निकाय चुनाव: अजमेर में 4 वोट की तलाश, सीकर में बहुमत; फिर कांग्रेस को किस बात का डर?
समझें क्या है पूरा मामला
- निकाय चुनाव: कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का डर।
- अजमेर में 37 पार्षद, फिर भी बेंगलुरु में बाड़ेबंदी।
- सीकर में पीसीसी चीफ डोटासरा की साख दांव पर।
- कई निकायों में बहुमत के बावजूद सतर्क कांग्रेस।
- अजमेर-सीकर में मेयर पद की दिलचस्प जंग।
राजस्थान में पार्षदों का चुनाव खत्म हो चुका है, लेकिन असली सियासी परीक्षा अब मेयर, सभापति और अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज होने को लेकर हो रही। अजमेर में कांग्रेस बहुमत से सिर्फ 4 वोट दूर है। सीकर में उसके पास साफ बहुमत है। इसके बावजूद दोनों जगह पार्टी अपने पार्षदों को लेकर सतर्क है।
वजह है गुप्त मतदान, निर्दलीयों का खेल और क्रॉस वोटिंग की आशंका। इसी बीच कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भाजपा पर पुलिस-प्रशासन के जरिए पार्षदों पर दबाव बनाने का आरोप लगाकर मुकाबले को और गरमा दिया। भाजपा की तरफ से ऐसे आरोपों को खारिज किया जा रहा।
कांग्रेस को सता रहा क्रॉस वोटिंग का डर
अजमेर नगर निगम में कुल 80 वार्ड हैं। कांग्रेस 37 पार्षदों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी। भाजपा के 32 और 11 निर्दलीय पार्षद जीते। मेयर बनाने के लिए 41 वोट चाहिए। यानी कांग्रेस को 4 और भाजपा को 9 अतिरिक्त वोट जुटाने होंगे। ऐसे में 11 निर्दलीय पार्षद मेयर की कुर्सी का गणित बदल सकते। दोनों दल इन पर नजर लगाए हुए।
अजमेर में महापौर का सियासी संग्राम
अजमेर में कांग्रेस ने किरण गढ़वाल को मेयर प्रत्याशी बनाया है। भाजपा की तरफ से अनामिका शर्मा मैदान में हैं। मतदान 21 सितंबर को होगा। दोनों दल बहुमत जुटाने का दावा कर रहे, लेकिन किसी के पास अपने दम पर 41 पार्षद नहीं। इसलिए निर्दलीयों का रुख आखिरी समय तक सबसे अहम रहेगा।
कांग्रेस को अपने पार्षदों को एकजुट रखने की चिंता
कांग्रेस के सामने निर्दलीयों को जोड़ने के साथ अपने 37 पार्षदों को एकजुट रखने की चुनौती भी है। पार्टी के पार्षदों को अजमेर से बाहर ले जाया गया और उनके बेंगलुरु में होने की चर्चा है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई। दूसरी तरफ भाजपा भी अपने पार्षदों को एकजुट रखने की रणनीति पर काम कर रही। गुप्त मतदान के कारण दोनों खेमों में क्रॉस वोटिंग को लेकर सतर्कता है।
अजमेर कांग्रेस ने भाजपा और पुलिस पर पार्षदों तथा उनके परिवारों पर दबाव बनाने के आरोप भी लगाए। कांग्रेस नेताओं ने इस मुद्दे पर कलेक्टर के सामने विरोध दर्ज कराया।
सीकर नगर परिषद में कांग्रेस के पास साफ बहुमत
सीकर नगर परिषद में तस्वीर अजमेर से अलग है। यहां 65 वार्डों में कांग्रेस ने 38 सीटें जीती हैं। भाजपा को 22, निर्दलीयों को चार और आरएलपी को एक सीट मिली है। बोर्ड के लिए 33 पार्षद चाहिए। यानी कांग्रेस के पास अपने दम पर बहुमत है। इसके बावजूद सभापति चुनाव को लेकर पार्टी कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।
