आईआईटी में फेल, आईआईएम में गोल्ड मेडल, फिर यूपीएससी टॉपर, यह है आईएएस गौरव अग्रवाल की कहानी
कहते हैं जिंदगी में सफलता का रास्ता सीधा नहीं होता, उसमें उतार-चढ़ाव आते हैं। राजस्थान में जोधपुर के कलेक्टर गौरव अग्रवाल की कहानी शायद इस बात की सबसे बड़ी मिसाल है। उन्होंने 17 साल की उम्र में आईआईटी की परीक्षा में 45वीं रैंक हासिल की, लेकिन फिर उसी आईआईटी में एक सेमेस्टर में फेल हो गए। बाद में वह यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा 2013 में देश में पहले स्थान पर रहे। आईएएस गौरव अग्रवाल की यह कहानी है संघर्ष की, गिरकर उठने की और उस विश्वास की, जो कहता है जब तक आप हार नहीं मानते, सफलता आपका पीछा नहीं छोड़ती।
आईएएस गौरव अग्रवाल हैं जोधपुर कलेक्टर
जयपुर के गौरव अग्रवाल राजस्थान कैडर के बेहद तेजतर्रार आईएएस हैं। वे यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2013 में ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल कर टॉपर बने थे। वे वर्तमान में जोधपुर कलेक्टर के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें जोधपुर संभाग के संभागीय आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है।
जब 45वीं रैंक लाकर आया अहंकार
गौरव अग्रवाल पढ़ाई में शुरुआत से ही होशियार थे। उन्होंने इंजीनियरिंग की तैयारी के लिए कोचिंग ली और पहली ही बार में आईआईटी-जेईई में 45वीं रैंक हासिल कर ली। इसके बाद उन्होंने आईआईटी कानपुर में कंप्यूटर साइंस में दाखिला लिया। आईआईटी से उनकी सबसे बड़ी सीख की शुरुआत हुई।
गौरव खुद कहते हैं, यह सबकुछ ठीक चल रहा था, लेकिन मेरे अंदर कुछ अहंकार आ गया था कि मैं तेज हूं। मेरी 45वीं रैंक आई है। मैं तो कुछ भी कर लूंगा। इसका परिणाम यह हुआ कि दूसरे और तीसरे सेमेस्टर में ही गड़बड़ियां शुरू हो गईं। नतीजा यह हुआ कि उनका सीजीपीए गिर गया। एक सेमेस्टर में वे फेल भी हो गए और अपने बैच के साथियों से एक सेमेस्टर पीछे चले गए। उनका आत्मविश्वास चकनाचूर हो गया।
उनका कहना है कि अगर सीजीपीए अच्छा होता तो वे भी किसी एमएनसी में नौकरी कर रहे होते। लेकिन जिंदगी सबको एक मौका और देती है, बस उसके लिए आपको तैयार रहना होता है।
आईआईटी में हार, आईआईएम में स्वर्ण
गौरव ने हार नहीं मानी। आईआईटी के बाद उन्होंने कैट परीक्षा दी और आईआईएम लखनऊ में प्रवेश ले लिया। यहां उन्होंने अपनी पिछली गलती को नहीं दोहराया। हर सेमेस्टर में मेहनत की, लगन से पढ़ाई की और उसका फल उन्हें मिला। आईआईएम लखनऊ में टॉप करते हुए उन्होंने गोल्ड मेडल हासिल किया। वे कहते हैं, मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और न ही आईआईटी वाली गलती दोहराई।
हांगकांग की नौकरी से भारत की मिट्टी तक
आईआईएम के बाद गौरव को दुनिया की बेहतरीन कंपनियों में से एक सिटी ग्रुप हांगकांग में नौकरी का ऑफर मिला। लेकिन उनके मन में कहीं न कहीं यूपीएससी का ख्वाब दबा हुआ था। उनका यह ख्वाब आईआईटी में खराब सीजीपीए के कारण धुंधला पड़ गया था।
हांगकांग में फाइनेंशियल मार्केट देखते हुए उन्होंने महसूस किया कि यह क्षेत्र सरकार की नीतियों से बहुत प्रभावित होता है। एक बार फिर वह उसी जगह लौट आए, जहां नीतियों का असर होता है। फिर उन्होंने वह कर दिखाया जो कम लोगों की हिम्मत कर पाती है। हांगकांग में रहते हुए यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। जब लगा कि अब पूरा समय देना है तो नौकरी छोड़ दी और भारत लौट आए।
