बागियों के खौफ से डरी BJP-कांग्रेस, सिंबल देने का निकाला नया तोड़!

Mukesh Sharma | Aug 29, 2026, 14:17 IST
राजस्थान निकाय चुनाव
राजस्थान निकाय चुनाव में बगावत के डर से भाजपा और कांग्रेस उम्मीदवारों की सूची जारी नहीं करेंगी। दलबदल और अंदरूनी कलह से बचने के लिए दोनों दल सीधे प्रत्याशियों को सिंबल सौंपेंगे।

समझें क्या है पूरा मामला

  • बगावत का डर,लिस्ट जारी करने से परहेज।
  • दिग्गजों की एंट्री,डोटासरा-जूली और सीएम सक्रिय।
  • दलबदल की मार,भाजपा को अजमेर और पाली में बड़े झटके।
  • नई रणनीति,जिला स्तर पर सीधे मिलेंगे सिंबल।

राजस्थान निकाय चुनाव में सत्तारुढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस को बागियों का डर इस हद्द तक सता रहा है कि दोनों ही पार्टियों ने फिलहाल उम्मीदवारों की लिस्ट जारी नहीं करने का फैसला किया है।



दोनों ही पार्टियां भले ही बड़े-बड़े दावे करे लेकिन,स्थिति यह है कि दोनों ही पार्टी में बागी चुनावी गणित बिगाड़ने को तैयार बैठे हैं। भाजपा को पिछले दिनों ही अजमेर पूर्व मेयर धर्मेंद्र गहलोत ने पार्टी छोड़ दी है। गहलोत ने विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी पर परेशान करने का आरोप लगाकर पार्टी छोड़ी है। अब वह देवनानी के गृह वार्ड में अपनी पत्नी को चुनाव लड़ाकर देवनानी को चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।



वहीं शनिवार को पाली के पूर्व सभापति राकेश भाटी ने भी भाजपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है। इससे पाली की स्थानीय राजनीति प्रभावित होने की पूरी संभावना है।



नाराजगी सामान्य प्रक्रिया

बागियों के डर से उम्मीदवारों की लिस्ट जारी नहीं होने के सवाल पर भाजपा के पूर्व कृषि मंत्री व जयपुर संभाग के चुनाव प्रभारी प्रभुलाल सैनी चुनाव में नाराजगी केा सामान्य बता रहे हैं। उनका कहना है कि हर बार चुनाव होते हैं,नाराजगी भी होती है और वापसी भी होती है और यह सामान्य प्रक्रिया है। सैनी ने कहा कि यह कार्यकर्ताओं का आखिरी चुनाव नहीं है। उन्हेें धैर्य रखना चाहिए।



जो भी पार्टी छोड़ता है उसे सफलता नहीं मिलती। बल्कि नेता हो या कार्यकर्ता सबके लिए पार्टी ही सब कुछ होती है। पार्टी ही नेताओं और कार्यकर्ताओं केा टिकट मांगने के काबिल बनाया है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बगावत से निपटने के लिए एक विशेष टीम बनाई है। लेकिन,किसी भी स्थिति में अनुशानहीनता सहन नहीं होगी।



भाजपा के प्रदेश कार्यालय में प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ और सीएम भजनलाल शर्मा लगातार संभागवार बैठक कर रहे हैं। गुरुवार और शुक्रवार को भी देर रात तक नेताओं की बैठक चली थी और शनिवार को भी बैठकों का दौर लगातार जारी है। प्रदेश महामंत्री संगठन अजय कुमार, राष्ट्रीय महामंत्री और निकाय चुनाव प्रभारी हरीश द्विवेदी सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता बैठकों में उपस्थित रहे हैं।



इनके अलावा महाराष्ट्र से चुनाव समन्वय के लिए आए चंद्रशेखर बावनकुले सहित अरुण चतुर्वेदी, अविनाश गहलोत, श्रवण सिंह बगड़ी, कैलाश मेघवाल समेत अन्य पदाधिकारियों ने भी चुनावी तैयारियों पर चर्चा कर रहे हैं।



कांग्रेस में डोटासरा व जूली ने संभाली कमान

उधर कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सभी पक्षों के साथ समन्वय करने व उम्मीदवार फाईनल करने की कमान संभाली हुई है।



डोटासरा लगातार हर जिले और निकाय के प्रभारी,विधायक व पर्यवेक्षकों से रिपोर्ट ले रहे हैं। इस काम में उनकी मदद नेता प्रतिपक्ष जूली कर रहे हैं। डोटासरा का कहना है कि जहां कहीं विवाद की स्थिति होगी वहां वह सभी दूसरे वरिष्ठ नेताओं से सलाह मशविरा करेंगे।



लेकिन,पूर्व सीएम अशोक गहलोत कह चुके हैं कि वह किसी भी स्थिति में केाई दखल नहीं करेंगे। उनका कहना है कि टिकट जीतने लायक उम्मीदवारों को ही दिए जाने चाहिए। उधर डोटासरा का कहना है कि उम्मीदवारों के नामों केा अंतिम रुप देने से पहले वार्ड और मंडल सहित जिला अध्यक्षों की राय को भी पूरी तरजीह दी जाएगी। कांग्रेस में वॉर रुम में डोटासरा की उन उम्मीदवारों को सिंबल देने का काम कर रही है जिनके नाम फाईनल हो चुके हैं।



बूथ स्तर पर बीजेपी की रणनीति पर जोर

बैठकों में संभावित उम्मीदवारों के नामों के साथ-साथ वार्डवार राजनीतिक स्थिति, संगठन की मजबूती और स्थानीय समीकरणों पर भी विचार हो रहा है। भाजपा की बैठकों में सिर्फ टिकट वितरण ही चर्चा नहीं हो रही है बल्कि बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने की रणनीति भी बन रही है। कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय, चुनावी प्रबंधन और बूथ स्तर पर जिम्मेदारियां तय की जा रही है।



सीधे उम्मीदवार को देंगे पार्टी सिंबल

भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही उम्मीदवारों की जानकारी संबंधित जिला अध्यक्ष और विधायक को देने और अधिकृत उम्मीदवार को जिला कार्यालय बुलाकर चुनाव चिन्ह सौंपने की रणीनीति बनाई है। जिन संभागों में प्रत्याशियों को लेकर रायशुमारी पूरी हो चुकी है, वहां के निकाय प्रभारियों को प्रदेश अध्यक्ष के हस्ताक्षर वाले खाली सिंबल दिए जाने की जानकारी भी मिली है।



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