आवारा कुत्तों का आतंक खत्म करने के लिए क्या कदम उठाए, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
समझें क्या है पूरा मामला
- हाई कोर्ट ने आवारा कुत्तों के आतंक पर संज्ञान लेते हुए सरकार से जवाब मांगा।
- कोर्ट ने दिए निर्देश, डॉग्स का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य हो, उल्लंघन पर किया जाए जुर्माना।
- सार्वजनिक जगहों पर फेंसिंग तथा एंटी-रेबीज वैक्सीन की उपलब्धत कराने के निर्देश।
- हाईकोर्ट ने साफ किया कि यह आदेश सिर्फ जयपुर नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में लागू होगा।
राजस्थान हाई कोर्ट ने आवारा कुत्तों से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की पालना में अब तक की गई कार्रवाई बताने को कहा है।
एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस मनीष शर्मा की बैंच ने इस मामले में स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लेते हुए केन्द्र, राज्य सरकार और भारतीय पशु कल्याण बोर्ड से जवाब मांगा है।
कोर्ट ने साथ ही कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की पालना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने को भी कहा है।
अदालत ने इसके लिए राज्य सरकार को निर्देश भी दिए हैं। इसमें ऐसे सभी पालतू पशु (जिसमें कुत्ते भी हैं) जो मानव जीवन के लिए खतरा उत्पन्न कर सकते हैं, उनका अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन किया जाए। रजिस्ट्रेशन नहीं कराने वाले मालिकों पर जुर्माने सहित अन्य दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
आवारा कुत्तों की नसबंदी-वैक्सीनेशन कराए
हाई कोर्ट ने सरकार से पूछा कि क्या सभी शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल, खेल मैदान, बस स्टैण्ड, रेलवे स्टेशन के चारों तरफ फेंसिंग और गेट लगाए गए है या नहीं। पकड़े कुत्तों की नियमानुसार नसबंदी और वैक्सीनेशन किया जाए। पीएचसी और सीएचसी में पर्याप्त मात्रा में एंटी-रेबीज वैक्सीन उपलब्ध करवाई जाएं।
कोर्ट ने भारतीय पशु कल्याण बोर्ड को भी नोटिस जारी किया है। इसमें यह बताने को कहा है कि जिला स्तर पर पशु कल्याण बोर्ड की स्थापना के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। कोर्ट ने कुत्तों के काटने की घटनाओं की रोकथाम के लिए एसओपी तैयार करने की प्रगति बताने को कहा है।
बच्चों और बुजुर्गों को गंभीर खतरा
अदालत ने कहा कि आवारा कुत्तों का आतंक यानीडॉग बाइट की घटनाएं विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों के जीवन के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करती हैं।
कोर्ट ने कहा है कि नगर निकायों और पशुपालन विभाग के समन्वय स्थापित करके जागरूक करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। निर्देशों की अनुपालना केवल जयपुर शहर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि पूरे राजस्थान में इसे लागू किया जाना अनिवार्य हैं। मामले में अगली सुनवाई तीन अगस्त को होगी।
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