राजस्थान की तीन विभूतियों को मिला पद्मश्री, राष्ट्रपति मुर्मू ने किया सम्मानित
News In Short
- राजस्थान के गफरुद्दीन मेवाती जोगी, तगाराम भील और स्वामी ब्रह्मदेव पद्मश्री से सम्मानित
- नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इन तीनों को पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया।
- गफरुद्दीन मेवाती जोगी ने भपंग वादन और 20 विलुप्त लोक वाद्यों को संरक्षित किया।
- तगाराम भील ने थार के पारंपरिक वाद्य अलगोजा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर लोकप्रिय बनाया।
- स्वामी ब्रह्मदेव महाराज ने जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा और जीवन सुधार में योगदान दिया।
News In Detail
राजस्थान की मिट्टी से निकली लोक संस्कृति, संगीत और समाजसेवा की गूंज अब राष्ट्रीय स्तर पर भी सुनाई दे रही है। इस बार पद्मश्री से राजस्थान की तीन हस्तियों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने अपनी कला और सेवा से अलग पहचान बनाई।
राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान समारोह
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली में आयोजित समारोह में तीनों हस्तियों को पद्मश्री प्रदान किया। इस अवसर पर 2 पद्म विभूषण 6 पद्म भूषण और 58 पद्मश्री पुरस्कार भी दिए गए। शेष विजेताओं को दूसरे चरण में सम्मानित किया जाएगा।
पद्मश्री विजेता: गफरुद्दीन मेवाती जोगी
राजस्थान के डीग जिले के कैथवाड़ा गांव में जन्मे गफरुद्दीन मेवाती जोगी ने भपंग वादन और लोक संगीत के संरक्षण में अहम योगदान दिया। उन्होंने महाभारत, लोक रामायण और कृष्ण लीला जैसी परंपराओं को पीढ़ी दर पीढ़ी जीवित रखा। 20 विलुप्त होती लोक वाद्य परंपराओं को संरक्षित करना उनकी विशेष उपलब्धि है।
तगाराम भील: थार की धुनों का प्रचारक
जैसलमेर जिले के मूलसागर गांव के तगाराम भील ने थार क्षेत्र के पारंपरिक वाद्य अलगोजा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई। बचपन से ही लोक संगीत से जुड़े तगाराम ने स्वतंत्रता दिवस समारोह 1981 में राष्ट्रीय पहचान प्राप्त की।
स्वामी ब्रह्मदेव महाराज: समाजसेवा में अनुकरणीय
श्री गंगानगर के स्वामी ब्रह्मदेव महाराज लंबे समय से दिव्यांग और जरूरतमंद बच्चों के उत्थान के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंने शिक्षा और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के जरिए समाज में अलग पहचान बनाई। उनके प्रयासों से कई बच्चों को बेहतर जीवन और शिक्षा के अवसर मिले।
FAQs (सामान्य प्रश्न)
पद्मश्री अवॉर्ड (Padma Shri) सम्मान क्या है और राजस्थान की हस्तियों को क्यों मिला?
पद्मश्री (Padma Shri) भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। राजस्थान की हस्तियों ने लोक संस्कृति, संगीत और समाज सेवा में असाधारण योगदान दिया, इसलिए उन्हें यह सम्मान मिला।
गफरुद्दीन मेवाती जोगी और तगाराम भील का लोक संगीत में योगदान क्या है?
गफरुद्दीन मेवाती जोगी ने भपंग (Bhapang) वादन और 20 विलुप्त लोक वाद्यों को संरक्षित किया। तगाराम भील ने अलगोजा (Algoza) वादन को थार और अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई।
स्वामी ब्रह्मदेव महाराज की समाज सेवा (Social Service) में क्या भूमिका रही?
स्वामी ब्रह्मदेव महाराज ने दिव्यांग और जरूरतमंद बच्चों के लिए शिक्षा और आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान किया। उनके प्रयासों से कई बच्चों का जीवन बेहतर हुआ।
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