मिड-डे मील: 955 करोड़ जारी, फिर भी 53,738 स्कूलों में नहीं खरीदे जा सके बर्तन
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान के 53,738 स्कूलों में बच्चों को बर्तनों का इंतज़ार।
- केंद्र-राज्य ने 955 करोड़ दिए, पर बर्तन की खरीद अटकी।
- सिस्टम बदलने से फंसा पैसा, स्कूलों में नहीं बदल पाए बर्तन।
- 5 साल पुराने बर्तन बदलने की तैयारी, पर प्रक्रिया अधर में।
- केंद्र ने राज्य की खरीद प्रक्रिया में देरी पर नाराजगी जताई।
राजस्थान के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को दोपहर का भोजन उपलब्ध कराने वाली मिड-डे मील प्रशासनिक और तकनीकी उलझनों में फंस गई है।
राज्य सरकार के 53,738 स्कूलों में पुराने व खराब हो चुके बर्तनों को बदलने के लिए केंद्र सरकार ने 595 करोड़ और प्रदेश सरकार ने 350 करोड़ (कुल 955 करोड़ रुपए) की राशि स्वीकृत कर दी है, लेकिन अब तक स्कूलों तक पैसा नहीं पहुंच सका है।
देरी के दो मुख्य कारण: केंद्रीयकृत खरीद और SNA स्पर्श सिस्टम
बजट जारी होने के बावजूद खरीद अटकने के पीछे दो प्रमुख कारण सामने आ रहे हैं:
- केंद्रीयकृत खरीद की नीति: शिक्षा विभाग स्कूलों को सीधे बजट देकर स्थानीय स्तर पर बर्तन खरीदने की अनुमति नहीं दे रहा है, बल्कि राज्य स्तर से केंद्रीयकृत खरीद प्रक्रिया अपनाना चाहता है।
- तकनीकी पोर्टल ट्रांसफर: फंड मैनेजमेंट के लिए पुराने SNA (सिंगल नोडल अकाउंट) सिस्टम को नए SNA स्पर्श (इलेक्ट्रॉनिक फंड मैनेजमेंट प्रणाली) में बदला जा रहा है। इस सिस्टम माइग्रेशन के दौरान वित्तीय लेन-देन की प्रक्रिया पूरी तरह प्रभावित हुई है।
केंद्र सरकार ने जताई गंभीर नाराजगी
केंद्र सरकार ने नवंबर 2025 में ही अपनी पहली किस्त जारी कर दी थी और 30 जून 2026 तक खरीद प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य रखा था। मई में हुई प्रोग्राम अप्रूवल बोर्ड (PAB) की समीक्षा बैठक के दौरान केंद्र ने इस सुस्ती पर कड़ा ऐतराज जताया था।
बैठक में शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने देरी का ठीकरा वित्त विभाग पर फोड़ा और तर्क दिया कि वित्त विभाग से समय पर फंड रिलीज न होने के कारण अगली किस्तों के प्रस्ताव केंद्र को नहीं भेजे जा सके।
स्कूलवार 10 से 25 हजार रुपए मिलने का प्रावधान
विभाग द्वारा तैयार की गई रिप्लेसमेंट लिस्ट के तहत 5 साल या उससे अधिक पुराने और खराब हो चुके चूल्हे, पतीले, कंटेनर और बर्तन बदले जाने हैं। छात्र संख्या के आधार पर बजट तय किया गया है:
- 50 तक विद्यार्थी: ₹10,000 प्रति स्कूल
- 51 से 150 विद्यार्थी: ₹15,000 प्रति स्कूल
- 151 से 250 विद्यार्थी: ₹20,000 प्रति स्कूल
- 251 या अधिक विद्यार्थी: ₹25,000 प्रति स्कूल
इसके अलावा, ऑटोमेटेड मॉनिटरिंग सिस्टम (AMS) पर केवल 59% स्कूलों द्वारा दैनिक रिपोर्टिंग करने और विद्यार्थियों के आधार प्रमाणीकरण में 79% की कमी पर भी केंद्र ने चिंता जताई है।
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