फरार पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल की संपत्ति होगी अटैच, 15 दिन में स्टैंडिंग वारंट की तैयारी
News In Short
- जल जीवन मिशन घोटाले में पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल की मुश्किलें बढ़ीं।
- 15 दिन में सरेंडर या गिरफ्तार नहीं तो संपत्तियां की जा सकती हैं अटैच।
- 15 दिन में सूबोध अग्रवाल के खिलाफ स्टैंडिंग वारंट जारी कराने की तैयारी।
- सुबोध अग्रवाल एसीबी को लगातार दे रहे हैं चकमा, अब तक 50 ठिकानों पर दबिश।
- अब तक इस घोटाले में 10 बड़े अधिकारी हो चुके हैं गिरफ्तार।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान के चर्चित जल जीवन मिशन घोटाले में रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) अब सुबोध अग्रवाल के खिलाफ कठोर कानूनी कदम उठाने की तैयारी में है। एसीबी सूत्रों के अनुसार यदि अगले 15 दिन में सुबोध सरेंडर नहीं करते हैं या गिरफ्तार नहीं होते हैं तो उनकी संपत्तियों को अटैच करने की प्रक्रिया शुरू कर देगी।
50 से ज्यादा ठिकानों पर दबिश
एसीबी की टीमें सुबोध अग्रवाल की तलाश में पिछले एक पखवाड़े से राजस्थान, दिल्ली, यूपी और महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों में खाक छान रही हैं। जांच एजेंसी ने अब तक जयपुर, दिल्ली, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और मुंबई समेत 50 से अधिक संभावित ठिकानों पर छापेमारी की है। हालांकि, अब तक एसीबी की टीम को खाली हाथ ही लौटना पड़ा है।
सूत्रों के मुताबिक एसीबी ने सुबोध अग्रवाल के खिलाफ पहले ही गिरफ्तारी वारंट हासिल कर लिया है, लेकिन उनके फरार होने के चलते अब स्टैंडिंग वारंट जारी करने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इसके साथ ही उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया जा चुका है, जिससे वे देश छोड़कर न भाग सकें।
चकमा दे रहे अग्रवाल
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि सुबोध अग्रवाल गिरफ्तारी से बचने के लिए बेहद शातिर तरीका अपना रहे हैं। वे अपना व्यक्तिगत मोबाइल फोन बंद कर चुके हैं और वर्तमान में अपने परिचितों और करीबियों के मोबाइल नंबरों का उपयोग कर रहे हैं।
एसीबी ने अग्रवाल के संपर्क में रहे ऐसे 4 संदिग्ध नंबरों को चिन्हित किया है, जिनका उपयोग वे फरारी के दौरान कर रहे थे। जैसे ही एसीबी की टीम इन नंबरों की लोकेशन के आधार पर दबिश देती है, वे वहां से पहले ही निकल जाते हैं। उनकी तलाश के लिए एसीबी बॉलीवुड स्टार सलमान खान के पनवेल स्थिति फार्महाउस पर पहुंच चुकी है। इसी तरह एसीबी ने सोहना में एक फार्महाउस में भी तलाश किया।
ऑनलाइन ट्रांजेक्शन से परहेज
एसीबी न केवल पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल की लोकेशन ट्रेस कर रही है, बल्कि उनके वित्तीय लेन-देन पर भी कड़ी निगरानी रख रही है। सुबोध अग्रवाल और उनके परिवार के बैंक खातों को मॉनिटर किया जा रहा है। जांच में सामने आया है कि फरारी के दौरान उन्होंने अब तक किसी भी प्रकार का ऑनलाइन ट्रांजेक्शन नहीं किया है, जिससे उनकी लोकेशन का पता न चल सके। वे पूरी तरह से नकदी या अन्य माध्यमों का सहारा ले रहे हैं।
14 आरोपियों के ठिकानों पर भी सर्च ऑपरेशन
जेजेएम घोटाले की जांच का दायरा केवल सुबोध अग्रवाल तक सीमित नहीं है। एसीबी ने पिछले महीने इस मामले में 14 अन्य आरोपियों के ठिकानों की भी गहन तलाशी ली थी। इनमें तीन चीफ इंजीनियरों सहित 10 अन्य अधिकारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। एसीबी यह सुनिश्चित करने में जुटी है कि इस बड़े घोटाले के मास्टरमाइंड को जल्द से जल्द कानून के शिकंजे में लाया जाए।
क्या है जेजेएम घोटाला?
यह पूरा मामला जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन बिछाने और अन्य विकास कार्यों में हुए करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार से जुड़ा है। आरोप है कि घटिया सामग्री का उपयोग करने और फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर टेंडर जारी करने के बदले अधिकारियों ने भारी कमीशन लिया था। सुबोध अग्रवाल पर इस पूरी प्रक्रिया में मुख्य भूमिका निभाने का संदेह है।
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