सीकर के अलावा लक्ष्मणगढ़, लोसल और रामगढ़ शेखावाटी जैसे निकायों पर भी दोनों दलों की नजर है। खासकर लक्ष्मणगढ़ में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी जरूर है, लेकिन बहुमत से दूर है। यहां 45 में कांग्रेस के 20, भाजपा के 15 और 10 निर्दलीय जीते हैं। बोर्ड बनाने के लिए 23 पार्षद चाहिए। ऐसे में यहां निर्दलीयों की भूमिका सीधे सत्ता का फैसला कर सकती है।
डोटासरा की साख का भी सवाल
सीकर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का गृह जिला है। यहां कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजेंद्र पारीक और फतेहपुर विधायक हाकम अली भी सक्रिय हैं। इसलिए सीकर जिले के निकायों के प्रमुख पदों का चुनाव स्थानीय राजनीति से आगे प्रदेश स्तर की सियासत से भी जुड़ गया।
कांग्रेस ने सीकर नगर परिषद में साफ बहुमत हासिल किया। वहीं जिले के कई दूसरे निकायों में निर्दलीय अहम स्थिति में हैं। जिले के 14 निकायों में 110 निर्दलीय प्रत्याशी जीते हैं। ऐसे में अध्यक्ष और सभापति चुनाव में दोनों दलों के राजनीतिक प्रबंधन की भी परीक्षा है।
डोटासरा ने CMO को भी घेरा
इसी सियासी खींचतान के बीच डोटासरा ने सोशल मीडिया पोस्ट में भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा है कि केंद्रीय भाजपा नेतृत्व से जुड़े कुछ नेताओं के निर्देश पर CMO के जरिए अधिकारियों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
डोटासरा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों पर मुकदमों और पुलिस कार्रवाई का दबाव बनाया जा रहा है, ताकि भाजपा अपने बोर्ड बना सके। उन्होंने भरतपुर, बीकानेर, जोधपुर, उदयपुर, श्रीगंगानगर, संगरिया, कुचेरा, बहरोड़, बानसूर, सीकर, लोसल और दूसरे निकायों का नाम भी लिया है।
डोटासरा ने अपने पोस्ट में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर भी निशाना साधा। उन्होंने मुख्यमंत्री के लिए ‘पर्ची मुख्यमंत्री’ शब्द का इस्तेमाल किया और सवाल किया कि अगर जनता के फैसले को सत्ता और प्रशासन के जरिए बदलने की कोशिश होगी तो चुनाव कराने का मतलब क्या रह जाएगा।
उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नवनिर्वाचित पार्षदों से कहा कि वे दबाव में न आएं। जहां भी पुलिस या प्रशासन की ओर से कथित दबाव, धमकी या सत्ता के दुरुपयोग का मामला सामने आए, उसके तथ्य और सबूत जुटाए जाएं। डोटासरा ने ऐसी शिकायतों को प्रदेश कांग्रेस कमेटी और कांग्रेस वॉर रूम तक भेजने को कहा है।
दोनों दलों की रणनीति की परीक्षा
अजमेर में कांग्रेस के पास बहुमत नहीं और निर्दलीयों के बिना उसका रास्ता मुश्किल। सीकर में उसके पास साफ बहुमत है, लेकिन प्रमुख पदों का मतदान अभी बाकी है। लक्ष्मणगढ़ जैसे निकायों में निर्दलीय सीधे निर्णायक स्थिति में हैं।
ऐसे में 21 सितंबर के मतदान में केवल संख्या नहीं, पार्षदों की एकजुटता और निर्दलीयों का रुख भी अहम रहेगा। क्रॉस वोटिंग की आशंकाओं और एक-दूसरे पर लगाए जा रहे आरोपों ने मेयर-सभापति-अध्यक्ष की लड़ाई को वार्ड चुनाव से भी ज्यादा दिलचस्प बना दिया।
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