क्या असल में मानसून कम रहेगा मेहरबान, जानिए 30 साल के डेटा से बारिश की तस्वीर

Mukesh Sharma | Jun 26, 2026, 15:54 IST
राजस्थान में 30 साल के मौसम विज्ञान के डेटा ने बढ़ाई उम्मीद
राजस्थान में इस बार मानसून देरी से आएगा। इसके जुलाई के सप्ताह में आने के आसार हैं। हालांकि, 30 साल का डेटा यह राहत देता है कि 13 बार मानसून लेट होने के बावजूद 7 बार रिकॉर्ड तोड़ बारिश लेकर आया।

समझें क्या है पूरा मामला

  • मौसम विभाग का अनुमान, अगले सप्ताह आएगा मानसून, 10% कम बरस सकते हैं बादल।
  • राजस्थान में मानसून 20 से 25 जून के बीच आता है, इस बार एक सप्ताह देरी के आसार।
  • भले ही इस बार कम बारिश का अलर्ट, लेकिन लेट मानसून ने कभी नहीं किया निराश।
  • 30 साल में 13 बार देरी से आया मानसूनी सिस्टम, पर 7 बार उम्मीद से ज्यादा हुई बरसात।
  • राजस्थान में तीन बार मानसून सबसे ज्यादा लेट आया, एक बार तोड़ डाला रिकॉर्ड।

राजस्थान में मानसून की देरी चर्चा में है। पिछली बार मानसून एक सप्ताह जल्दी आया था। बारिश ने रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। इस बार 7 दिन की देरी से ही अगले सप्ताह मानसून के आने का अनुमान है।



अल नीनो के कारण आशंका यह भी है कि देरी से आने वाले यह मानसून कम बरसेगा। मौसम विभाग के अनुसार इस बार 10 फीसदी कम बारिश होने की आशंका है।



सिर्फ दो बार समय पर आया

1996 से लेकर 2025 तक यानी 30 साल के डेटा के एनालिसिस से पता चलता है कि केवल 2 बार ही तय समय पर मानसून राजस्थान आया। 15 बार मानसून समय से पहले और 13 बार देरी से पहुंचा है।



डेटा एनालिसिस से यह भी पता चलता है कि 7 बार देरी से आने के बावजूद मानसून जमकर बरसा है, जबकि तीन बार समय से पहले आने पर बारिश 25 फीसदी कम हुई है।



तीन बार सबसे ज्यादा लेट, एक बार तोड़ डाला रिकॉर्ड

पिछले 30 साल के दौरान मानसून आने के अनुमानों की तारीख हमेशा बदलती रही है। आमतौर पर यह 20 से 25 जून के बीच की रही है। वहीं सामान्य बारिश अलग-अलग वर्षों में 415 से 435.6 मिलीमीटर (MM) तक मानी जाती रही है।



इस एनालिसिस में मानसून आने की सामान्य तारीख को 25 जून मानकर जल्दी या देरी के दिन तय किए गए हैं। साल 2012 में मानसून सबसे ज्यादा 8 दिन लेट आया, लेकिन अगस्त में हुई बारिश ने सबकी चिंता दूर कर दी। 2012 में सामान्य से 11 फीसदी अधिक बारिश हुई।



साल 2019 में 7 दिन देरी से मानसून राजस्थान पहुंचा, लेकिन बरसात में कोई कमी नहीं रही। 2019 में तीन दशकों में पहली बार बारिश का आंकड़ा 550 एमएम से पार पहुंच गया। खास बात यह रही कि मानसून ने पहले ही दिन राजस्थान के आधे से ज्यादा हिस्से को कवर कर लिया।



साल 2014 में मानसून में 7 दिन की देरी दर्ज की गई। तब बरसात लगभग सामान्य जैसी ही रही। आंकड़े बताते हैं कि देरी से (जुलाई में) दस्तक देने वाले मानसून ने पिछले 30 सालों में अब तक कभी बारिश के आंकड़े माइनस में नहीं पहुंचाए।



