12 जिलों में पहुंचा मानसून, इस बार औसत से 10% कम बारिश का पूर्वानुमान
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान में 7 दिन की देरी से मानसून की एंट्री, 12 जिलों में हुई बारिश।
- इस बार कमजोर रहेगा मानसून, औसत से 10% कम बारिश का पूर्वानुमान।
- 17 साल में 11 बार देरी से आया मानसून, 2026 में भी 7 दिन की देरी।
- पिछले साल 64% ज्यादा बारिश हुई थी, इस बार बांधों की स्थिति चिंताजनक।
- राजस्थान में 319 बांध सूखे, 369 में आंशिक पानी, सिर्फ 5 बांध पूरे भरे।
राजस्थान में गुरुवार को मानसून की एंट्री हो गई। हालांकि यह निर्धारित समय से 7 दिन की देरी से आया है। मानसून ने झालावाड़, कोटा, बूंदी, भरतपुर, बारां, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, दौसा, जयपुर, टोंक और अलवर समेत 12 जिलों में प्रवेश किया है।
मौसम विभाग ने इस सीजन राज्य में औसत से 10 फीसदी या उससे कम बारिश होने का पूर्वानुमान जारी किया है। राज्य के बांधों की स्थिति की बात करें तो 693 में से 319 बांध अभी भी सूखे हैं।
राजस्थान में मानसून का निर्धारित समय क्या है?
मौसम विभाग के अनुसार राजस्थान में मानसून प्रवेश की सामान्य तारीख 25 जून निर्धारित है। मानसून सीजन 1 जून से 30 सितंबर तक का होता है और विदाई का समय 17 सितंबर है।
जुलाई और अगस्त को पीक मानसून महीने माना जाता है। इस बार देश में मानसून केरल में निर्धारित समय से 4 दिन की देरी से पहुंचा था, और राजस्थान में 7 दिन की देरी से आया।
17 साल में 11 बार देरी से आया मानसून
राजस्थान में मानसून की देरी कोई नई बात नहीं है। 2020 से पहले मानसून प्रवेश की तारीख 15 जून थी। साल 2010 से 2019 के बीच केवल एक बार यानी 2013 में मानसून समय पर आया, जबकि 9 बार देरी हुई।
डेटा समीक्षा के बाद केंद्रीय मौसम विज्ञान ने 2020 से मानसून प्रवेश की सामान्य तारीख 25 जून कर दी। 2020 से 2026 के बीच केवल 2022 और 2026 में मानसून देरी से आया, जबकि 5 बार समय पर या पहले आया।
इस बार कम बारिश का पूर्वानुमान
मौसम विभाग ने राजस्थान में इस मानसून सीजन को कमजोर बताया है। राज्य में इस बार औसत से 10 फीसदी या उससे भी कम बारिश होने का अनुमान है। राजस्थान में एक मानसून सीजन में औसतन 435.6 मिलीमीटर बारिश होती है।
पिछले साल था 108 साल का रिकॉर्ड
इस बारिश की कमी की आशंका इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि पिछले साल 2025 में मानसून ने राजस्थान में 715.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की थी जो औसत से 64 फीसदी ज्यादा थी। इसने 108 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा था।
राजस्थान में अब तक सर्वाधिक बारिश 1917 में 844.2 मिलीमीटर दर्ज हुई है। पिछले साल बूंदी, दौसा, कोटा, सवाई माधोपुर, टोंक और बारां सबसे ज्यादा प्रभावित जिले रहे थे।
बूंदी के नैनवां में एक दिन में 502MM बारिश
पिछले साल 23 अगस्त 2025 को बूंदी के नैनवां में 24 घंटे में 502 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई थी, जो एक रिकॉर्ड है। 20 से अधिक शहर और कस्बे ऐसे रहे जहां एक दिन में 200 से 310 मिलीमीटर तक पानी बरसा। श्रीगंगानगर, नागौर, हनुमानगढ़, टोंक, सवाई माधोपुर और दौसा में पिछले साल औसत से दोगुनी बारिश हुई थी।
319 बांध सूखे, 5 पूरे भरे
राजस्थान में अभी 693 में से 319 बांध पूरी तरह सूखे हैं। 369 बांध आंशिक रूप से यानी 10 से 90 फीसदी तक भरे हैं। मानसून आने से पहले ही 5 बांध पूरी तरह भरे हुए हैं। 90 फीसदी से ज्यादा भरे बांधों में जयपुर का कानोता, कोटा का कोटा बैराज और दौसा का मोरेल डैम शामिल हैं।
प्रमुख बांधों की स्थिति
राजस्थान के प्रमुख बड़े बांधों में कोटा बैराज 98.41 फीसदी, मोरेल डैम 95.97 फीसदी और जवाहर सागर 69.61 फीसदी भरा है। राणा प्रताप सागर 66.82 फीसदी और बीसलपुर बांध 66.86 फीसदी पर है। माही बजाज सागर 43.95 फीसदी और ईसरदा बांध मात्र 27.69 फीसदी भरा है। छापरवाड़ा बांध सबसे कम 14.57 फीसदी पर है।
FAQ
- इस बार राजस्थान में कितनी बारिश होने का अनुमान है?
मौसम विभाग ने इस बार मानसून कमजोर रहने का पूर्वानुमान जारी किया है। राजस्थान में औसत से 10 फीसदी या उससे भी कम बारिश होने की आशंका है। राज्य में औसत बारिश 435.6 मिलीमीटर होती है। - राजस्थान के बांधों में अभी कितना पानी है?
राज्य के 693 में से 319 बांध पूरी तरह सूखे हैं। 369 बांध आंशिक रूप से भरे हैं। मानसून से पहले ही 5 बांध पूरे भरे हैं जिनमें कोटा बैराज 98.41 फीसदी और मोरेल डैम 95.97 फीसदी शामिल हैं।
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