हाई कोर्ट का सख्त रुख: गिरफ्तारी के बाद आरोपियों की तस्वीर खींचना अपराध

Purshottam Kumar Joshi | Jan 21, 2026, 10:37 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान हाई कोर्ट ने आरोपी की गरिमा का उल्लंघन कर उनकी फटे कपड़ों में थाने के गेट पर तस्वीर खींचने को संविधान का उल्लंघन मानते हुए सख्त आदेश दिए। जैसलमेर पुलिस अधीक्षक और जोधपुर कमिश्नर को 24 घंटे में इंटरनेट से ऐसी सभी फोटो को हटाने के निर्देश दिए है।

News In Short

  • राजस्थान हाई कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सख्त रुख अपनाया।
  • आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद थाने के गेट पर तस्वीरें खींचना गलत माना गया।
  • कोर्ट ने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन करार दिया।
  • जैसलमेर के 10 लोगों ने पुलिस की इस प्रथा को चुनौती दी थी।
  • कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को 24 घंटे में तस्वीरें हटाने का आदेश दिया।

News In Detail

राजस्थान हाई कोर्ट ने पुलिस की उस कार्यप्रणाली को नकारा, जिसमें आरोपियों को थाने के गेट पर बैठाकर उनकी तस्वीरें खींची जाती थीं। कोर्ट ने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन मानते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति की गरिमा से खिलवाड़ करना अपराध है। जैसलमेर के 10 लोगों ने इस प्रथा को चुनौती दी थी, जिसके बाद कोर्ट ने पुलिस को 24 घंटे में ऐसी तस्वीरें हटाने का आदेश दिया।



हाई कोर्ट की प्रतिक्रिया

राजस्थान हाई कोर्ट ने पुलिस की उस कार्यप्रणाली पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को थाने के गेट पर बैठाकर उनकी तस्वीरें खींची जाती हैं और उन्हें सोशल मीडिया या अखबारों में प्रचारित किया जाता है। जस्टिस तफरजंद अली की बेंच ने इस कार्यप्रणाली को संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन मानते हुए कहा कि आरोपी को दोषी नहीं माना जा सकता और किसी भी व्यक्ति की गरिमा से खिलवाड़ करना अपराध है।



आरोपी की गरिमा का उल्लंघन

हाई कोर्ट ने इस प्रवृत्ति को सख्ती से नकारते हुए स्पष्ट किया कि चाहे आरोप कितने भी गंभीर क्यों न हों, किसी भी व्यक्ति की गरिमा से खिलवाड़ करना संविधान के खिलाफ है। अदालत ने इस मुद्दे पर विशेष रूप से पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी आरोपी के खिलाफ इस तरह की कार्यप्रणाली को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।



10 लोगों ने दाखिल की याचिका

यह मामला जैसलमेर के बसनपीर जूनी क्षेत्र से जुड़ा है, जहां इस्लाम खान सहित 10 लोगों ने हाई कोर्ट में एक क्रिमिनल रिट याचिका दायर की थी। इन लोगों ने पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों को फटे कपड़ों में थाने के गेट पर बैठाकर उनकी तस्वीरें खींचने की प्रथा को चुनौती दी। उनकी याचिका का नतीजा यह रहा कि हाई कोर्ट ने इस पर सख्त रुख अपनाया और पुलिस अधिकारियों को ऐसे अपमानजनक कृत्य को तुरंत बंद करने के आदेश दिए।



24 घंटे में तस्वीरें हटाने का निर्देश

राजस्थान हाई कोर्ट ने जैसलमेर पुलिस अधीक्षक और जोधपुर पुलिस कमिश्नर को आदेश दिए हैं कि वे 24 घंटे के भीतर इंटरनेट से सभी ऐसी तस्वीरों को हटाएं। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि पुलिस अधिकारियों को इस तरह के कार्यों से बचने की आवश्यकता है और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी आरोपी के अधिकारों का उल्लंघन न हो।



मुख्य बिंदु:

  • राजस्थान हाई कोर्ट ने आरोपी की गरिमा का उल्लंघन करते हुए उनकी तस्वीरें खींचने को संविधान का उल्लंघन माना और यह अपराध बताया।
  • हाई कोर्ट ने जैसलमेर एसपी और जोधपुर पुलिस कमिश्नर को 24 घंटे के भीतर आरोपी की अपमानजनक तस्वीरें इंटरनेट से हटाने का आदेश दिया।
  • जैसलमेर के 10 लोगों ने हाई कोर्ट में क्रिमिनल रिट याचिका दायर की थी, जिसमें पुलिस की इस अपमानजनक परंपरा को चुनौती दी गई थी।

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