राजस्थान में दूसरे राज्यों की निजी गाड़ियों से टैक्स वसूली पर हाईकोर्ट की रोक, 90 याचिकाओं पर फैसला
मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल और जस्टिस समीर जैन की खंडपीठ ने 2 नवंबर को हार्पी कोर नेटवर्क इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की याचिका सहित 89 अन्य याचिकाओं पर एक साथ फैसला सुनाया। अदालत ने अपने फैसले में राजस्थान की मेहमाननवाजी और ‘पधारो म्हारे देश’ की संस्कृति का भी जिक्र किया। कोर्ट ने कहा कि राजस्थान की असली भव्यता सरकारी रुकावटों में नहीं, बल्कि यहां आने वाले लोगों के स्वागत में है।
‘पधारो म्हारे देश’ का दिया संदेश
अदालत ने कहा कि राजस्थान की पहचान वीरता, किलों, सांस्कृतिक विरासत और अतिथि सत्कार की परंपरा से है। थार के रेगिस्तान से लेकर महलों और महाराणा प्रताप के गौरवशाली इतिहास तक, प्रदेश की पहचान इसकी मेहमाननवाजी से जुड़ी है।
कोर्ट ने कहा कि राज्य को कानून के मुताबिक टैक्स लगाने और वसूलने का अधिकार है, लेकिन यह शक्ति संविधान की सीमाओं में रहकर ही इस्तेमाल की जा सकती है। देश में एकरूप टैक्स व्यवस्था और राज्यों के बीच आसान आवागमन की जरूरत भी अदालत ने रेखांकित की।
फैसले में अदालत ने लिखा-
‘पधारो म्हारे देश,
यहां अतिथि का सत्कार होगा,
पर विधि के विरुद्ध
किसी कर का नहीं अधिकार होगा।’
हरियाणा नंबर की कार पर मांगे थे 6.78 लाख रुपए
मामले की शुरुआत हरियाणा में रजिस्टर्ड एक निजी कार से हुई। यह गाड़ी हरियाणा में गैर-व्यावसायिक वाहन के रूप में रजिस्टर्ड थी। कंपनी के निदेशक इसे चला रहे थे। इसी दौरान जयपुर में मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर की टीम ने गाड़ी को रोका।
अधिकारियों ने राजस्थान का टैक्स नहीं चुकाने का आरोप लगाते हुए चालान काटा और 17 मार्च 2025 को वाहन जब्त कर लिया। गाड़ी छुड़ाने के लिए 6 लाख 78 हजार 274 रुपए टैक्स जमा कराने की मांग की गई।
याचिकाकर्ता का कहना था कि वाहन पर हरियाणा में पहले ही लाइफटाइम टैक्स जमा किया जा चुका है। ऐसे में राजस्थान में दोबारा वन-टाइम टैक्स की मांग और वाहन जब्त करने की कार्रवाई गलत है।
सरकार ने 30 दिन से ज्यादा रुकने का दिया तर्क
राज्य सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि दूसरे राज्यों में रजिस्टर्ड निजी वाहन यदि राजस्थान में 30 दिन से ज्यादा इस्तेमाल किए जाते हैं, तो उन पर टैक्स देय हो सकता है। सरकार ने इसके लिए 10 जुलाई 2024 की अधिसूचना का हवाला दिया।
हालांकि, अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने राजस्थान मोटर वाहन कराधान अधिनियम, 1951 की धारा 4(1)(c) का उल्लेख करते हुए कहा कि दूसरे राज्यों में रजिस्टर्ड और राजस्थान की सड़कों पर चलने वाले वाहनों पर टैक्स लगाने के लिए सरकारी गजट में दरें अधिसूचित होना जरूरी है।
अदालत के मुताबिक, राज्य सरकार दूसरे राज्यों की निजी गैर-व्यावसायिक गाड़ियों के लिए ऐसी वैध अधिसूचना पेश नहीं कर सकी। 10 जुलाई 2024 की अधिसूचना भी इस कानूनी कमी को पूरा नहीं करती। इसलिए इस आधार पर टैक्स वसूली को वैध नहीं माना जा सकता।
पहले 30 दिन टैक्स से छूट, प्रक्रिया का पालन भी जरूरी
अदालत ने राजस्थान मोटर वाहन कराधान नियम, 1951 के नियम 28 का भी उल्लेख किया। इसके तहत दूसरे राज्यों में रजिस्टर्ड निजी वाहन राजस्थान में शुरुआती 30 दिनों तक टैक्स से मुक्त रहते हैं। इसके बाद टैक्स की देनदारी और उसकी गणना के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन जरूरी है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि टैक्स वसूली से पहले सक्षम अधिकारी को संतुष्ट होना, वाहन मालिक को सुनवाई का उचित अवसर देना और टैक्स की गणना का स्पष्ट आदेश देना जरूरी है। अधिनियम की धारा 8A, 13 और 13A में इससे जुड़ी प्रक्रिया दी गई है। धारा 17 के तहत वाहन रोकने या जब्त करने की कार्रवाई भी कानूनी आधार पर ही की जा सकती है।
चालान और जब्ती का आदेश रद्द, 30 दिन में रकम लौटाने के निर्देश
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की गाड़ी के संबंध में 17 मार्च 2025 को जारी चालान और जब्ती से जुड़े आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि यदि याचिकाकर्ताओं से इस आधार पर कोई टैक्स वसूला गया है, तो फैसले की प्रति पेश किए जाने के 30 दिनों के भीतर रकम वापस की जाए।
यह फैसला दूसरे राज्यों में रजिस्टर्ड निजी गैर-व्यावसायिक वाहनों से जुड़ी 90 याचिकाओं पर आया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि राजस्थान भविष्य में ऐसे वाहनों पर टैक्स लगा ही नहीं सकता। अदालत ने स्पष्ट किया है कि इसके लिए कानून के मुताबिक वैध अधिसूचना और निर्धारित प्रक्रिया जरूरी होगी।