हर बार जरूरी थोड़ी है कि सीएम बना जाए, मदन राठौड़ के बयान पर वसुंधरा का जवाब-मेरा खिलाफ साजिश
News In Short
- पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बयान पर राजस्थान भाजपा में घमासान।
- मदन राठौड़ ने बीकानेर में कहा, हर बार जरूरी थोड़ी है कि सीएम बना जाए।
- राठौड़ ने यह भी कहा, यह बात गलत है कि वसुंधरा के काम नहीं हो रहे।
- खर्रा ने भी सीकर में कहा कि उम्मीद सब करते हैं, सफलता कुछ को मिलती है।
- वसुंधरा की सफाई, उनके खिलाफ साजिश, बयान गलत संदर्भ से जोड़ा।
News In Detail
Bikaner: राजस्थान की भाजपा में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के उस बयान के बाद भूचाल आ गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि मैं खुद का ही नहीं बचा पाई तो तुम्हारे लिए क्या कर सकती हूं। इस बयान के बाद राजस्थान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने शनिवार को बीकानेर दौरे में कहा कि हर बार जरूरी थोड़ी है कि सीएम बना जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि वसुंधरा जी क्या नहीं बचा पाईं, वे आज पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। उनके सभी काम हो रहे हैं। उन्होंने अपनी बात की व्याख्या एक मारवाड़ी कहावत के जरिए की, जो प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है।
राठौड़ से सुर मिलाते हुए नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने भी सीकर में कहा कि राजनीति एक ऐसा चंचल क्षेत्र है जिसमें उम्मीद सब करते हैं लेकिन सफलताएं बहुत कम को मिलती हैं।
उधर, वसुंधरा राजे ने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि उनके खिलाफ साजिश हो रही है। उनके भाषण के एक अंश को काटकर उसे गलत संदर्भ से जोड़ा गया है। उनका मकसद फोरलेन हाईवे की तकनीकी बाधा को समझाना था।
कहावत के जरिए राजे को कड़ा संदेश
हाल ही में झालावाड़ में वसुंधरा राजे ने कहा था, मैं खुद को ही नहीं बचा पाई तो तुम्हारे लिए क्या कर सकती हूं। इस बयान ने राजस्थान की राजनीति में हलचल मचा दी थी। जब बीकानेर में मदन राठौड़ से इस पर सवाल हुआ, तो उन्होंने मारवाड़ी अंदाज में तंज कसते हुए कहा, 'चिट्ठी चूर-चूर करे, मांगे डाल और घी, मोदी सु कुण झगड़ो करे, चिट्ठी खानी नाल।' राजनीतिक जानकारों के अनुसार इस कहावत के जरिए राठौड़ ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जो मिला है, उसमें वसुंधरा राजे को संतोष करना चाहिए और बेहतर काम करना चाहिए।
वसुंधरा के हो रहे हैं सभी काम
वसुंधरा के काम नहीं होने के बारे में पूछे गए सवाल पर राठौड़ ने कहा कि यह कहना गलत बात है कि उनके काम नहीं हो रहे हैं। उनके सभी काम हो रहे हैं। अभी पांच मिनट पहले ही मेरी वसुंधरा राजे से बात हुई है। उनकी ऐसी कोई शिकायत नहीं है।
कटारिया पर आया सधा हुआ जवाब
पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया के खिलाफ राष्ट्रपति को लिखी गई चिट्ठी के सवाल पर राठौड़ ने सधा हुआ जवाब दिया। उन्होंने कहा, कटारिया जी अब महामहिम के संवैधानिक पद पर हैं, उनके बारे में टिप्पणी करना उचित नहीं है। जहां तक कार्यकर्ताओं की नाराजगी का सवाल है, हमने उनसे संवाद कर मामले को सुलझा लिया है। उल्लेखनीय है कि कटारिया पर उदयपुर में 'समानांतर सत्ता' चलाने के आरोप लगे थे, जिस पर हाल ही में उन्होंने खुद भी स्थिति स्पष्ट की थी।
विपक्ष पर प्रहार और महिला आरक्षण
राठौड़ ने मीडिया से बातचीत में ममता बनर्जी और कांग्रेस पर भी जमकर हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में ममता का जनाधार खिसक चुका है और भाजपा अब दक्षिण भारत (केरल, तमिलनाडु) में भी तेजी से मजबूत हो रही है। महिला आरक्षण बिल के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरते हुए उन्होंने कहा, "सदन में वोटिंग के समय कांग्रेस साथ थी, लेकिन अब बाहर आकर राजनीति कर रही है। कांग्रेस को अपना दोहरा रवैया साफ करना चाहिए।"
जल्द होंगी राजनीतिक नियुक्तियां
प्रदेश के कार्यकर्ताओं के लिए सबसे बड़ी राहत की खबर देते हुए मदन राठौड़ ने कहा कि लंबे समय से अटकी राजनीतिक नियुक्तियों का दौर अब शुरू हो चुका है। उन्होंने बताया कि अरुण चतुर्वेदी की नियुक्ति इसका आगाज है और बहुत जल्द पूरे प्रदेश में अन्य नियुक्तियां भी कर दी जाएंगी।
खर्रा बोले, यह तो राजनीति में चलता-रहता है
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के बाद वसुंधरा राजे को लेकर नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा का भी बयान आया है। उन्होंने सीकर में मीडिया से बातचीत में कहा, 'हां, मैंने भी वसुंधरा राजे का यह बयान पढ़ा कि मैं अपने आपको नहीं बचा सकी।
उन्होंने कहा, 'यह तो राजनीति में चलता रहता है कि कब किसका भाग्य उदय होता है और कब किसका सितारा थोड़ा मंद पड़ता है। क्योंकि, राजनीति एक ऐसा चंचल क्षेत्र है जिसमें उम्मीद सब करते हैं लेकिन सफलताएं बहुत कम को मिलती हैं।
वसुंधरा बोली, असल मुद्दा हाईवे का था
उधर, वसुंधरा राजे ने अपने बयान को लेकर सफाई दी कि असल मुद्दा फोरलेन हाईवे के एलाइनमेंट को लेकर था। उनके पास कुछ ग्रामीण आए थे जिनकी जमीन बाईपास निर्माण के दायरे में आ रही थी। ग्रामीण चाहते थे कि हाईवे का नक्शा बदला जाए।
राजे ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि उन्होंने ग्रामीणों को केवल नियम और प्रक्रिया समझाने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि धौलपुर में मेरे घर के सामने से नेशनल हाईवे निकला है। जब मुंडिया यानी सीमांकन होकर काम शुरू हो जाता है, तो नियम सबके लिए समान होते हैं। मुझे खुद अपने घर की दीवार पीछे करनी पड़ी और मेरी जमीन भी गई। मैंने ग्रामीणों से यही कहा था कि जब मैं अपने घर की जमीन जाने से नहीं रोक सकी, तो नियम के विरुद्ध जाकर आपकी मदद कैसे कर पाऊंगी?
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