लिस्ट बननी थी। आरएसएसबी ने सभी कैंडीडेट्स को स्किल टेस्ट की गलतियों में 5 फीसदी की अतिरिक्त छूट देकर 25 सितंबर, 2025 को रिजल्ट के साथ 904 कैंडीडेट की प्रोविजनल मेरिट लिस्ट जारी कर दी।



गलत है अतिरिक्त छूट देना

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि नियमों के तहत पर्याप्त संख्या में कैंडीडेट नहीं मिलने पर ही गलतियों में 5 फीसदी की अतिरिक्त छूट दी जा सकती है, जबकि परीक्षा में हर श्रेणी के कैंडीडेट पर्याप्त संख्या में उपलब्ध हैं।



एससी व एसटी को मिला दोहरा लाभ

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि बिना आवश्यकता के अतिरिक्त 5 फीसदी की छूट देने से एससी व एसटी कैंडीडेट को अतिरिक्त लाभ पहुंचा। उन्हें पहले से ही गलतियों में 25 फीसदी की छूट थी। नियमानुसार एससी व एसटी अनारक्षित श्रेणी की सीट पर उसी स्थिति में आ सकते हैं, जब उन्होंने फीस के अतिरिक्त अन्य कोई छूट ना ली हो। लेकिन, गलतियों में 5 फीसदी की अतिरिक्त छूट से उन्हें मेरिट में ऊपर होने के कारण दोहरा लाभ मिल रहा है।



अतिरिक्त छूट के बिना ही भी पर्याप्त थे कैंडीडेट

याचिकाकर्ताओं के अनुसार 21 अक्टूबर, 2025 को जारी फाइनल मेरिट लिस्ट में 904 कैंडीडेट थे। इनमें से गैर-टीएसपी एरिया के 643 कैंडीडेट थे, जबकि गैर-टीएसपी एरिया की 444 पोस्ट हैं। इससे साबित है कि गैर-टीएसपी एरिया के लिए पर्याप्त संख्या में कैंडीडेट उपलब्ध थे। इतना ही नहीं, 5 फीसदी की अतिरिक्त छूट दिए बिना भी एससी, एसटी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस कैटेगरी में पर्याप्त संख्या में कैंडीडेट उपलब्ध थे। ऐसे में स्किल टैस्ट में गलतियों में 5 फीसदी की अतिरिक्ति छूट देना गैर-कानूनी है।



अवैध है आरएसएसबी की प्रक्रिया

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया में तय मानकों और नियमों से छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। नियमों में दी गई छूट केवल अपवाद के रूप में विशेष परिस्थितियों में ही लागू की जा सकती है। स्किल टेस्ट में अधिकतम गलती की सीमा का उद्देश्य कैंडीडेट्स की योग्यता सुनिश्चित करना है। इसे मनमाने तरीके से कम नहीं किया जा सकता।



कोर्ट ने कहा है कि बिना अतिरिक्त 5 फीसदी छूट के ही 444 पदों के मुकाबले 643 योग्य कैंडीडेट उपलब्ध थे। इसलिए अतिरिक्त छूट की कोई आवश्यकता नहीं थी। भर्ती के दौरान नियम बदलना असंवैधानिक है।



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