जानिए आईपीएस माधव उपाध्याय की संपत्ति का पूरा हिसाब, जो प्रोबेशन पीरियड में ही भ्रष्टाचार के आरोपों में फंसे
News In Short
- अवैध खनन करने वालों से वसूली के आरोपों से घिरे आईपीएस माधव उपाध्याय।
- आईपीएस अधिकारी उपाध्याय को भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद एपीओ कर दिया गया।
- माधव उपाध्याय 2023 बैच के राजस्थान कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं।
- माधव उपाध्याय मूल रूप से राजस्थान की राजधानी जयपुर के रहने वाले हैं।
- आईपीएस माधव उपाध्याय के पास करोड़ों रुपए मूल्य की संपत्ति हैं।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान कैडर के 2023 बैच के आईपीएस अधिकारी माधव उपाध्याय करियर की शुरुआत में ही विवाद में आ गए हैं। भीलवाड़ा में अवैध खनन माफियाओं से वसूली के गंभीर आरोपों के बाद उपाध्याय को एपीओ कर दिया गया है।
पुलिस विभाग में संभवतः यह पहला मामला है, जहां प्रोबेशन पीरियड के दौरान किसी आईपीएस अधिकारी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। फिर उन्हें पद से हटाया गया है। उपाध्याय मूल रूप से जयपुर के रहने वाले हैं।
जयपुर में तीन संपत्तियों का खुलासा
वर्ष 2026 में सार्वजनिक किए गए अचल संपत्ति विवरण के अनुसार माधव उपाध्याय के पास जयपुर के प्राइम लोकेशंस पर बेशकीमती संपत्तियां हैं। जयपुर में उनके पास तीन संपत्तियां हैं।
जयपुर के अखिल नगर में एक फ्लैट है, जिसकी वर्तमान बाजार कीमत लगभग 30 लाख रुपये बताई गई है। यह संपत्ति उनके पिता बाल कृष्ण शर्मा के नाम पर दर्ज है। इसी तरह टोंक रोड स्थित सूर्या नगर में उनका एक मकान है। इस मकान की अनुमानित कीमत करीब 60 लाख रुपये आंकी गई है, जो उनके दादा घीसा लाल शर्मा के नाम पर है।
उपाध्याय के पास जयपुर के बस्सी (दनाऊ कलां) क्षेत्र में पुश्तैनी जमीन है। यह जमीन हिंदू अविभाजित परिवार के अंतर्गत आती है और इसकी कीमत भी करोड़ों में बताई जा रही है।
जयपुर के MNIT से की इंजीनियरिंग
माधव उपाध्याय का अब तक का सफर शैक्षणिक रूप से काफी प्रभावशाली रहा है। मूल रूप से जयपुर के रहने वाले माधव ने प्रतिष्ठित एमएनआईटी जयपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में 148वीं रैंक हासिल कर आईपीएस कैडर प्राप्त किया।
वह 2023 बैच के अधिकारी हैं। फिलहाल भीलवाड़ा में पुलिस उपाधीक्षक के रूप में तैनात होकर अपना प्रोबेशन पूरा कर रहे थे, लेकिन अवैध खनन करने वालों से वसूली करने के आरोपों पर उन्हें एपीओ कर दिया गया।
कैसे शुरू हुआ विवाद
भीलवाड़ा का जहाजपुर इलाका गारनेट (रक्तमणि या तामड़ा) के अवैध खनन के लिए कुख्यात है। आरोप है कि इस क्षेत्र में सक्रिय एक अवैध वसूली गिरोह के साथ आईपीएस माधव उपाध्याय की कथित सांठगांठ थी।
जांच में सामने आया है कि एक गिरोह पुलिस का डर दिखाकर अवैध खनन माफियाओं से लाखों रुपये की वसूली कर रहा था। पुलिस ने जब इस गिरोह के खिलाफ शिकंजा कसा और कई लोगों को हिरासत में लिया, तो अजय पांचाल नामक व्यक्ति का नाम सामने आया। अजय के मोबाइल की फोरेंसिक जांच और व्हाट्सएप चैट खंगालने पर पुलिस के होश उड़ गए।
जांच की आंच तक पहुंचे आईपीएस
गिरफ्तार आरोपी अजय पांचाल के मोबाइल से आईपीएस माधव उपाध्याय के साथ हुई बातचीत के रिकॉर्ड मिले हैं। इन चैट्स में वसूली, सेटलमेंट और माफियाओं को अनुचित लाभ पहुंचाने से संबंधित संदिग्ध जानकारियां मिलने का दावा किया जा रहा है। इसी साक्ष्य के आधार पर पुलिस मुख्यालय ने मामले की आंतरिक जांच शुरू की और सरकार को रिपोर्ट भेजी। इसके बाद उन्हें एपीओ कर दिया गया।
माधव उपाध्याय की सफाई
इस पूरे मामले में प्रोबेशनरी आईपीएस माधव उपाध्याय ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि मुझ पर लगे सभी आरोप गलत हैं। यह एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है। अजय पांचाल के साथ मेरी जो भी बातचीत या मुलाकात हुई, वह पूरी तरह से एक केस की आधिकारिक कार्यवाही और जांच से संबंधित थी। चैट्स को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। दरअसल, पांचाल जहाजपुर से भाजपा विधायक गोपीचंद मीणा के पीए हैं। विधायक ने ही पांचाल को पुलिस अधिकारियों से परिचय कराया था।
भ्रष्टाचार के आरोपों ने उठाए सवाल
युवा आईपीएस माधव उपाध्याय का इस तरह के गंभीर विवाद में फंसना पुलिस की छवि पर सवालिया निशान लगा रहा है। भ्रष्टाचार के इन आरोपों ने न केवल उनकी व्यक्तिगत साख को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि यह भी संदेश दिया है कि खनन माफियाओं की जड़ें कितनी गहरी हैं। फिलहाल मामला जांच के अधीन है।
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