सीमा पर ड्रोन तस्करी बढ़ी, डेढ़ साल में 175 करोड़ की हेरोइन जब्त, सुरक्षा चक्र को चुनौती
News In Short
- राजस्थान में सीमा पार से ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थ और हथियारों की तस्करी बढ़ी।
- डेढ़ साल के भीतर सुरक्षा बलों ने 35.3 किलोग्राम हेरोइन बरामद की।
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत 175 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई।
- ड्रोन का इस्तेमाल कर भारतीय सीमा में 200 किलोमीटर तक घुसपैठ की कोशिश।
- राजस्थान में लगभग 150 ऐसे गांव हैं, ड्रॉपिंग की घटनाएं सबसे ज्यादा देखी।
News In Detail
बीकानेर। पाकिस्तान से सटी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर इन दिनों ड्रोन तस्करी ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। राजस्थान के श्रीगंगानगर और बीकानेर सेक्टर में पाकिस्तानी तस्करों द्वारा ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थों और हथियारों की खेप गिराने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि डेढ़ साल के भीतर सुरक्षा बलों ने 35.3 किलोग्राम हेरोइन बरामद की है। इसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 175 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। इस दौरान 10 बड़े तस्करों को भी सलाखों के पीछे भेजा गया है।
सीमा पार से लगातार ड्रोन घुसपैठ
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भी सीमा पार से होने वाली संदिग्ध गतिविधियों में कमी नहीं आई है। पाकिस्तानी तस्कर अब ड्रोन का इस्तेमाल कर भारतीय सीमा के भीतर 200 किलोमीटर तक के दायरे में घुसपैठ की कोशिश कर रहे हैं। न केवल ड्रग्स, बल्कि हथियारों की खेप भी ड्रोन के जरिए गिराई जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि हालांकि बीएसएफ के पास ड्रोन से निपटने की तकनीक है, लेकिन ड्रोन की बढ़ती संख्या और उनकी बदलती फ्रीक्वेंसी को देखते हुए मौजूदा तकनीक पूरी तरह से कारगर साबित नहीं हो रही है।
150 गांव सेंसिटिव जोन घोषित
श्रीगंगानगर के हिन्दुमलकोट से लेकर बीकानेर के खाजूवाला तक का इलाका बेहद संवेदनशील हो गया है। लगभग 150 ऐसे गांव हैं, जो अंतरराष्ट्रीय सीमा के बिल्कुल नजदीक हैं। इन गांवों में ड्रोन के जरिए ड्रॉपिंग की घटनाएं सबसे ज्यादा देखी जा रही हैं। मुख्य रूप से श्रीकरणपुर, गजसिंहपुर, रायसिंहनगर, अनूपगढ़, घड़साना और रावला जैसे क्षेत्रों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
कैसे काम करता है डिलीवरी नेटवर्क
जांच में यह बात सामने आई है कि पाकिस्तानी तस्कर और पंजाब के ड्रग माफिया पहले से ही जीपीएस लोकेशन तय कर लेते हैं। ड्रोन के आने से पहले ही स्थानीय पैडलर (डिलीवरी देने वाले) तय लोकेशन पर पहुंच जाते हैं। अक्सर ये डिलीवरी आधी रात के बाद होती है।
गश्त के डर से तस्कर रात में ही हेरोइन को खेतों में छिपा देते हैं और अगले दिन किसान बनकर या काम के बहाने उसे वहां से निकाल लेते हैं। हाल ही में श्रीकरणपुर के पास 17-ओ गांव से 12 किलो हेरोइन के साथ 4 युवकों को दबोचा गया, जिनकी योजना इस खेप को पंजाब ले जाने की थी।
हाल की प्रमुख घटनाएं (टाइमलाइन - 2026)
10 जनवरी श्रीगंगानगर (अनूपगढ़) 4 किलो हेरोइन, 3 तस्कर गिरफ्तार
11 फरवरी बीकानेर (खाजूवाला) 2.25 किलो हेरोइन, एक वाहन जब्त
09 मार्च श्रीगंगानगर (रायसिंहनगर) 6.4 किलो हेरोइन, 1 तस्कर गिरफ्तार
26 मार्च बीकानेर (रावला) 10.8 किलो हेरोइन, 5 तस्कर गिरफ्तार
एंटी-ड्रोन सिस्टम की मांग
एनसीबी सूत्रों का कहना है कि ड्रग माफिया ने बीएसएफ के रात्रिकालीन नाकों से बचकर डिलीवरी पॉइंट बनाना शुरू कर दिया है। वर्तमान एंटी-ड्रोन सिस्टम की रेंज कम होने के कारण ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन पकड़ में नहीं आते।
विशेषज्ञों का कहना है कि एंटी-ड्रोन सिस्टम की रेंज कम से कम 1200 मीटर होनी चाहिए। इसके साथ ही, सीमा सुरक्षा को और अधिक पुख्ता करने के लिए मोबाइल यूनिट्स उपलब्ध कराने की आवश्यकता है ताकि किसी भी संदिग्ध हलचल पर तुरंत रिस्पॉन्स दिया जा सके।
तकनीक को अपग्रेड बनाने की जरूरत
विशेषज्ञों के अनुसार सीमा पर बढ़ता यह ड्रोन आतंक न केवल नशाखोरी को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन गया है। जब तक सीमावर्ती क्षेत्रों में तकनीक को और अधिक अपग्रेड नहीं किया जाता और स्थानीय मुखबिर तंत्र को मजबूत नहीं किया जाता, तब तक इस चुनौती से निपटना मुश्किल बना रहेगा।
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