NEET UG 2026: भाजपा नेता की गिरफ्तारी से सियासी भूचाल, कांग्रेस ने सरकार पर लगाए ये आरोप
राजस्थान की सियासत में पिछले कई सालों से पेपर लीक का भूत सिर चढ़कर बोल रहा है। विपक्ष में रहते हुए भाजपा ने पेपर लीक पर जमकर विरोध किया था। लेकिन, अब नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में भारतीय जनता युवा मोर्चा के पूर्व पदाधिकारी दिनेश बिवाल की गिरफ्तारी ने भाजपा और कांग्रेस के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।
पूर्व सीएम अशोक गहलोत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भाजपा सरकार और पार्टी पर तल्ख बयान दिए हैं।
पार्टी का कवच और लीक का परचम
पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने अपने एक्स एकाउंट पर लिखा है कि नीट पेपर लीक में गिरफ्तार आरोपी दिनेश बिवाल भाजपा का पदाधिकारी है। क्या इसी कारण राजस्थान की भाजपा सरकार ने नीट पेपर लीक को छिपाने का प्रयास किया और कोई एफआईआर दर्ज नहीं की।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि यह बेहद गंभीर और चौंकाने वाला है कि नीट पेपर लीक में जयपुर के जिन दो आरोपियों को दिनेश बिंवाल व मांगीलाल को नाम सामने आ रहा है, वे जयपुर ग्रामीण में भाजपा पदाधिकारी और भाजपा सरकार में मंत्री-विधायकों के करीबी बताए जा रहे हैं। 22 लाख युवाओं के भविष्य को बेचने वाले आरोपियों की तस्वीर भाजपा नेताओं के साथ वायरत हो रही है। कोई जमवारामगढ़ के भाजपा विधायक का करीबी बताया जा रहा है तो कोई शिक्षा मंत्री और चौमूं से भाजपा के पूर्व विधायक का खास बताया जा रहा है।
भाजपा और पेपर लीक माफियाओं का रिश्ता क्या है
डोटासरा ने लिखा है कि ऐसे में सवाल अधिक गंभीर हो जाता है कि आखिर भाजपा और पेपरलीक माफियाओं के बीच क्या रिश्ता है? देश के लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है, उनके सपनों को बेचा गया है। अगर भाजपा का इन आरोपियों से कोई संबंध नहीं तो उन्हें आगे आकर सफाई देनी चाहिए।
जूली बोले, भाजपा नेता के कारण छिपाया
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म 'एक्स' पर लिखा है कि नीट पेपर लीक में गिरफ्तार दिनेश बिंवाल भाजपा का नेता है। क्या राजस्थान की भाजपा सरकार ने इस कारण ही नौ दिन तक पेपर लीक को छिपाए रखा और एफआईआर दर्ज नहीं की थी।
दिनेश बिंवाल के एलबम से तस्वीरें निकालीं तो भाजपा के खेमे में सन्नाटा पसर गया। पोस्टर और होर्डिंग्स पर मुस्कराते हुए जिला मंत्री, भाजपा युवा मोर्चा (जयपुर देहात) महाशय अब पुलिस की गिरफ्त में है। दिनेश बिवाल भाजपा के बड़े कार्यक्रमों की शोभा बढ़ाने वाला चेहरा रहा है।
30 लाख का सौदा और व्हाट्सएप क्रांति
उधर, पुलिस जांच में हुआ खुलासा किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। आरोप है कि दिनेश बिवाल ने नीट परीक्षा का पेपर 30 लाख रुपए में खरीदा। लेकिन, उसने आम छात्रों को राहत देने के लिए इस पेपर को व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए परीक्षा देने वाले छात्रों तक पहुंचा दिया। कोचिंग सेंटरों और छात्रों के बीच पुल बनकर खड़ा यह युवा नेता दरअसल भविष्य की नींव नहीं रख रहा था, बल्कि नींव में दीमक लगा रहा था।
