निकाय प्रमुख चुनाव से पहले बढ़ा तनाव, डोटासरा बोले- खून-खराबा हुआ तो कौन जिम्मेदार?

Saurabh Mishra | Sept 19, 2026, 11:14 IST
निकाय चुनाव में सियासी घमासान
राजस्थान में निकाय प्रमुख चुनाव से पहले कांग्रेस ने सरकार पर पार्षदों को दबाव में लेने का आरोप लगाया। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने खून-खराबे की स्थिति में सरकार को जिम्मेदार बताया।

5 पॉइंट में समझें पूरा मामला

  • राजस्थान में निकाय प्रमुख चुनाव से पहले बढ़ा तनाव।
  • कांग्रेस ने प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप।
  • भरतपुर में मेयर प्रत्याशी के नाम वापसी से बदला खेल।
  • बीकानेर पार्षदों तक सीआईडी पहुंचने का दावा।
  • पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने सरकार को दी चेतावनी।

राजस्थान में निकाय चुनाव के नतीजों के बाद अब महापौर, सभापति और अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर सियासत गरमा गई है। कहीं पार्षद होटलों में ठहरे हैं तो कहीं नामांकन वापसी ने पूरा समीकरण बदल दिया। इसी बीच कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भाजपा सरकार और पुलिस-प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए।



उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस और उसके समर्थक पार्षदों पर दबाव बनाया जा रहा। डोटासरा ने चेतावनी दी कि इस दौरान खून-खराबा हुआ तो इसकी जिम्मेदारी सरकार और पुलिस की होगी।



पीसीसी चीफ ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

राजस्थान में निकाय चुनाव के नतीजे आने के बाद अब महापौर, सभापति और अध्यक्ष के चुनाव की तैयारी चल रही। जिन निकायों में किसी एक दल के पास साफ बहुमत नहीं, वहां निर्दलीय पार्षद अहम हो गए। इस बीच पार्षदों की बाड़ेबंदी भी चल रही। कांग्रेस का आरोप है कि उसके पार्षदों और समर्थित उम्मीदवारों पर पुलिस और प्रशासन के जरिए दबाव बनाया जा रहा है।



प्रदेश कांग्रेस के निर्देश पर गुरुवार को जिलों में पुलिस अधीक्षकों को ज्ञापन भी दिए गए। इनमें पार्षदों को कथित तौर पर डराने, धमकाने और दबाव बनाने की शिकायत की गई।



डोटासरा ने दी चेतावनी

सीकर में मीडिया से बातचीत के दौरान डोटासरा ने सरकार पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अगर इस तरह की कार्रवाई बंद नहीं हुई तो लोगों में आक्रोश बढ़ेगा। डोटासरा ने चेतावनी दी कि इस दौरान कोई मर्डर या खून-खराबा होता है तो उसकी जिम्मेदारी सरकार और पुलिस की होगी।



डोटासरा ने पार्षदों की बाड़ेबंदी और पुलिस की कथित कार्रवाई को भाजपा के ‘गुजरात मॉडल’ से जोड़ा। उनका आरोप है कि निकाय प्रमुखों के चुनाव में पुलिस और प्रशासन का इस्तेमाल किया जा रहा है। भाजपा नेता पहले भी कांग्रेस की ओर से लगाए गए सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग के आरोपों को खारिज कर चुके हैं।



बीकानेर में कांग्रेस पार्षदों को ढूंढने पहुंचीं सीआईडी

बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस के पास बहुमत है। 80 वार्डों में कांग्रेस ने 42 सीटें जीती हैं। भाजपा को 27 सीटें मिली हैं। इसके अलावा 10 निर्दलीय और एक आरएलपी पार्षद जीता है। कांग्रेस के पार्षद जैसलमेर के एक होटल में ठहरे हुए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि गुरुवार सुबह कुछ CID कर्मचारी होटल में पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने वहां मौजूद पार्षदों की संख्या की जानकारी ली।



