AIIMS राजकोट में राजस्थान के MBBS छात्र ने की सुसाइड, 17 पन्नों के सुसाइड नोट में खुला प्रताड़ना का राज
News In Short
- राजकोट AIIMS में राजस्थान के MBBS छात्र की आत्महत्या।
- पुलिस को रेलवे ट्रैक से मिला 17 पन्नों का सुसाइड नोट।
- सुसाइड नोट के आधार पर पुलिस ने पांच सहपाठी किए गिरफ्तार।
- एक 'आशंका' और मारपीट के माध्यम से किया गया प्रताड़ित।
- परिवार ने पुलिस पर लापरवाही का लगाया आरोप।
News In Detail
जागेश्वर प्रसाद @ जयपुर
गुजरात के राजकोट स्थित एम्स (AIIMS) से राजस्थान एक छात्र के सुसाइड करने की खबर सामने आई है। बताया जाता है कि जैसलमेर के रहने वाले एमबीबीएस फाइनल ईयर के छात्र रतन कुमार मेघवाल (23) ने मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर ली।
पुलिस ने इस मामले में मृतक के पांच सहपाठियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने जिन सहपाठियों को गिरफ्तार किया है, उनमें राजस्थान के प्रणव पालीवाल, अस्मित शर्मा, युवराज चौधरी के साथ ही हरियाणा के निर्विघ्नम यादव और गुजरात के आयुष यादव शामिल हैं। को गिरफ्तार किया है।
रेलवे ट्रैक पर मिला 17 पन्नों का सुसाइड नोट
घटना 14 मार्च की सुबह की है, जब रतन कुमार ने राजकोट के घन्टेश्वर क्षेत्र के पास ट्रेन के आगे कूदकर अपनी जान दे दी थी। मौके से पुलिस को रतन का बैग मिला, जिसमें एक नोटबुक बरामद हुई। इस नोटबुक में हिंदी और अंग्रेजी में लिखा 17 पन्नों का विस्तृत सुसाइड नोट था। रतन ने इसे अपना 'डाइंग डिक्लेरेशन' (अंतिम घोषणा) बताते हुए पांच छात्रों को अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराया।
प्रताड़ना का लगाया आरोप
सुसाइड नोट के मुताबिक जनवरी 2026 से ही रतन के साथ पढ़ने वाले कुछ छात्र उसे प्रताड़ित कर रहे थे। आरोपियों को शक था कि रतन का उनकी किसी महिला मित्र के साथ संबंध है। इसी रंजिश में छात्र उसके साथ मारपीट करते थे।
पहले भी दो बार जान देने की कोशिश
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि रतन पहले भी दो बार आत्महत्या की कोशिश कर चुका था। पहला प्रयास 28 जनवरी 2026 को किया, जिसमें वह हॉस्टल छोड़कर रेलवे ट्रैक पर गया था, लेकिन पुलिस ने बचा लिया। दूसरा प्रयास राजस्थान स्थित अपने घर पर होली की छुट्टियों के दौरान किया। इसके बाद उसे मनोचिकित्सक के पास ले जाया गया था।
परिजनों का गंभीर आरोप
रतन कुमार की मौत के बाद परिजनों ने पूरे मामले को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। रतन के पिता मोहनलाल मेघवाल का कहना है कि उनके बेटे ने जनवरी में ही प्रताड़ना से परेशान होकर आत्महत्या करने की कोशिश की थी। अगर उसी समय पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ सख्त और समय पर कार्रवाई की होती, तो हालात यहां तक नहीं पहुंचते।
रतन के परिवार का टूटा सपना
रतन कुमार जैसलमेर के फलसूंड गांव का रहने वाला था। उसके पिता कस्बे में घड़ियों की एक छोटी सी दुकान चलाते हैं। रतन तीन भाइयों में सबसे बड़ा था और परिवार को उम्मीद थी कि वह डॉक्टर बनकर घर की स्थिति सुधारेगा। उसके दो छोटे भाई अभी पढ़ाई कर रहे हैं और पिता के काम में हाथ बंटाते हैं। यह घटना रैगिंग और कैंपस में होने वाली मानसिक प्रताड़ना के खिलाफ एक बड़ा सवाल खड़ा करती है।
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