पहली बार में 244वीं रैंक, दूसरी बार देश में पहला स्थान
2012 में पहली बार यूपीएससी की परीक्षा दी तो 244वीं रैंक आई और आईपीएस कैडर मिला। लेकिन, गौरव का मन नीतियों में दिलचस्पी रखने वाले आईएएस की ओर था। उन्होंने फिर से तैयारी की और 2013 में परीक्षा दी।
इस बार उन्होंने वह कर दिखाया जिसकी कल्पना शायद उन्होंने आईआईटी में फेल होते समय भी नहीं की होगी। उन्होंने यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में देश में पहला स्थान। वे कहते हैं, यूपीएससी की परीक्षा में देश में पहले स्थान ने मेरे उस ख्वाब को पूरा किया जो आईआईटी की 45वीं रैंक की खुमारी के कारण भटक गया था।
एआई से बदली शिक्षा की तस्वीर
यूपीएससी टॉप करने के बाद गौरव अग्रवाल की पोस्टिंग उनके गृह राज्य राजस्थान में हुई। जब उन्हें माध्यमिक शिक्षा का निदेशक बनाया गया तो उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव किया। इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से आने वाले गौरव ने पहली बार देश में एआई से परीक्षा की कॉपियां जांचने की शुरुआत की।
राजस्थान के करीब 65 हजार स्कूलों के लिए एक ही जगह से पेपर सेट किए गए। शिक्षकों को सिर्फ उत्तर पुस्तिका की फोटो खींचकर प्रोग्राम में भेजनी होती थी और एआई जांच कर देता था। एक बार में डेढ़ करोड़ कॉपियों की जांच होने लगी। इससे न सिर्फ परीक्षा व्यवस्था पारदर्शी हुई, बल्कि यह भी पता चलने लगा कि कौन सा छात्र किस विषय में कमजोर या मजबूत है।
कुर्सी से दिल न लगाओ
शिक्षा विभाग से निकलकर गौरव अग्रवाल कृषि विभाग में पहुंचे। यहां उन्होंने किसान कॉल सेंटर को सुधारने का काम किया, जहां सालभर में करीब 70 लाख कॉल आती हैं। उनका सूत्रवाक्य यह है कि जिंदगी का सफर अगर आसान रखना है तो कुर्सी को ज्यादा दिल से नहीं लगाना चाहिए।
हर परीक्षा का एक ही मंत्र
गौरव अग्रवाल से जब पूछा जाता है कि बड़ी परीक्षाओं की तैयारी कैसे करें तो उनका जवाब बेहद सरल है, कोई भी बड़ी परीक्षा 100 मीटर रेस की तरह नहीं होती। यह मैराथन होती है। यह निरंतर अभ्यास, मेहनत और धैर्य मांगती है। जो भी शख्स निरंतरता बनाए रखता है, उसे निश्चित रूप से सफलता मिलती है।
आईएएस गौरव अग्रवाल गौरव अग्रवाल के अनुसार परीक्षाओं की तैयारी के तीन सबसे बड़े सूत्र हैं:
1. रट्टा मत मारो, समझो - ये परीक्षाएं आपके सोचने की क्षमता का आकलन करने के लिए होती हैं। विषयों को रट्टा मारने के बजाय समझकर लिखें।
2. स्वस्थ रहो, मानसिक रूप से चुस्त रहो - कोई एक व्यायाम और योग जरूर करें। मैं अपनी तैयारी के दौरान हमेशा दौड़ लगाता था।
3. परिवार से बात करो, धैर्य बनाए रखो - तैयारी के दौरान ध्यान भटकता है, धैर्य खोता है। परिवार से बेहतर बातचीत उसे संयमित करने का काम करती है।
जब दौर नीचे हो, तो भरोसा रखो
गौरव अग्रवाल की कहानी का सबसे खूबसूरत हिस्सा शायद यह है कि वे खुद स्वीकार करते हैं कि उन्होंने गलतियां कीं, वे गिरे, लेकिन हर बार उठे। वे कहते हैं, जिंदगी में हमेशा एक ही दौर नहीं रहता। जब आपका दौर निचले स्तर पर चल रहा हो, तो भरोसे के साथ और मेहनत करनी चाहिए। फिर दौर आपका होगा।
आईआईटी में फेल होने वाला छात्र आईआईएम में गोल्ड मेडलिस्ट बना। हांगकांग की नौकरी छोड़कर UPSC टॉप किया। आज वह जोधपुर के कलेक्टर हैं और पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
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