निकाय चुनाव की वोटिंग खत्म: जोधपुर सबसे आगे, कोटा सबसे पीछे, जयपुर में 62.88% मतदान

Raghvendra Singh Rathore | Sept 11, 2026, 20:03 IST
निकाय चुनाव: जोधपुर सबसे आगे, कोटा सबसे पीछे
राजस्थान निकाय चुनाव के दूसरे चरण में जोधपुर में सबसे ज्यादा 71.10% और कोटा में सबसे कम 57.02% मतदान हुआ। जयपुर में 62.88% वोटिंग दर्ज हुई। पहले चरण में 76.41% मतदान हुआ था।

समझें क्या है पूरा मामला

  • राजस्थान नगरीय निकाय के दूसरे फेज की वोटिंग हुई खत्म।
  • जोधपुर सबसे आगे, कोटा में सबसे कम हुआ मतदान।
  • जयपुर में वोटिंग बढ़ी, 62.88% मतदान हुआ,वार्ड 150 में सर्वाधिक 83.70%।
  • पहले चरण में 76.41% वोटिंग, छोटे निकायों में वोटर रहे ज़्यादा उत्साहित।
  • बाड़ेबंदी का खेल शुरू,निर्दलीयों को साधने और प्रत्याशियों को बचाने की होड़।

जयपुर। राजस्थान में नगर निकाय चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण का मतदान शुक्रवार शाम 6 बजे समाप्त हो गया। दूसरे चरण में जयपुर, जोधपुर, कोटा, अजमेर, उदयपुर और पाली समेत 147 नगरीय निकायों में वोट डाले गए। इसके साथ ही प्रदेश में निकाय चुनाव की मतदान प्रक्रिया पूरी हो गई है। अब प्रत्याशियों की किस्मत EVM में कैद है।



दूसरे चरण के छह बड़े नगर निगमों के आंकड़े देखें तो मतदान में बड़ा अंतर सामने आया है। जोधपुर 71.10 प्रतिशत मतदान के साथ सबसे आगे रहा, जबकि कोटा में सबसे कम 57.02 प्रतिशत वोटिंग हुई। जयपुर में 62.88 प्रतिशत मतदाता बूथ तक पहुंचे।



निकाय चुनाव: जोधपुर सबसे आगे, कोटा सबसे पीछे


6 नगर निगमों का वोटिंग रिपोर्ट कार्ड

जोधपुर में 71.10 प्रतिशत, पाली में 70.94 प्रतिशत, उदयपुर में 67.26 प्रतिशत, अजमेर में 63.65 प्रतिशत, जयपुर में 62.88 प्रतिशत और कोटा में 57.02 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।



इस तरह जोधपुर और पाली ही दो ऐसे नगर निगम रहे, जहां मतदान 70 प्रतिशत के पार पहुंचा। दूसरी ओर कोटा छह नगर निगमों में इकलौता शहर रहा, जहां मतदान 60 प्रतिशत भी नहीं पहुंच सका।



जोधपुर में बढ़ा मतदान, कोटा में बड़ी गिरावट

पिछले नगर निगम चुनावों से तुलना करें तो जोधपुर और कोटा की तस्वीर बिल्कुल उलट दिखाई देती है। 2020 में जोधपुर उत्तर में 62.64 और जोधपुर दक्षिण में 58.76 प्रतिशत मतदान हुआ था। इस बार एकीकृत जोधपुर नगर निगम में मतदान 71.10 प्रतिशत तक पहुंच गया। यानी पिछले चुनाव के दोनों निगमों के मुकाबले इस बार जोधपुर में वोटिंग प्रतिशत में अच्छा उछाल आया।



कोटा में इसका उलटा हुआ। 2020 में कोटा उत्तर में 65.12 और कोटा दक्षिण में 66.43 प्रतिशत मतदान हुआ था। इस बार एकीकृत कोटा नगर निगम में मतदान घटकर 57.02 प्रतिशत रह गया। यानी पुराने दोनों निगमों की तुलना में करीब 8 से 9 प्रतिशत अंक की गिरावट दिखाई देती है।



जयपुर में पिछली बार से ज्यादा वोटिंग

जयपुर में इस बार 150 वार्डों में 62.88 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। 2020 में जयपुर हेरिटेज में 57.82 और जयपुर ग्रेटर में 58.31 प्रतिशत मतदान हुआ था। इस लिहाज से एकीकृत जयपुर नगर निगम में इस बार मतदान प्रतिशत पिछली बार के दोनों निगमों से करीब 4.5 से 5 प्रतिशत अंक ज्यादा रहा।



