राजस्थान के 8,000 करोड़ कहां गए, सीएम की दिल्ली यात्रा पर जूली का बडा सवाल
News In Short
- जूली ने सीएम की हालिया दिल्ली यात्राओं पर उठाए सवाल
- जूली ने पूछा, प्रदेश को क्यों नहीं मिला उसका पूरा हिस्सा।
- नेता प्रतिपक्ष ने 8,000 करोड़ रुपये कम मिलने पर उठाए सवाल।
- जूली का आरोप, दिल्ली से खाली हाथ लौट रहे हैं मुख्यमंत्री।
- जूली बोले, वित्तीय अधिकारों में कटौती पर सीएम को जवाब मांगना चाहिए।
News In Detail
राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की हालिया दिल्ली यात्रा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने प्रदेश के वित्तीय अधिकारों को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। जूली ने कहा कि मुख्यमंत्री को दिल्ली जाकर केवल शिष्टाचार भेंट करने के बजाय राजस्थान के हिस्से में आई भारी वित्तीय कटौतियों का जवाब मांगना चाहिए था।
जूली के अनुसार विभिन्न मदों में राजस्थान को अपेक्षित राशि से 8000 करोड़ रुपये कम मिले हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है, कर्ज तेजी से बढ़ रहा है। जूली ने कहा कि तीन साल में ही सरकार लगभग 2.22 लाख करोड़ का कर्ज लेने जा रही है। साथ ही उन्होंने गैस संकट और आम जनता पर बढ़ते आर्थिक बोझ को लेकर भी सरकार को घेरा।
जूली बोले, विज्ञापनों से अलग तस्वीर
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति सरकार के विज्ञापनों में दिखाई जा रहे उत्कर्ष से बिल्कुल अलग है। वास्तविकता में राजस्थान वित्तीय दबाव और संकट की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। जूली ने सवाल उठाया कि क्या मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री से राज्य के हिस्से में आई भारी कटौतियों पर कोई ठोस जवाब मांगा है।
केंद्रीय सहायता में कटौती का आरोप
नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि केंद्र से मिलने वाली विभिन्न मदों में राजस्थान को अपेक्षित राशि नहीं मिली। उनके अनुसार एसएसीआई स्कीम के तहत करीब 15,000 करोड़ मिलने का अनुमान था। लेकिन, राज्य को मात्र 9,500 करोड़ ही मिले हैं। यह करीब 37 प्रतिशत की सीधी कटौती है।
इसी तरह केंद्रीय करों के बंटवारे के तहत 85,716 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले केवल 83,940 करोड़ मिले हैं। ग्रांट इन ऐड के 39,193 करोड़ मिलने थे, लेकिन मात्र 37,910 करोड़ की राशि ही राज्य को मिली है।
कहां गई यह कमी
जूली ने सवाल उठाया कि प्रदेश के हिस्से के 8000 करोड़ से अधिक की यह कमी आखिर कहां चली गई। मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं। उन्होंने कहा कि 15वां वित्त आयोग के तहत भी राजस्थान की हिस्सेदारी में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। बजट 2025-26 के अनुसार केंद्रीय करों से मिलने वाली राशि में लगभग 1,776 करोड़ की कमी दर्ज की गई है।
तीन साल में ही कर्ज का पहाड़
जूली ने कहा कि दो साल बनाम पांच साल की तुलना करने वाली भाजपा सरकार खुद कर्ज लेने के मामले में रिकॉर्ड बना रही है। उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने अपने पूरे पांच साल के कार्यकाल में लगभग 2.26 लाख करोड़ का कर्ज लिया था। मौजूदा सरकार महज तीन साल में ही करीब 2.22 लाख करोड़ का कर्ज लेने जा रही है। जूली ने कहा कि इतनी तेजी से बढ़ता कर्ज राज्य की आर्थिक स्थिति के लिए गंभीर संकेत है। उन्होंने दावा किया कि राज्य की अर्थव्यवस्था यानी का आकार करीब 1.13 लाख करोड़ तक सिमट गया है।
गैस संकट और आम जनता की परेशानी
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार जहां विकास के दावे कर रही है, वहीं आम जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रही है। उन्होंने कहा कि रसोई गैस की उपलब्धता पर सरकारी दावों की पोल मुख्यमंत्री के बेणेश्चर धाम में सभा में लकड़ी के चूल्हों पर भोजन बनाने से ही खुल गई है।
मुख्यमंत्री से सीधा सवाल
जूली ने मुख्यमंत्री से सीधा सवाल करते हुए कहा कि क्या वे दिल्ली से राजस्थान को हुए वित्तीय नुकसान की भरपाई के लिए कोई ठोस आश्वासन लेकर लौटे हैं या फिर राज्य को बढ़ते कर्ज और आर्थिक दबाव के बीच छोड़कर वापस आ गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता यह जानना चाहती है कि दिल्ली से राजस्थान के हक के लिए आवाज उठी या नहीं।
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