तबादला हुआ, शहर बदला पर नहीं छोड़ा सरकारी बंगला, अब सरकार ने बनाई ऐसे अफसरों की सूची
News In Short
- तबादले के बाद भी बंगला खाली करने वाले अधिकारी बने सरकार के लिए सिरदर्द।
- सरकार ने अब ऐसे आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की तैयार की सूची।
- यदि 6 माह के भीतर आवास खाली नहीं तो अब बेदखली की कार्रवाई की जाएगी।
- 31 मार्च 2026 तक की बकाया राशि की वसूली के लिए सरकार ने बनाई सूची।
- ऐसे आईएएस और आईपीएस अधिकारियों से अब तीन गुना किराया वसूली की जाएगी।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान में रसूख की गलियों में अक्सर यह कहावत चर्चा में रहती है-नेता का कुर्सी और अफसर का बंगला से मोह आसानी से नहीं छूटता। जयपुर के पॉश इलाकों में स्थित सरकारी बंगलों के प्रति अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों का यह प्रेम अब राज्य सरकार के लिए सिरदर्द बन गया है।
आलम यह है कि तबादला होने और महीनों बीत जाने के बाद भी कई कद्दावर आईएएस (IAS) और आईपीएस (IPS) अधिकारियों ने सरकारी आवास खाली नहीं किए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की बार-बार की अपीलों और नोटिसों को ठंडे बस्ते में डालने वाले इन अधिकारियों के खिलाफ अब सरकार ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 6 माह के भीतर आवास खाली नहीं किए गए तो बेदखली की कार्रवाई की जाएगी
कोई 2 साल से तो कोई 4 साल से काबिज
जयपुर के गांधीनगर जैसे वीवीआईपी इलाकों में कई ऐसे बड़े नाम सामने आए हैं, जिन्होंने तबादले के बावजूद सरकारी घर पर कब्जा बरकरार रखा है। इनमें आईएएस, आईपीएस और अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक सेवा के अधिकारी शामिल हैं। इन अफसरों में नियमों की अनदेखी साफ़ दिख रही है।
इन्द्रजीत सिंह: बीकानेर से लेकर नई दिल्ली के संस्कृति मंत्रालय में निदेशक के पद पर तैनात रहे। इन्होंने 19 अगस्त 2025 को कार्यमुक्त होने के बाद भी गांधीनगर स्थित 1/A/5 बंगला खाली नहीं किया है।
हरफूल सिंह यादव: ये मार्च 2024 से ही गांधीनगर स्थित E-3 आवास पर काबिज हैं। इस दौरान इनकी पोस्टिंग कई अलग-अलग स्थानों पर हो चुकी है।
देवाराम सैनी: वर्तमान में बीकानेर कृषि कॉलेज के रजिस्ट्रार के रूप में सेवाएं दे रहे यह अधिकारी फरवरी 2024 से जयपुर का आवास खाली नहीं कर रहे हैं।
मृदुल कच्छावा: सबसे लंबी अवधि तक आवास घेरे रखने का रिकॉर्ड आईपीएस मृदुल कच्छावा के नाम है। वे जुलाई 2022 से गांधीनगर के II/13 आवास पर काबिज हैं, जबकि उनका तबादला हुए अरसा बीत चुका है।
आईपीएस तेजस्वी गौतम: कोटा सिटी की एसपी बनने के बाद भी इन्होंने जयपुर का I/51 आवास जुलाई 2025 से खाली नहीं किया है।
IPS पीडी नित्या: जोधपुर ग्रामीण एसपी के पद पर तैनात पीडी नित्या नवंबर 2025 से C/8 गांधीनगर आवास पर बनी हुई हैं।
नियमों की उड़ रही धज्जियां
सरकारी नियमों (राजकीय आवास आवंटन नियम 1958) के अनुसार किसी भी अधिकारी का तबादला होने पर उसे एक निश्चित समय सीमा के भीतर अपना सरकारी आवास खाली करना होता है, जिससे नए आने वाले अधिकारियों को आवास मिल सके। लेकिन जयपुर में स्थिति इसके उलट है। कई नए अधिकारियों को सर्किट हाउस या निजी होटलों में रुकना पड़ रहा है क्योंकि पुराने अधिकारियों ने बंगले खाली नहीं किए हैं।
सामान्य प्रशासन विभाग ने इन अधिकारियों को नोटिस जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि तय समय सीमा निकलने के बाद अब उनके रहने को अवैध कब्जा माना जाएगा। विभाग ने 31 मार्च 2026 तक की बकाया राशि की वसूली के लिए सूची भी तैयार कर ली है।
अब तीन गुना किराये की मार
सरकार ने अब इन अधिकारियों के बंगला प्रेम का इलाज आर्थिक दंड के रूप में ढूंढ निकाला है। नोटिस में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि अधिकारी स्वेच्छा से बंगला खाली नहीं करते हैं तो उनसे बाजार दर पर किराया वसूला जाएगा।
इतना ही नहीं, विभाग ने कड़ा फैसला लेते हुए आदेश दिया है कि इन अधिकारियों से अब तीन गुना किराया वसूली की जाएगी। बकाया राशि की वसूली के साथ-साथ प्रशासन अब बेदखली की कानूनी प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है।
एमपी में 30 प्रतिशत पेनाल्टी तक
मध्य प्रदेश में तबादले के बाद भी सरकारी बंगला खाली नहीं करने पर सख्त नियम बनाए गए हैं। राजधानी में आवास नहीं छोड़ने वालों से दस गुना किराए के अलावा 30 प्रतिशत तक पेनाल्टी की वसूल की जाएगी। muहाल ही में कैबिनेट ने खाली नहीं होने वाली सरकारी आवासों की किराया राशि को लेकर बड़ा फैसला किया। इसमें कहा गया कि आवास खाली नहीं होने की स्थिति को गंभीरता से लिया जाएगा।
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