गहराया बजरी संकट, सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई तक लगाई माइनिंग लीज पर रोक

Ashish Bhardwaj | May 29, 2026, 13:02 IST
Photograph: (the sootr)
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान में सभी माइनिंग लीज धारकों और एलओआई धारकों की खनन गतिविधियों पर रोक लगा दी है। यह रोक 20 जुलाई तक रहेगी। अगली सुनवाई 20 जुलाई को होगी।

News In Short

  • सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान में माइनिंग पर 20 जुलाई तक लगाई रोक।
  • सभी माइनिंग लीज और एलओआई धारकों के खनन कार्य बंद रहेंगे।
  • भीलवाड़ा, अजमेर, टोंक और सवाईमाधोपुर में बजरी खनन पर पूरी पाबंदी।
  • सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई 20 जुलाई को होगी।

News In Detail

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान की सभी माइनिंग लीज धारकों और एलओआई धारकों (ऐसे आवंटी जिन्होंने अभी खनन शुरू नहीं किया) की खनन गतिविधियों पर 20 जुलाई तक रोक लगा दी है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की।



एलओआई धारकों के वकील ने दावा किया कि वे केवल एलओआई धारक हैं और अभी खनन शुरू नहीं किया है। वहीं माइनिंग लीज धारकों के वकील ने कहा कि वे पिछले छह महीनों से खदानें चला रहे हैं, फिर भी उनके खनन कार्य बंद कर दिए गए। इससे लगभग 20 हजार टन बजरी (Sand) बेकार पड़ी हुई है।



भीलवाड़ा, अजमेर, टोंक और सवाईमाधोपुर में खनन पर रोक

अदालत ने स्पष्ट किया कि 20 जुलाई तक बजरी संबंधित सभी खनन कार्य पूरी तरह बंद रहेंगे। इसका असर भीलवाड़ा, अजमेर, टोंक और सवाईमाधोपुर जिलों में होगा।



एसएलपी (SLP) क्यों दायर हुई

मामला राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर बेंच के 20 जनवरी के फैसले से जुड़ा है। हाईकोर्ट ने खनिज विभाग की बजरी लीज नीलामी रद्द कर दी थी और जमा राशि लौटाने के आदेश दिए। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की गई।



सुप्रीम कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए बृजमोहन सपूत कला संस्कृति सेवा संस्थान और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने आदेश में स्पष्ट किया कि माइनिंग लीज धारकों और एलओआई धारकों दोनों की ओर से कोई खनन कार्य नहीं किया जाएगा।



सुप्रीम कोर्ट के आदेश का असर

इस अंतरिम आदेश के बाद प्रदेश के कई बड़े खनन क्षेत्रों में काम पूरी तरह ठप हो जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इस रोक के कारण राज्य के राजस्व और निर्माण परियोजनाओं पर असर पड़ेगा।



मामला बृजमोहन सपूत कला संस्कृति सेवा संस्थान से जुड़ा

संस्थान ने पहले से जारी बजरी लीज पर पुनः आवंटन का विरोध किया। राजस्थान उच्च न्यायालय ने सभी लीज और एलओआई धारकों की जमा राशि लौटाने के आदेश दिए। इसके खिलाफ पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर हुई।



क्या होगा आगे

20 जुलाई को अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट मामले का अंतिम निर्णय सुनाएगी। इस फैसले से राज्य के खनन उद्योग, बजरी (Sand) की उपलब्धता और निर्माण क्षेत्र पर सीधे प्रभाव पड़ने की संभावना है।



FAQ

  1. राजस्थान में बजरी खनन पर रोक कब तक रहेगी?
    सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान (Rajasthan) में माइनिंग (Mining) पर 20 जुलाई तक रोक लगाई है। तब तक सभी लीज और एलओआई (LOI) धारकों को खनन कार्य नहीं करने होंगे।

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