जल जीवन मिशन घोटाले में 16,000 पन्नों की चार्जशीट, 54 लाल रंग के बंडलों में भरकर लाए कोर्ट, 10 अफसरों के नाम शामिल
News In Short
- जल जीवन मिशन घोटाले में एसीबी ने की 16,000 पन्नों की चार्जशीट पेश।
- यह चार्जशीट लाल रंग के 54 बंडलों में भरकर अदालत पहुंचाई गई।
- चार्जशीट में 10 बड़े जलदाय अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है।
- पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल का एसीबी को फिर मिला दो दिन का रिमांड।
- फरार तीन अधिकारियों की संपत्ति अब अटैच करने की तैयारी।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान के चर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। एसीबी ने सोमवार को इस मामले में गिरफ्तार किए गए 10 प्रमुख आरोपियों के खिलाफ एसीबी विशेष न्यायालय में 16,000 पन्नों का आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया। यह आरोप पत्र लाल रंग के 54 बंडलों में भरकर कोर्ट पहुंचाया गया, जो इस घोटाले की गंभीरता को दर्शाता है।
वरिष्ठ अधिकारियों सहित 10 अभियुक्तों के नाम शामिल
एसीबी की ओर से कोर्ट में पेश की गई चार्जशीट में जल संसाधन विभाग के कई आला अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञों के नाम शामिल हैं। इन सभी को भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के चलते गिरफ्तार किया गया था। वर्तमान में ये न्यायिक हिरासत में हैं। मुख्य अभियुक्तों में शामिल हैं:
दिनेश गोयल – मुख्य अभियंता (प्रशासन)
के.डी. गुप्ता – तत्कालीन मुख्य अभियंता (ग्रामीण)
शुभांशु दीक्षित – तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य अभियंता (जयपुर क्षेत्र-द्वितीय)
सुशील शर्मा – तत्कालीन वित्तीय सलाहकार (अक्षय ऊर्जा)
निरिल कुमार – तत्कालीन मुख्य अभियंता (चूरू)
विशाल सक्सेना – अधिशाषी अभियंता (तत्कालीन निलंबित)
अरुण श्रीवास्तव – अतिरिक्त मुख्य अभियंता (सेवानिवृत्त)
डी. के. गौड़ – तत्कालीन मुख्य अभियंता व तकनीकी सदस्य (सेवानिवृत्त)
महेन्द्र प्रकाश सोनी – तत्कालीन अधीक्षण अभियंता (सेवानिवृत्त)
मुकेश पाठक – निजी व्यक्ति (छत्तीसगढ़ से गिरफ्तार)
इन अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति के लिए एसीबी जल्द ही विभाग को रिपोर्ट प्रेषित करेगी।
सेवानिवृत्त IAS सुबोध अग्रवाल 2 दिन के रिमांड पर
इस मामले में एसीबी ने रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल को कोर्ट में पेश किया। एसीबी की ओर से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महावीर शर्मा ने दलीलें पेश कीं, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। जांच एजेंसी का मानना है कि अग्रवाल से पूछताछ में घोटाले के उच्च स्तरीय संपर्कों और नीतिगत स्तर पर हुई गड़बड़ियों के अहम सुराग मिल सकते हैं।
फरार आरोपियों पर कुर्की की तलवारmuk
घोटाले में शामिल कुछ अन्य रसूखदार आरोपी अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। एसीबी की टीमें जितेंद्र शर्मा (एक्जीक्यूटिव इंजीनियर), मुकेश गोयल (सुपरिटेंडेंट इंजीनियर) और संजीव गुप्ता की तलाश में विभिन्न ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। इनके विरुद्ध स्टैंडिंग वारंट जारी किए जा चुके हैं। ब्यूरो ने इनकी संपत्तियों का विवरण संकलित कर न्यायालय को सौंप दिया है। अब इनकी संपत्तियों को अटैच करने की विधिक प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
फर्जी सर्टिफिकेट और 960 करोड़ के टेंडर
जांच में सामने आया है कि इस भ्रष्टाचार का पूरा जाल दो मुख्य फर्मों श्रीगणपति ट्यूबवेल कंपनी (प्रोपराइटर महेश मित्तल) और श्रीश्याम ट्यूबवेल कंपनी (प्रोपराइटर पदमचंद जैन) के इर्द-गिर्द बुना गया था। इन फर्मों ने इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र तैयार किए, फिर जलदाय विभाग (PHED) के अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर 960 करोड़ रुपए के टेंडर हासिल कर लिए।
इतना ही नहीं, जांच में यह भी खुलासा हुआ कि इन दोनों फर्मों को बिना काम किए ही 55 करोड़ रुपए का फर्जी भुगतान कर दिया गया। जब मामला संदिग्ध हुआ, तो अधिशाषी अभियंता विशाल सक्सेना ने केरल जाकर एक झूठी रिपोर्ट पेश की ताकि इन फर्मों को बचाया जा सके।
20 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट्स पर नजर
एसीबी की विशेष जांच दल (SIT) वर्तमान में चार अहम मामलों की गहराई से जांच कर रही है, जो करीब 20 हजार करोड़ रुपए के स्पेशल प्रोजेक्ट्स से जुड़े हैं। जांच में पाया गया कि टेंडर्स की नियम-शर्तों को इस तरह बदला गया, जिससे बड़ी और चहेती फर्मों को अनुचित लाभ मिल सके।
साइट इंस्पेक्शन जैसी अनिवार्य शर्तें हटा दी गईं या बदल दी गईं, जिससे पारदर्शिता पूरी तरह समाप्त हो गई। कुल 139 इंजीनियर (15 XEN, 40 AEN और 50 JEN) जांच के दायरे में हैं।
15 स्थानों पर छापेमारी
एसीबी ने इस मामले की तह तक जाने के लिए जयपुर, बाड़मेर, जालोर, सीकर सहित दिल्ली, बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में कुल 15 स्थानों पर छापेमारी की थी। जांच के दौरान बड़ी संख्या में फर्जी बिल, वित्तीय अनियमितताओं के दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए हैं।
वहीं, राजस्थान उच्च न्यायालय में इस प्रकरण से संबंधित 11 रिट याचिकाओं पर अब आगामी सुनवाई 21 अप्रैल को होनी तय है। एसीबी के अधिकारियों का कहना है कि यह केवल शुरुआत है और आने वाले दिनों में कई और बड़े नामों पर एक्शन हो सकता है। 16,000 पन्नों की यह चार्जशीट भ्रष्ट अधिकारियों और ठेकेदारों के गठजोड़ को बेनकाब करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
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