गुरुजी की ड्यूटी में एक और तड़का, अब ब्लैक बोर्ड के बाद संभालेंगे गैस सिलेंडर का लेखा-जोखा!
News In Short
- राजस्थान में शिक्षकों की ड्यूटी में एक और जिम्मेदारी जोड़ी।
- हनुमानगढ़ के रावतसर में शिक्षक गैस किल्लत पर नजर रखेंगे।
- तीन शिक्षक एलपीजी निगरानी केंद्र पर बैठकर संभालेंगे मोर्चा।
- आदेश में कहा, शिक्षक रोटेशन आधार पर ड्यूटी पर रहेंगे मुस्तैद।
- रावतसर में शिक्षकों की ड्यूटी बनी चर्चा का विषय।
News In Detail
कहते हैं कि शिक्षक राष्ट्र का निर्माता होता है, लेकिन राजस्थान में शिक्षक केवल भविष्य ही नहीं, बल्कि व्यवस्थाएं सुधारने के भी संकटमोचक माने जाते हैं। ताज़ा मामला हनुमानगढ़ जिले में रावतसर उपखण्ड से सामने आया है, जहां गुरुजी अब स्कूल की घंटी बजाने के साथ ही रसोई गैस की किल्लत पर भी नजर रखेंगे। प्रशसन ने शिक्षकों को एक और नई और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपते हुए उन्हें एलपीजी निगरानी एवं समन्वय केंद्र (कंट्रोल रूम) का सिपाही बना दिया है।
आखिर क्यों पड़ी जरूरत?
देशभर में एलपीजी गैस की आपूर्ति श्रृंखला में आ रहे व्यवधान और भविष्य में होने वाली संभावित कमी की खबरों ने आमजन की चिंता बढ़ा दी है। लोग परेशान न हों और गैस वितरण में कोई धांधली न हो, इसके लिए उपखण्ड अधिकारी एवं उपखण्ड मजिस्ट्रेट रावतसर ने कमर कस ली है। इसी के तहत तहसील कार्यालय में एक विशेष कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है।
24 घंटे तैनात रहेंगे मास्टर जी
हैरानी की बात यह है कि इस कंट्रोल रूम को सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रशासन को शिक्षा विभाग के गुरुजी ही सबसे भरोसेमंद नजर आए। आदेश के अनुसार तीन शिक्षकों की ड्यूटी तीन अलग-अलग शिफ्टों में लगाई गई है, ताकि जनता को 24 घंटे सहायता मिल सके। जिन शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है, उनमें राधेश्याम, विक्रम सिंह बिजारणीया और कैलाश शर्मा हैं। ये अध्यापक अलग-अलग समय ड्यूटी कर 24 घंटे गैस व्यवस्था की पहरेदारी करेंगे।
कंट्रोल रूम का जिम्मा
इस पूरे केंद्र की प्रभारी रावतसर की तहसीलदार पायल अग्रवाल को बनाया गया है। प्रशासन ने बाकायदा एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है, जिस पर लोग अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे। आदेश में साफ कहा गया है कि शिक्षकों को रोटेशन के आधार पर अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद रहना होगा।
गुरुजी के कंधों पर बढ़ता बोझ
लोगों का कहना है कि चुनाव हो, जनगणना हो, ड्यूटी रसद विभाग की हो या अब गैस की निगरानी-गुरुजी हर जगह ऑलराउंडर की भूमिका में नजर आते हैं। कक्षा में बच्चों को गणित के सूत्र समझाने वाले शिक्षक अब यह हिसाब लगाएंगे कि शहर में कितने सिलेंडर आए और कितने वितरित हुए। हालांकि, प्रशासन का मानना है कि शिक्षकों की अनुशासित कार्यशैली से इस संकट के समय में आमजन को काफी राहत मिलेगी।
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