उदयपुर भाजपा का अंतर्कलह अब दिल्ली पहुंचा , कटारिया और धर्मनारायण जोशी की पुरानी लड़ाई फिर से बेपर्दा
News In Short
- उदयपुर भाजपा का अंतर्कलह अब दिल्ली दरबार तक पहुंचा।
- कटारिया और जोशी की पुरानी सियासी अदावत फिर से बेपर्दा।
- मेवाड़ में यह अंतर्कलह अब त्रिकोणीय वर्चस्व की जंग बन रहा।
- इस लड़ाई में उदयपुर फाइल्स ने किया आग में घी का काम
- राज्यपाल की प्रतिष्ठा बनाम संगठन की स्वायत्तता का दांव।
News In Detail
राजस्थान में उदयपुर में भाजपा की अंतर्कलह अब त्रिकोणीय हो गई है। घमासान की स्थिति यह है कि अंदरखाने चल रही यह लड़ाई अब खुले में आ गई है। दरअसल, उदयपुर में अब से पहले लड़ाई संगठन पर कब्जे को लेकर थी। लेकिन, संगठन में इस साल हुए बदलाव के बाद लड़ाई वर्चस्व की हो गई है।
घमासान की शुरुआत गजपाल सिंह राठौड़ के नए जिलाध्यक्ष बनने के साथ ही हो गई थी। उन्होंने अपनी नई टीम बनाई और पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया के प्रभाव को सीधे चुनौती दे डाली। इस लड़ाई में पूर्व विधायक धर्मनारायण जोशी के कूदने से मामला त्रिकोणीय हो गया है।
जोशी और कटारिया की राजनीतिक अदावत बहुत पुरानी है। कटारिया खुलकर जोशी का नाम लेकर बहुत कुछ बोल चुके हैं, जबकि जोशी ने अब तक अपना मुंह नहीं खोला है। स्थिति यह हो चुकी है कि प्रदेश स्तर पर यह लड़ाई सुलझने पर मामला अब दिल्ली तक पहुंच गया है।
उदयपुर फाइल्स ने किया आग में घी का काम
संगठन और नेताओं की लड़ाई में उदयपुर फाइल्स ने भाजपा को परेशानी में डाल दिया है। बताया जा रहा है कि कटारिया और जोशी की लड़ाई में बड़ा कारण उदयपुर फाइल्स में शामिल लोग भी हैं। विधानसभा सत्र में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने उदयपुर फाइल्स का मामला उठाकर मामले को और ज्यादा गंभीर बना दिया था। इससे भाजपा को भारी शर्मींदगी उठानी पड़ी है। उदयपुर फाइल्स एक भाजपा नेत्री की अश्लील वीडियो और ब्लैकमेलिंग से जुड़ी है।
पूर्व मंडल अध्यक्ष ने खोला मोर्चा
इस मामले में तीखापन भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष और पूर्व पार्षद विजय प्रकाश विप्लवी के लिखे पत्र से आया। विप्लव ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया के उदयपुर दौरों पर सवाल उठा दिया। विप्लवी ने कटारिया पर उदयपुर प्रशासन और राजनीतिक दखल देने जैसे आरोप भी लगाए।
उदयपुर है भाजपा का गढ़
मेवाड़ की राजनीति के गढ़ उदयपुर में नगर निगम में भाजपा लगातार छह बार से बोर्ड बनाती आ रही है। जानकारों का कहना है कि यदि भाजपा में गुटबाजी और आपसी लड़ाई इसी प्रकार चलती रही तो आगामी चुनाव में संकट हो सकता है।
कटारिया के धुर विरोधी और पूरे घटनाक्रम के केंद्र बिंदू पूर्व विधायक धर्मनारायण जोशी फिलहाल कुछ नहीं बोल रहे हैं। लेकिन राष्ट्रपति को पत्र लिखने वाले विजय प्रकाश विप्लवी को जोशी का करीबी बताया जाता है। विपल्वी का कहना है कि वह इस लड़ाई को अंतिम दम तक लडेंगे।
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