आईपीएस पंकज चौधरी का मध्यस्थता से सुलझेगा प्रमोशन विवाद, कैट ने सरकार को दिया यह आदेश

Ashish Bhardwaj | Mar 15, 2026, 11:05 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान में आईपीएस पंकज चौधरी का प्रमोशन विवाद सुलझने की राह दिख रही है। कैट ने मध्यस्थता के जरिए विवाद का हल ढूंढने की सलाह दी है। कुछ विभागीय जांचों के कारण प्रमोशन में आ रही दिक्कत

News In Short

  • आईपीएस अधिकारी पंकज चौधरी का सुलझ सकता है प्रमोशन विवाद।
  • कैट ने मध्यस्थता के जरिए प्रमोशन विवाद सुलझाने की दी सलाह।
  • केट ने विवाद सुलझाने के लिए दिया तीन सप्ताह का समय।
  • आईपीएस पंकज चौधरी की पदोन्नति अटकी हुई है कई साल से।
  • कुछ विभागीय जांचों के कारण प्रमोशन में आ रही दिक्कत।

News In Detail

​Jaipur: राजस्थान कैडर के चर्चित आईपीएस अधिकारी पंकज चौधरी की पदोन्नति को लेकर लंबे समय से चल रहा कानूनी विवाद अब निर्णायक मोड़ पर आता दिख रहा है। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) की जयपुर बेंच ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार से मध्यस्थता के जरिए विवाद सुलझाने को कहा है।



​मध्यस्थता से निकलेगा समाधान

​कैट की जयपुर पीठ ने एसीएस (होम), एसीएस (डीओपी) और आईपीएस पंकज चौधरी को स्पष्ट कहा है कि वे आपसी बातचीत और मध्यस्थता के माध्यम से इस उलझे हुए मामले का हल निकालें। कैट ने इसके लिए तीन सप्ताह का समय निर्धारित किया है। उसने उम्मीद जताई है कि उच्च स्तर पर होने वाली इस चर्चा के सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। इससे न केवल एक अधिकारी को न्याय मिलेगा, बल्कि प्रशासनिक गतिरोध भी समाप्त होगा।



​कोर्ट और प्रशासन का बचेगा समय:

सुनवाई के दौरान कैट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी भी की। उसका मानना है कि पंकज चौधरी के कई आवेदन और उनसे संबंधित समान प्रकृति के मामले कोर्ट में लंबित हैं। यदि यह विवाद आपसी सहमति से सुलझ जाता है, तो इससे न्यायालय का कीमती समय बचेगा। कैट ने कहा कि बेहतर पब्लिक सर्विस के लिए काबिल अधिकारियों की सेवाओं का उपयोग जनता के हित में किया जाना चाहिए, न कि उन्हें लंबी कानूनी लड़ाइयों में उलझाए रखना चाहिए।



​क्या है पूरा मामला?

​आईपीएस पंकज चौधरी की पदोन्नति पिछले कई साल से अटकी है। पंकज के अधिवक्ता अनुपम अग्रवाल के अनुसार चौधरी के तीन प्रमोशन बकाया हैं:




​साल 2018 से: जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव रैंक।




​साल 2021 से: सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव रैंक।



साल 2023 से: डीआईजी (DIG) रैंक।



​विवाद की जड़:

पंकज चौधरी के खिलाफ चल रही कुछ विभागीय जांचों को इन पदोन्नतियों में बाधा बताया गया है। हालांकि, अधिवक्ता का पक्ष है कि इन जांचों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के आदेश दिए गए थे, लेकिन इसके बावजूद जांच पूरी नहीं की गई और जानबूझकर पदोन्नति को रोका गया है।



​पिछली सुनवाई और सरकार का रुख

​पिछली सुनवाई में कैट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) के तहत पंकज चौधरी के बकाया प्रमोशन पर प्रोविजनल (अस्थायी) तौर पर विचार करे। हालांकि, कोर्ट में यह बात सामने आई कि राज्य सरकार ने अभी तक इस पर कोई संतोषजनक जवाब या कार्रवाई नहीं की है।



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