राजस्थान पंचायत-निकाय चुनाव में टिकट किसे? भाजपा-कांग्रेस ने तय किए पैमाने
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान में निकाय-पंचायत चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेजी हुई।
- भाजपा-कांग्रेस दोनों पार्टियों ने टिकट को लेकर गाइ़डलाइन तय कर दी।
- भाजपा ने जिताऊ प्रत्याशी और जेन-जी पर फोकस का ऐलान किया है।
- कांग्रेस ने वार्ड के वोटर को ही टिकट देने की शर्त रखी है।
- युवाओं को 50 प्रतिशत टिकट देने की बात भी कही गई है।
राजस्थान में नगरीय निकाय और पंचायती राज चुनावों की वजह से सियासी पारा चढ़ने लगा है। 309 नगरीय निकायों के लिए वार्ड आरक्षण पूरा हो चुका है और कभी भी चुनाव की तारीखों का ऐलान हो सकता है। इसके बीच, भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों ने चुनावी रणनीति पर काम शुरू कर दिया। जयपुर स्थित दोनों पार्टियों के प्रदेश मुख्यालयों में सोमवार को मैराथन बैठकें हुईं।
राजस्थान पंचायत-निकाय चुनाव को लेकर हुई इन बैठकों में बूथ स्तर से लेकर वार्ड प्रत्याशियों के सेलेक्शन तक के लिए कड़े नियम तय किए गए। भाजपा ने सिफारिशी कल्चर को नकारते हुए सिर्फ जिताऊ प्रत्याशी और जेन-जी युवाओं को तरजीह देने का ऐलान किया। वहीं, कांग्रेस ने वार्ड स्तर पर बाहरी प्रत्याशियों की नो-एंट्री का फैसला किया।
इन नए दिशा-निर्देशों के बाद राजस्थान के 309 नगर निकायों और पंचायती राज संस्थाओं से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हजारों कार्यकर्ताओं और दावेदारों के बीच समीकरण बदल गए।
निकाय चुनाव में भाजपा का फोकस जिताऊ चेहरों पर
राजस्थान प्रदेश भाजपा कार्यालय में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक हुई। इसमें निकाय चुनाव के लिए पार्टी का मुख्य नैरेटिव तय किया गया।
बैठक में प्रदेश प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल, प्रदेश संगठन महामंत्री अजय कुमार और निकाय चुनाव प्रभारी हरीश द्विवेदी सहित कई राष्ट्रीय पदाधिकारी मौजूद रहे। भाजपा ने साफ किया है कि प्रत्याशी चुनने में भाई-भतीजावाद, दबाव या पारिवारिक सिफारिश काम नहीं आएगी। केवल स्थानीय प्रभाव और जीतने की क्षमता ही टिकट का पैमाना होगी।
भाजपा का फोकस जेन-जी पर
भारतीय जनता पार्टी पहली बार राजस्थान नगर निकाय चुनावों में जेन-जी यानी 18 से 25 साल के सक्रिय युवाओं को तलाशकर सीधे चुनावी मैदान में उतारने की संभावनाओं पर काम कर रही।
निकाय चुनाव में राजस्थान सरकार के पिछले ढाई साल के कामकाज, विकास योजनाओं और कांग्रेस की कथित गुटबाजी को मुख्य मुद्दा बनाया जाएगा। इसके लिए आईटी, सोशल मीडिया और मीडिया की संयुक्त डिजिटल टीम तैनात की जा रही।
कांग्रेस में वार्ड का वोटर ही टिकट का हकदार
राजस्थान प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में प्रदेशाध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा, एआईसीसी प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने 23 जिलों के जिलाध्यक्षों, विधायकों और सांसदों से 6 चरणों में फीडबैक लिया।
डोटासरा के मुताबिक जिलों में पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटियां गठित कर चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी गईं। कांग्रेस भजनललाल सरकार के ढाई साल के कार्यकाल की नाकामियों को लेकर जनता के बीच जाएगी। निकाय चुनाव में युवाओं को 50 फीसदी टिकट देने का ऐलान पहले ही किया जा चुका है।
कांग्रेस में टिकट के लिए देना होगा पूरा सफरनामा
राजस्थान कांग्रेस ने निकाय चुनाव की प्रत्याशी चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल और प्रशासनिक मापदंड तय किए हैं। दावेदार जिस वार्ड का रजिस्टर्ड वोटर होगा, वह सिर्फ उसी वार्ड से चुनाव लड़ सकेगा। दूसरे वार्ड से चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं होगी।
चुनाव लड़ने के इच्छुक कार्यकर्ताओं को प्रदेश कांग्रेस के आधिकारिक पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन के साथ-साथ ऑफलाइन फॉर्म भी जमा कराना होगा। आवेदन फॉर्म में कार्यकर्ताओं को बताना होगा कि वे कब से पार्टी में सक्रिय हैं, पहले किन पदों पर रहे हैं और पिछले चुनावों में उनकी जीत का आधार क्या रहा था।
दोनों दलों की इस आक्रामक तैयारी और सख्त गाइडलाइंस से साफ है कि राजस्थान में आगामी स्थानीय निकाय चुनाव कड़े मुकाबले वाले होने जा रहे।
FAQ
- राजस्थान में भाजपा नगर निकाय चुनाव में टिकट किसे देगी?
भाजपा ने कहा है कि सिफारिश या पारिवारिक दबाव काम नहीं आएगा। सिर्फ जिताऊ प्रत्याशी और जेन-जी युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। - राजस्थान कांग्रेस ने निकाय चुनाव में टिकट के लिए क्या मापदंड तय किए?
कांग्रेस ने साफ किया है कि दावेदार जिस वार्ड का वोटर होगा, वहीं से टिकट मिलेगा। दूसरे वार्ड से चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं होगी। - कांग्रेस में पार्षद के टिकट के लिए क्या प्रक्रिया अपनानी होगी?
कार्यकर्ताओं को ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन के साथ ऑफलाइन फॉर्म भी जमा करना होगा। फॉर्म में उन्हें अपना राजनीतिक सफरनामा और पिछले चुनावी अनुभव बताना होगा।
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