मिनी सचिवालय और आयुर्वेद कार्यालय होंगे अर्टच, नियुक्ति नहीं देने पर कोर्ट ने दिखाया सख्त रुख
News In Short
- अलवर में मिनी सचिवालय और आयुर्वेद भवन होंगे कुर्क।
- एक अभ्यर्थी को नियुक्ति नहीं देने पर कोर्ट ने दिया आदेश।
- मामला 1996 में आयुर्वेद विभाग में नियुक्ति नहीं देने का।
- कोर्ट ने नियुक्ति के आदेश दिए थे, पर विभाग ने नहीं माने।
- कोर्ट ने आदेश की अवहेलना होने पर दिखाया सख्त रुख।
News In Detail
सुनील जैन@अलवर
राजस्थान में अलवर की एक अदालत ने एक अभ्यर्थी को नियुक्ति नहीं देने पर कड़ा रुख अपनाया। अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट (संख्या-2) ने मिनी सचिवालय और आयुर्वेद कार्यालय भवन की कुर्की के आदेश जारी कर दिए। यह आदेश सालों पुराने भर्ती विवाद में अदालत के फैसले की अवहेलना करने पर दिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
मामले की जड़ें 1996 से जुड़ी हैं। आयुर्वेद विभाग ने 158 कंपाउंडर पदों के लिए भर्ती निकाली थी। उस समय भर्ती के नियमों के अनुसार नियुक्तियां आयुर्वेद नर्सिंग कोर्स की मेरिट के आधार पर की जानी चाहिए थीं। विभाग ने नियमों को दरकिनार करते हुए मेरिट के बजाय वरिष्ठता के आधार पर नियुक्तियां दे दीं।
प्रार्थी बसंत कुमार ने इस प्रक्रिया को चुनौती दी। प्रार्थी के अनुसार सामान्य वर्ग की मेरिट 50.27 प्रतिशत रही थी। इसमें प्रार्थी के प्राप्तांक 58.10 प्रतिशत थे। बावजूद इसके उनसे कम अंक प्राप्त करने वालों का चयन हो गया और बसंत कुमार को नियुक्ति से वंचित रखा गया।
कानूनी लड़ाई का सफर
न्याय पाने के लिए बसंत कुमार ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। शुरुआती दौर में एसीजेएम कोर्ट संख्या-2 में अपील की गई थी, जिसे मेरिट लिस्ट पेश न होने के कारण खारिज कर दिया गया था। इसके बाद मामले को एडीजे कोर्ट संख्या-2 में ले जाया गया।
अन्ततः, साल 2024 में बसंत कुमार बनाम राज्य सरकार के मामले में न्यायालय ने प्रार्थी के पक्ष में फैसला सुनाया और विभाग को नियुक्ति देने का आदेश दिया। लेकिन प्रशासन और आयुर्वेद विभाग ने अदालत के इस निर्णय की पालना करने में कोई रुचि नहीं दिखाई।
छह अप्रैल तक पेश करनी है रिपोर्ट
अदालत के आदेश की निरंतर अवहेलना को देखते हुए कोर्ट ने अब सख्त कदम उठाया। वादी के वकील विक्रांत माथुर ने जानकारी दी कि विभाग द्वारा फैसले की पालना नहीं करने पर कोर्ट ने मिनी सचिवालय परिसर में कलेक्टर कार्यालय के भवन के साथ ही वहां मौजूद समस्त लोहे और लकड़ी का फर्नीचर को कुर्क करने के आदेश दिए। साथ ही आयुर्वेद विभाग के निदेशक के कार्यालय भवन और उसका संपूर्ण फर्नीचर को भी अटैच करने को कहा। आदेश के अनुसार प्रशासन को 6 अप्रैल तक इस वारंट की पालना कर रिपोर्ट पेश करनी है।
प्रशासनिक हलकों में हड़कंप
सरकारी कलेक्ट्रेट की कुर्की के आदेश ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। आमतौर पर कुर्की के आदेश निजी संपत्तियों के खिलाफ देखे जाते हैं, लेकिन सरकारी कार्यालयों की कुर्की का आदेश यह दर्शाता है कि न्यायालय अब सरकारी विभागों की लेटलतीफी और अदालती आदेशों की अनदेखी को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
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