हाईकोर्ट ने पूछा, कैसे करते हैं अमूल, सरस व मदर डेयरी सिंथेटिक दूध की रोकथाम?

Mukesh Sharma | Jul 05, 2026, 21:22 IST
अमूल-सरस-मदर डेयरी से हाईकोर्ट ने पूछा- सिंथेटिक दूध की जांच कैसे कर रहे हैं?
राजस्थान हाई कोर्ट ने मिलावटी दूध, पशु आहार में औद्योगिक यूरिया और सीवेज के पानी से होने वाली अवैध खेती पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने प्रमुख डेयरी ब्रांड्स से सिंथेटिक दूध रोकने के उपाय पूछे हैं।

समझें क्या है पूरा मामला

  • राजस्थान हाईकोर्ट ने अमूल, सरस, मदर डेयरी से पूछा- सिंथेटिक दूध की रोकथाम कैसे कर रहे हैं?
  • पशु आहार में औद्योगिक यूरिया मिलाने से दूध बन रहा जानलेवा, कोर्ट ने चेताया।
  • सीवेज के गंदे पानी में सब्जियों की खेती पर राज्यभर में होगी कार्रवाई।
  • प्रदूषण बोर्ड के अधिकारी व्यक्तिगत रूप से होंगे जिम्मेदार, कोर्ट का सख्त आदेश।
  • 4 अगस्त को अगली सुनवाई, RCDF और डेयरी ब्रांड्स को देना होगा हलफनामा।

राजस्थान हाई कोर्ट ने राज्य में मिलावटी दूध और सीवेज के पानी में सब्जी व फसलों की खेती पर कार्रवाई के आदेश दिए हैं।



एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा व जस्टिस मनीष शर्मा खाद्य पदार्थों में मिलावट के मामले में दर्ज जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे थे। इसमें स्व:प्रेरणा से दर्ज जनहित याचिका भी शामिल है।



पशु आहार में औद्योगिक यूरिया के धड़ल्ले से उपयोग पर चेतावनी

सीनियर एडवोकेट व मामले में न्यायमित्र (Amicus Curiae) एम.एस. सिंघवी ने एक रिपोर्ट पेश की। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट के अनुसार पशु आहार में भारी मात्रा में औद्योगिक ग्रेड का यूरिया मिलाया जा रहा है।



यूरिया का इतना उच्च स्तर पशुओं के स्वास्थ्य से गंभीर समझौता करता है। इससे पशु के शरीर में नाइट्रोजन व यूरिया के स्तर बढ़ता है जो मानव उपभोक्ताओं के लिए सीधा खतरा पैदा है।



इस कारण दूध की गुणवत्ता बेहद खराब हो जाती है। सीनियर एडवोकेट सिंघवी ने कोर्ट को बताया कि असुरक्षित कीटनाशकों के उपयोग से 535 किसानों की मृत्यु हो चुकी है।



आरसीडीएफ व दूसरे डेयरी ब्रांड कर क्या रहे हैं?

कोर्ट ने कहा कि सरस (RCDF), अमूल, लोटस और मदर डेयरी सहित प्रमुख ब्रांड और सहकारी समितियां पूरे राजस्थान में दूध उत्पादों की बिक्री कर रही हैं । इसलिए यह जानना जरुरी है कि ये डेयरी सिंथेटिेक दूध व दूध उत्पादों की जांच के लिए कौनसे तौर-तरीके अपना रहे हैं।



कोर्ट ने सरकार को इस संबंध में निरीक्षण करके रिपेार्ट पेश करने को कहा है। कोर्ट ने राजस्थान सहकारी डेयरी महासंघ (RCDF) को भी हलफनामे पर उत्पाद सुरक्षा के संबंध में कोर्ट के पिछले आदेश में दिए गए निर्देशों की पालना बतानी होगी।



महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने राज्य के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के लिए नमूनों का विवरण पेश किया। उन्होंने इस संबंध में एक डिटेल हलफनामा पेश करने के लिए समय लिया है।



गंदे पानी में खेती पर राज्यभर में हो कार्रवाई

कोर्ट ने सीवेज के गंदे पानी में उगाई जाने वाली सब्जियों व खेती करने पर जांच का दायरा जयपुर से बढ़ाकर राजस्थान के सभी जिलों तक कर दिया।



कोर्ट ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को एक व्यापक कार्रवाई रिपोर्ट (action-taken report) दायर करने के निर्देश दिए हैं। इसमें सीवेज व गंदे पानी में अवैध रुप से खेती करने वालों के खिलाफ दर्ज करवाई गई एफआईआर (FIR) व अन्य जरुरी कदम उठाने की जानकारी देनी है।



कोर्ट ने कहा है कि सीवेज व दूसरे गंदे तथा जहरीले पानी में खेती व सब्जी उगाने से रोकने के लिए प्रदूषण बोर्ड के अधिकारी व्यक्तिगत रुप से जिम्मेदार होंगे। कोर्ट ने अधिकारियों को पालना रिपोर्ट (compliance reports) प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। मामले में अगली सुनवाई के लिए 4 अगस्त 2026 को होगी।



ये भी पढ़ें:-

पूर्व विधायक बलजीत यादव को राजस्थान हाई कोर्ट से झटका, कोर्ट ने नहीं दी जमानत



राजस्थान हाई कोर्ट ने दुग्ध संघों में प्रशासक लगाने पर लगाई रोक, सरकार से मांगा जवाब



राजस्थान हाई कोर्ट का आदेश, यौन अपराधों में फोटो-वीडियो सीलबंद लिफाफे में हों पेश



आसाराम को राजस्थान हाई कोर्ट से मिली राहत, जेल में उचित चिकित्सा सुविधा के आदेश



Tags:
  • राजस्थान हाई कोर्ट
  • हाई कोर्ट
  • अमूल
  • मदर डेयरी
  • लोटस
  • सिंथेटिक दूध
  • सरस
  • जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा