राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, पुलिस पदोन्नति से हटी रोक, 8 साल से अटका था प्रमोशन
समझें क्या है पूरा मामला
- जयपुर पुलिस कमिश्नरेट में 2018 के बाद से अटकी हुई थीं पदोन्नतियां ।
- हाईकोर्ट ने अप्रैल 2023 में पदोन्नतियों पर लगा दी थी रोक।
- जस्टिस आनंद शर्मा ने हटाई रोक।
- कोर्ट ने पदोन्नति को चुनौती देने वाली याचिकाएं की खारिज।
राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर पुलिस कमिश्नरेट के पुलिसकर्मियों को बड़ी राहत दी है। करीब 8 साल से अटकी पदोन्नतियों पर लगी रोक हटा दी गई है। ये पदोन्नतियां हेड कांस्टेबल से सीआई तक के पदों की हैं। कोर्ट ने पदोन्नति प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाएं भी खारिज कर दीं।
8 साल बाद हटी पदोन्नति पर रोक
पुलिस डिपार्टमेंट में 8 साल अटकी पदोन्नति पर जस्टिस आनंद शर्मा ने बुधवार को रोक हटा दी है। Rajasthan High Court के इस फैसले से पदोन्नति का रास्ता खुल गया है। यह रास्ता हेड कांस्टेबल से सीआई तक के पदों के लिए है। सीआई (CI – Circle Inspector) यानी सर्किल इंस्पेक्टर।
पुलिस में पदोन्नति की सीढ़ी को आसान भाषा में समझें। पहले हेड कांस्टेबल, फिर एएसआई (ASI – Assistant Sub Inspector) का पद आता है। इसके बाद एसआई (SI – Sub Inspector) और फिर सीआई का पद है। इन्हीं पदों पर पदोन्नति अटकी हुई थी।
1989 के नियमों से आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस विभाग को साफ निर्देश दिए हैं। पदोन्नति प्रक्रिया 1989 के नियमों के मुताबिक आगे बढ़ाई जाए। यानी सालों से रुकी प्रक्रिया अब फिर शुरू हो सकेगी।
2013-14 की प्रक्रिया पर कोर्ट की मुहर
कोर्ट ने 2013-14 के खाली पदों पर हुई पदोन्नति प्रक्रिया को सही माना। अदालत के मुताबिक, सरकार ने चयनित कर्मचारियों की वरिष्ठता (सीनियरिटी) बचाने की कोशिश की। उनकी पदोन्नति की स्थिति भी सुरक्षित रखी गई।
अदालत ने क्यों नहीं दिया दखल
कोर्ट ने 2013-2014 में हुए संशोधित फैसले में भी कोई बड़ी खामी नहीं मानी। साथ ही कोर्ट ने कहा की इसमें कोई भी वैधानिक नियमों का उल्लंघन नहीं हुआ है। इसके साथ कोर्ट ने यह भी माना की कोई भी भेदभाव या दुर्भावना नहीं हुई है। ऐसे में अदालत ने सक्षम अफसरों के आकलन को बदलना ठीक नहीं समझा।
यह आकलन कैडर संख्या और पदोन्नति के खाली पदों से जुड़ा था। अदालत ने इसमें दखल देने से भी इनकार कर दिया।
याचिकाओं में क्या थी शिकायत
याचिका लगाने वाले पुलिसकर्मियों का कहना था कि नियमों का पालन नहीं हो रहा। उनका आरोप था कि उन्हें पदोन्नति नहीं दी जा रही है। इससे पहले भी उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। तब दावा था कि 2013-14 और 2015-16 के पदों की गणना गलत हुई।
2018 से अटकी थीं पदोन्नतियां
जयपुर पुलिस कमिश्नरेट में 2018 के बाद से पदोन्नतियां अटकी हुई थीं। हेड कांस्टेबल से सीआई तक के पदों पर यही हाल रहा। इसी बीच अप्रैल 2023 में हाईकोर्ट ने पदोन्नतियों पर रोक लगा दी थी। Jaipur Police Commissionerate के लिए यह फैसला इसलिए बड़ी राहत है।
2,011 पद पड़े हैं खाली
1 अप्रैल 2026 की स्थिति में कमिश्नरेट में कुल 2,011 पद खाली हैं। इनमें उप निरीक्षक के 412 पद शामिल हैं। सहायक उप निरीक्षक के 1,125 और हेड कांस्टेबल के 474 पद भी खाली हैं।
इन अफसरों की रही अहम भूमिका
इस मामले में पुलिस विभाग की एक टीम ने अहम भूमिका निभाई। इसमें स्पेशल कमिश्नर ओमप्रकाश पासवान शामिल रहे। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय) पार्थ शर्मा की भी अहम भूमिका रही।
डीसीपी (DCP – Deputy Commissioner of Police) मुख्यालय की टीम भी साथ रही। इसमें कांस्टेबल गिरराज और अजय शामिल रहे।
अब आगे क्या होगा
Police Promotion Rajasthan के लिहाज से यह फैसला अहम है। अब पुलिस विभाग को 1989 के नियमों से प्रक्रिया आगे बढ़ानी होगी। राजस्थान पुलिस पदोन्नति के इंतजार में बैठे कर्मचारियों की नजर अब विभाग पर है।
राजस्थान पुलिस प्रमोशन की यह प्रक्रिया कब पूरी होगी? इसकी तारीख अभी सामने नहीं आई है। लेकिन 8 साल बाद पुलिस पदोन्नति की उम्मीद जरूर लौट आई है।