सीबीआई ने शुरू की जांच
नीट 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई ने तेजी से जांच को आगे बढ़ाया है। सीबीआई टीम ने गुरुग्राम से यश यादव को हिरासत में लिया और उसे जयपुर लेकर आई है।
एजेंसी का दावा है कि गिरफ्तार किए गए दो भाई दिनेश और मांगीलाल सीधे यश यादव के संपर्क में थे। उन्होंने उसी से पेपर खरीदा था। अब सीबीआई इन तीनों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करेगी, जिससे पता लगे कि पेपर दोनों के अतिरिक्त और किसने लिया।
कैसे पहुंचा पेपर लीक माफिया तक
पता चला है कि दिनेश का बेटा ऋषि सीकर में पढ़ रहा है। उसका सीकर आना-जाना लग रहता था। जांच एजेंसी को संदेह है कि ऋषि के जरिए ही पेपर राकेश नाम के व्यक्ति तक पहुंचा था और वहीं से करीब 1000 छात्रों को सर्कुलेट किया।
एजेंसी पता लगा रही है कि राजनीतिक कार्यकर्ता दिनेश और प्रोपर्टी का काम करने वाला उसका भाई मांगीलाल आखिर पेपर लीक माफिया तक पहुंचा कैसे ?
छात्रों को पहले से पता था पेपर आएगा!
इस मामले में आश्चर्य की बात तो यह है कि सीकर में करीब 1000 छात्र एक प्राइवेट माफिया नाम के एक व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़े हुए थे। ग्रुप की चैट पढ़ने से स्पष्ट है कि ग्रुप से जुड़े छात्रों को पहले से ही पता था कि नीट का पेपर परीक्षा से पहले ही उन्हें मिल जाएगा।
प्राइवेट माफिया वाट्सएप ग्रुप का एडमिन ने ग्रुप में दावा किया था कि पेपर के 99 फीसदी प्रश्न सही हैं। उसने वाट्सएप ग्रुप में 02 मई को रात 10 बजकर 50 मिनट पर मैसेज डालकर छात्रों को कहा कि वह इस पेपर को सॉल्व करें क्यों कि इसके 99.99 फीसदी आने की संभावना है।
एडमिन ने ग्रुप सदस्यों को इनबॉक्स में मैसेज नहीं करने की हिदायत देते कोई संदेह होने पर ग्रुप में ही मैसेज करने को कहा है। ग्रुप में डाला गया पेपर भी एक पासावर्ड से ही खुल रहा था और पासवर्ड भी लीक माफिया@9466 था।
पेपर जहां रखा था वहीं से लाया हूं
ग्रुप में एक छात्रा ने एडमिन को सर संबोधित किया और घबराहट होने बताते हुए पूछा कि जो पेपर पोस्ट किया है वही आएगा या नहीं ! इस पर एडमिन ने दावा किया वह पेपर रखने वाली जगह से ही पेपर उठाकर लाया है और वही आएगा।
उसने ग्रुप अपने पोस्ट किए पेपर के आने की गारंटी देते हुए लिखा है कि ग्रुप पर डाले गए पेपर का सवाल नंबर दो हो सकता है परीक्षा के पेपर में दस नंबर हो,लेकिन बाकी सब वही आएगा।
इस एडमिन ने अपने इनबॉक्स पर सवालों के समान होने या नहीं होने के ढ़ेरों मैसेज आने पर नाराजगी जताते हुए लिखा है कि जो पेपर दिया है, वही आएगा आज की परीक्षा में, मिला लेना। फालतू में बार बार एक ही सवाल करते जा रहे हो। इतना ही संदेह था तो पेमेंट करने की कोई जरूरत नहीं था।
पैसा जब ट्रस्ट करके दिये हो तो ट्रस्ट रखो मेरे ऊपर। पेपर सेम ही आएगा। पेपर पहले ही डाल दिया हूं, इस ग्रुप में पेपर लीक करने के विज्ञापन भी दिये जा रहे हैं।
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