जयपुर में वार्डवार आंकड़ों में और भी बड़ा अंतर सामने आया है। वार्ड नंबर 150 में सर्वाधिक 83.70 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि वार्ड नंबर 100 में सबसे कम 46.33 प्रतिशत वोट पड़े। दोनों के बीच मतदान का अंतर 37.37 प्रतिशत अंक रहा। शहर के पांच वार्ड ऐसे भी रहे, जहां 50 प्रतिशत से कम मतदान हुआ।



दूसरे चरण में 87 लाख से ज्यादा मतदाता

दूसरे चरण में प्रदेश के 147 नगरीय निकायों के 4,774 वार्डों में मतदान कराया गया। इनमें 6 नगर निगम, 24 नगर परिषद और 117 नगरपालिकाएं शामिल थीं। इस चरण में 87.60 लाख से ज्यादा मतदाता पंजीकृत थे और 18,266 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे।



9 सितंबर को पहले चरण में 76.41% मतदान

इससे पहले 9 सितंबर को निकाय चुनाव के पहले चरण का मतदान हुआ था। पहले चरण में प्रदेश के 162 नगरीय निकायों के 5,393 वार्डों में वोट डाले गए थे।



पहले चरण में करीब 57.52 लाख मतदाताओं में से 43.95 लाख से ज्यादा लोगों ने मतदान किया। अंतिम मतदान प्रतिशत 76.41 रहा। पहले चरण में 4 नगर निगम, 27 नगर परिषद और 131 नगरपालिकाएं शामिल थीं।



पहले चरण के चार निगमों में कितना मतदान

पहले चरण में भरतपुर नगर निगम में करीब 73 प्रतिशत, बीकानेर में करीब 69 प्रतिशत, अलवर में 65 प्रतिशत से ज्यादा और भीलवाड़ा में करीब 64 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। वहीं सभी निकायों में प्रतापगढ़ की अरनोद नगरपालिका में सर्वाधिक 91.98 प्रतिशत मतदान हुआ था।



पहले चरण के आंकड़ों में एक बात साफ दिखाई दी कि छोटे नगर निकायों में बड़े शहरों के मुकाबले मतदाता ज्यादा संख्या में बूथ तक पहुंचे। पहले चरण में 54 निकायों में मतदान 85 प्रतिशत से ऊपर रहा था।



बड़े शहरों में वोटिंग का अलग ट्रेंड

दोनों चरणों के आंकड़ों में बड़े शहरों और छोटे निकायों के मतदान में अंतर भी नजर आता है। पहले चरण का कुल मतदान 76.41 प्रतिशत रहा, लेकिन दूसरे चरण के छह बड़े नगर निगमों में केवल जोधपुर और पाली ही 70 प्रतिशत का आंकड़ा पार कर सके।



सबसे दिलचस्प तस्वीर जोधपुर और कोटा की रही। जोधपुर में पिछले निगम चुनाव के मुकाबले मतदान बढ़ा है, जबकि कोटा में गिरावट दर्ज हुई। जयपुर में भी पिछले चुनाव के दोनों पुराने निगमों की तुलना में मतदान प्रतिशत बढ़ा है।अब निगाहें चुनाव परिणाम पर हैं।



उम्मीदवारों की बाड़ेबंदी की तैयारी

दूसरे चरण का मतदान समाप्त होते ही भाजपा व कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों की बाड़ेबंदी करने की तैयारी शुरु कर दी है। पहले चरण के उम्मीदवारों को पहले ही बाड़ेबंदी में अलग—अलग रिसोर्ट में भेज दिया है। परिणाम आने पर जो जीतेगें वे रिसोर्ट में रुके रहेंगे और हारने वालों को घर भेज दिया जाएगा। इसके बाद जीतने वालों को मेयर व चेयरमैन की वोटिंग वाले दिन ही लाया जाएगा।



जीतने वाले निर्दलीयों पर भी डोरे डालना शुरु

भाजपा—कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों के अतिरिक्त जीतने वाले निर्दलीयों पर भी डोरे डालने शुरु कर दिए हैं। इस काम में भाजपा केा सत्ता में होने का फायदा ​मिलेगा। हालांकि कांग्रेस भी पूरा दम लगाएगी,लेकिन इस बात की संभावना कम है कि निर्दलीय बोर्ड बनाने के लिए कांग्रेस का दामन थामेंगे।



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