राजस्थान और एमपी में बॉर्डर फिल्म जैसी लड़ाई, जमीन को लेकर दोनों राज्यों में ठनी
समझें क्या है पूरा मामला
- जमीन के एक छोटे से टुकड़े को लेकर राजस्थान और एमपी में ठनी।
- राजस्थान का आरोप, एमपी उसकी जमीन पर लगा रहा सोलर प्लांट।
- मामला झालावाड़ जिले की 871 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि से जुड़ा।
- एमपी का तर्क, जमीन उसकी, लंबे समय से यहां करा रहे चुनाव।
- राजस्थान ने कहा, बातचीत से हल नहीं निकला तो सुप्रीम कोर्ट ले जाएंगे मुद्दा।
कहते हैं पड़ोसी कितना भी अच्छा हो, बाउंड्री की एक इंच जमीन पर भी बात आ जाए तो मामला गरम हो जाता है। कुछ ऐसा ही हुआ है राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच।
जमीन के एक छोटे से टुकड़े को लेकर दोनों राज्यों में ठन गई है। दिलचस्प बात यह है कि दोनों ही राज्यों में इस वक्त भाजपा की सरकार है।
जमीन का यह विवाद राजनीति से ऊपर उठकर अब कानूनी अखाड़ा बनने जा रहा है। राजस्थान के अधिकारियों का कहना है कि अगर बातचीत से हल नहीं निकला तो इसे सुप्रीम कोर्ट ले जाया जा सकता है।
क्यों गरमाया अभी यह मामला
मामला झालावाड़ जिले की 871 हेक्टेयर से अधिक आरक्षित वन भूमि से जुड़ा है। इस भूमि के स्वामित्व को लेकर दोनों भाजपा शासित राज्य आमने-सामने हैं।
वर्तमान में यह मामला तब गरमाया, जब मध्यप्रदेश ने मंदसौर जिले से सटी इस जमीन के 130 हेक्टेयर हिस्से पर दिलीप बिल्डकॉन को सोलर प्लांट के लिए पट्टे पर दे दी। यह कंपनी इस जमीन पर 100 मेगावाट का ग्रिड-कनेक्टेड कैप्टिव सोलर प्लांट चलाएगी।
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार झालावाड़ के डीएफओ ने हाल ही में अतिक्रमणकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। हम अतिक्रमण नहीं हटने तक किसी भी काम की इजाजत नहीं देंगे।
मुख्य सचिव की बैठक में छाया रहा मुद्दा
मुख्य सचिव वी श्रीनिवास की अध्यक्षता में हाल ही में हुई वीडियो कॉन्फ्रेंस में यह मुद्दा छाया रहा।
सरकार ने फैसला किया है कि उसके वन और राजस्व मंत्री विवाद के हल के लिए मध्यप्रदेश के अपने समकक्षों को पत्र लिखेंगे।
राजस्थान के वन बल प्रमुख ने एमपी में अपने समकक्ष के समक्ष विरोध दर्ज कराया है। अधिकारी का कहना है कि वन विभाग अपनी भूमि पर किसी भी गैर-वन संबंधी गतिविधि के खिलाफ कार्रवाई करेगा।
अधिकारियों का कहना है कि भूमि संबंधी अभिलेखों का अंतिम रूप से निपटारा होने तक किसी भी गैर-वन संबंधी गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी।
दिलीप बिल्डकॉन स्थापित कर रहा सोलर प्लांट
दस्तावेजों में खुलासा हुआ है कि मध्यप्रदेश जल निगम ने सोलर प्रोजेक्ट का ठेका फर्म दिलीप बिल्डकॉन को दिया है। इसके बाद कंपनी ने प्रोजेक्ट पर कार्य शुरू कर दिया है।
अधिकारियों के अनुसार राजस्थान ने इस मामले में बार-बार आपत्तियां उठाकर नोटिस जारी किया गया। इसके बावजूद कंपनी वन भूमि को समतल करने का काम जारी रखा।
एमपी ने खारिज की राजस्थान की आपत्ति
मध्य प्रदेश में मंदसौर के कलेक्टर को भेजे पत्र में झालावाड़ के उप वन संरक्षक ने लिखा कि सिंहपुर गांव के घुघवा वन ब्लॉक में खसरा संख्या 236/1 और 1423 पर अवैध निर्माण कार्य चल रहा है।
डीसीएफ के अनुसार सोलर प्लांट से जुड़ी कंपनी को काम रोकने का नोटिस जारी किया गया था। लेकिन निर्देश के बावजूद गैर-वन संबंधी गतिविधियां फिर से शुरू हो गईं।
इस बीच, मध्य प्रदेश ने राजस्थान के दावे को खारिज कर दिया। उसका तर्क है कि यह जमीन मंदसौर जिले की सीमा में आती है। सोलर प्लांट मध्य प्रदेश जल निगम को आवंटित पेयजल योजना से जुड़ी हुई है।
मध्य प्रदेश की दलील है कि उसने अपने दावे के समर्थन में राजस्थान के साथ राजस्व रिकॉर्ड, सर्वेक्षण मानचित्र, जीआईएस डेटा, संयुक्त सीमा माप रिकॉर्ड और जीपीएस टैग वाली तस्वीरें साझा की हैं।
एमपी का दावा, लंबे समय से रह रहे लोग
मध्यप्रदेश ने अपने दावे के पक्ष में कुछ और तर्क दिए हैं। उसका कहना है कि वह इस क्षेत्र में स्थानीय चुनाव लंबे समय से कराता आ रहा है।
हालांकि, राजस्थान ने एमपी के इस दावे को गलत बताया है। उसका आरोप है कि मध्य प्रदेश ने विवादित भूमि पर गांव बसा दिए हैं।
हकीकत यह है कि राजस्थान के राजस्व अभिलेखों में इस जमीन को 1961 में अधिसूचित आरक्षित वन भूमि के रूप में दर्शाया गया है। एक अधिकारी के अनुसार विवादित भूखंड का लगभग 450 हेक्टेयर हिस्सा अभी भी खाली पड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट ले जाने की तैयारी
सूत्रों के अनुसार राजस्थान ने इस मामले में कानूनी एक्शन के लिए अतिरिक्त महाधिवक्ता से कानूनी राय मांगी है। इसमें सुप्रीम कोर्ट का रुख करने का विकल्प भी शामिल है।
हालांकि, उन्होंने कहा कि जमीन विवादको आपसी बातचीत से सुलझाने के प्रयास पहले किए जाएंगे।
अधिकारी के अनुसार संभव हुआ तो नया साझा सीमांकन भी किया जा सकता है।
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