इस बीच कांग्रेस के बागी नवरतन डागा ने अपना नामांकन वापस ले लिया है। अब महापौर पद के लिए कांग्रेस के अनिल कल्ला और भाजपा के सुरेंद्र सिंह शेखावत आमने-सामने हैं।



भरतपुर में पलटा पूरा खेल

भरतपुर में महापौर चुनाव का समीकरण नामांकन वापसी के आखिरी दिन पूरी तरह बदल गया। कांग्रेस समर्थित मानी जा रहीं निर्दलीय प्रत्याशी विचित्रा सिंह ने अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद भाजपा की अनुराधा सिंह महापौर पद के लिए अकेली प्रत्याशी रह गईं और उनके निर्विरोध निर्वाचन का रास्ता साफ हो गया।



भरतपुर के 65 वार्डों में निर्दलीयों ने 36, भाजपा ने 20 और कांग्रेस ने 7 सीटें जीती हैं। ऐसे में यहां महापौर चुनाव में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही थी। नामांकन वापसी से पहले गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने विचित्रा सिंह और उनके पति व पूर्व मेयर शिव सिंह भोंट से बातचीत की थी।



कांग्रेस ने आरोप लगाया कि इससे एक दिन पहले भरतपुर विकास प्राधिकरण के अधिकारी शिव सिंह भोंट के होटल पहुंचे थे और सेटबैक की जांच के नाम पर दबाव बनाया गया।



बेढ़म ने दबाव के आरोपों को खारिज किया। उनका कहना है कि विचित्रा सिंह ने शहर के विकास के लिए सरकार के साथ जाने का फैसला किया। विचित्रा सिंह के पति ने भी विकास के लिए सरकार का साथ देने की बात कही।



बानसूर में पुलिस भेजने का आरोप

डोटासरा ने बानसूर का मामला भी उठाया। कांग्रेस का आरोप है कि उसके कैंप में बार-बार पुलिस भेजी जा रही है। इससे पार्षदों पर दबाव बनाने की कोशिश हो रही है। फतहनगर को लेकर भी कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि निर्दलीय चेयरमैन प्रत्याशी ममता चपलोत के घर के निर्माण को लेकर नोटिस दिया गया और इसके जरिए उन पर दबाव बनाया गया।



डोटासरा ने उदयपुर, अलवर, बीकानेर, कुचेरा, डेगाना और देवली-उनियारा समेत कई निकायों का जिक्र किया। उनका आरोप है कि जिन जगहों पर भाजपा के पास पर्याप्त संख्या नहीं है, वहां सत्ता और प्रशासन के जरिए राजनीतिक समीकरण बदलने की कोशिश हो रही है।



निकाय चुनाव के नतीजों के बाद प्रदेश में मुकाबला कई जगह काफी करीबी है। 309 नगरीय निकायों के चुनाव में भाजपा 148 और कांग्रेस 104 निकायों में सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई। कई जगह निर्दलीय बोर्ड बनाने में निर्णायक भूमिका में हैं। अब महापौर, सभापति और अध्यक्ष के चुनाव के साथ ही साफ होगा कि वार्डों के नतीजों के बाद बने समीकरण निकाय प्रमुखों की कुर्सी तक कितने कायम रहते हैं।



यह खबरें भी पढ़ें...



जोधपुर निगम चुनाव: 51 के जादुई आंकड़े की रसाकशी में पार्षद का अपहरण, FIR से गरमाई सियासत



Rajasthan Top News: राजस्थान की बड़ी खबरें, कुचेरा में चेयरमैन की कुर्सी पर संग्राम



पांच होटल बदल लिए, पुलिस पीछे भाग रही, शकुंतला रावत का डोटासरा को मैसेज



राजस्थान पंचायत चुनाव की आरक्षण लॉटरी टली, डोटासरा ने पूछा- BJP को किस बात का डर?



Tags:
  • राजस्थान
  • गोविंद सिंह डोटासरा
  • निकाय चुनाव
  • निगम चुनाव