तीन बार सबसे ज्यादा लेट, एक बार तोड़ डाला रिकॉर्ड


10 बार 5 दिन तक की देरी से एंट्री

मानसून 10 बार 5 दिन तक की देरी से राजस्थान में दाखिल हुआ। इन 10 अलग-अलग सालों में 5 बार सामान्य से अधिक और इतनी ही बार सामान्य से कम बरसात हुई।



इनमें साल 2006 सबसे चौंकाने वाला रहा। मानसून 2 दिन की देरी से पहुंचा। अगस्त 2006 के आखिरी हफ्ते में बाड़मेर में पूरे साल के औसत से 5 गुना अधिक बारिश हो गई, बाढ़ आ गई।



वहीं, 2002 और 2009 में मानसून 4-4 दिन देरी से था और दोनों बार सूखा पड़ा। 2022 में मानसून 5 दिन की देरी से था, लेकिन 596 MM बरसात ने राजस्थान को तर कर दिया। इस दौरान पूर्वी राजस्थान में करीब 781 MM बारिश दर्ज हुई।



साल 2010 में मानसून एक दिन देरी से था, लेकिन बारिश करीब 540 एमएम दर्ज की गई। आमतौर पर पूर्वी राजस्थान में अधिक बरसात होती है, लेकिन उस दौरान पश्चिमी और पूर्वी राजस्थान में लगभग 27 फीसदी बरसात अधिक हुई।



10 बार 5 दिन तक की देरी से एंट्री


2 बार तय समय पर आया और कर गया तर

30 साल में 2 बार ही मानसून तय समय पर राजस्थान पहुंचा। खास बात यह रही कि दोनों ही बार सामान्य से ज्यादा बारिश हुई। 2024 में करीब 679 MM बरसात हुई थी। 2023 में भी सामान्य से 15% ज्यादा बारिश हुई।



2 बार तय समय पर आया और कर गया तर


4 बार सबसे जल्दी, तोड़ा 108 साल का रिकॉर्ड

राजस्थान में 30 साल में 4 बार सबसे जल्दी मानसून पहुंचा। बरसात चारों बार औसत से अधिक रही। 2001 में मानसून 12 दिन पहले राजस्थान पहुंच गया। हालांकि सबसे जल्दी मानसून आने के बावजूद कोई रिकॉर्ड नहीं टूटा। बरसात 11 फीसदी अधिक दर्ज हुई।



रिकॉर्ड पिछले साल यानी 2025 के मानसून ने तोड़े थे। मानसून 7 दिन पहले राजस्थान पहुंचा और 64 फीसदी अधिक बरसा। 108 साल का रिकॉर्ड टूट गया। 2021 में भी मानसून 7 दिन पहले पहुंचा था और बरसात 17 फीसदी अधिक रही।



मानसून 4 बार सबसे जल्दी, तोड़ा 108 साल का रिकॉर्ड


जल्दी आने पर भी दो बार सूखे जैसे हालात

मानसून के 1 से 4 दिन पहले आने की बात करें तो पिछले 30 सालों में 11 बार ऐसा हुआ। 1999 में मानसून एक दिन पहले आया, लेकिन 25 फीसदी कम बरसा।



2004 में 3 दिन पहले आया और 22 फीसदी कम बरसात हुई। इन दोनों ही सालों में राजस्थान को सूखे के हालातों का सामना करना पड़ा। इधर, 2011 में भी एक दिन पहले मानसून आया और 11 फीसदी कम बरसा, लेकिन तब हालात सामान्य रहे।



1996, 2011 और 2016 में मानसून 2 से 3 दिन पहले आया। इन सालों में बरसात का आंकड़ा 500 MM से ज्यादा रहा। सबसे ज्यादा 2011 में 41 फीसदी अधिक 590 MM से भी ज्यादा बरसात हुई।



मानसून के जल्दी आने पर भी दो बार सूखे जैसे हालात


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