छह साल में बदल गया गांव की सरकार का चुनाव: 33 से 41 जिला परिषद, 352 से 457 पंचायत समितियां

Raghvendra Singh Rathore | Oct 03, 2026, 16:19 IST
पंचायत चुनाव 2026, छह साल में बदला पूरा नक्शा
राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव 2026 में बड़े बदलाव के साथ होंगे, जिनमें जिला परिषद और पंचायत समितियों की संख्या में वृद्धि शामिल है। सरपंच के चुनाव के लिए बैलेट पेपर का उपयोग होगा, जो एक महत्वपूर्ण परिवर्तन है। दो से अधिक संतान वाले उम्मीदवारों की अयोग्यता समाप्त कर दी गई है, जिससे अधिक लोग चुनाव लड़ सकेंगे। इस बार महिलाओं के लिए भी 50 प्रतिशत आरक्षण जारी रहेगा।

समझें क्या है पूरा मामला

  • छह साल में बदल गया गांव का चुनाव।
  • 33 से 41 हुई जिला परिषदों की संख्या।
  • 352 से 457 हुईं पंचायत समितियां।
  • सरपंच चुनाव में लौटा बैलेट पेपर।
  • दो संतान वाली पाबंदी हुई खत्म।

राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है, लेकिन 2026 का चुनाव सिर्फ नई तारीखों का चुनाव नहीं है। छह साल पहले हुए पिछले आम पंचायत चुनाव से तुलना करें तो इस बार गांव की सरकार चुनने का पूरा नक्शा बदल चुका है।



जिला परिषदों और पंचायत समितियों की संख्या बढ़ी है। तीन हजार से ज्यादा ग्राम पंचायतें बढ़ चुकी हैं। कई गांवों की पंचायत और पंचायत समिति बदल गई है। सरपंच चुनने के लिए वोट डालने का तरीका बदला है और करीब तीन दशक से लागू दो से अधिक संतान वाला नियम भी इस चुनाव से पहले हटा दिया गया है। सबसे बड़ा बदलाव पंचायतीराज संस्थाओं के आकार में दिखाई देता है।



33 जिला परिषद थीं, अब 41

2020-21 के पंचायतीराज चुनाव से जुड़े आधिकारिक आंकड़ों में राजस्थान में 33 जिला परिषद, 352 पंचायत समितियां और 11,266 ग्राम पंचायतें दर्ज थीं।अब प्रदेश में 41 जिला परिषद, 457 पंचायत समितियां और 14,403 ग्राम पंचायतें हैं।



इस तरह जिला परिषदों की संख्या 33 से बढ़कर 41 हो गई। यह करीब 24.24 प्रतिशत की वृद्धि है। पंचायत समितियां 352 से बढ़कर 457 हो गई हैं। पुराने आंकड़े से तुलना करें तो 105 पंचायत समितियां ज्यादा हैं और संख्या में करीब 29.8 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। ग्राम पंचायतों की मौजूदा संख्या 14,403 है। 2020-21 में दर्ज 11,266 ग्राम पंचायतों की तुलना में यह संख्या 3,137 ज्यादा है।



सरकार के मुताबिक हाल के पुनर्गठन में 8 नई जिला परिषद, 94 नई पंचायत समितियां और 3,467 नई ग्राम पंचायतें बनाई गई हैं। पुनर्गठन और सीमाओं में बदलाव के कारण नई बनाई गई संस्थाओं की संख्या और पुराने-मौजूदा कुल के सीधे अंतर को एक आंकड़ा नहीं माना जा सकता।




पहली बार बदले पंचायत नक्शे पर वोट

राजस्थान पंचायतीराज चुनाव (Rajasthan Panchayat Election) का एक बड़ा फर्क जमीन पर दिखाई देगा। पुनर्गठन के बाद कई क्षेत्रों की ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद की सीमाएं बदल चुकी हैं।इसका मतलब कई मतदाता उसी गांव में रहते हुए इस बार बदली हुई पंचायतीराज संरचना में अपना प्रतिनिधि चुनेंगे।



नई जिला परिषद और पंचायत समितियां बनने के कारण राजनीतिक समीकरण भी पुराने चुनाव जैसे नहीं रहेंगे। नए वार्ड और बदली सीमाओं के हिसाब से आरक्षण और चुनावी क्षेत्र तैयार किए गए हैं।




2020 में सरपंच EVM से चुने गए, अब बैलेट पेपर की वापसी

मतदान के तरीके में भी बड़ा बदलाव हुआ है। 2020 में सरपंच पद के लिए EVM से मतदान कराया गया था, जबकि वार्ड पंच के लिए बैलेट पेपर (Ballot Paper) और बैलेट बॉक्स का इस्तेमाल हुआ था।



2026 में पंच और सरपंच दोनों के लिए बैलेट पेपर और बैलेट बॉक्स का इस्तेमाल होगा। पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के चुनाव EVM से होंगे।इसका मतलब एक ही पंचायतीराज चुनाव में मतदाता दो अलग मतदान प्रणालियों का इस्तेमाल करेंगे।




पिछला चुनाव कोरोना में कई हिस्सों में बंटा, इस बार चार चरणों का बड़ा कार्यक्रम

2020 का पंचायत चुनाव एक ही लगातार चुनावी कार्यक्रम में पूरा नहीं हो सका था।जनवरी 2020 में ग्राम पंचायत चुनाव शुरू हुए। जनवरी और मार्च तक 7,463 ग्राम पंचायतों में चुनाव हो चुके थे। बाकी चुनाव कोरोना और लॉकडाउन के कारण अटक गए।



बची हुई 3,848 ग्राम पंचायतों में सितंबर और अक्टूबर 2020 में चार चरणों में पंच-सरपंच चुनाव कराए गए। इसके बाद पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के चुनाव नवंबर और दिसंबर में अलग चार चरणों में हुए। 23 नवंबर, 27 नवंबर, 1 दिसंबर और 5 दिसंबर को मतदान हुआ था।



इस बार आयोग ने पंचायतीराज चुनाव को चार चरणों के बड़े कार्यक्रम में रखा है। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए 23 अक्टूबर, 29 अक्टूबर, 4 नवंबर और 14 नवंबर को मतदान होगा।



इस लिहाज से 2020 की कोविड से प्रभावित और अलग-अलग हिस्सों में चली प्रक्रिया के मुकाबले 2026 का चुनाव ज्यादा समन्वित चुनावी चक्र के रूप में सामने आया है।




करीब 30 साल पुराना दो संतान वाला नियम (Two-Child Norm) खत्म

उम्मीदवारों के लिए इस बार सबसे बड़ा नया बदलाव दो संतान से जुड़ा है।पिछले पंचायत चुनाव तक दो से अधिक संतान होने पर संबंधित व्यक्ति के चुनाव लड़ने पर कानूनी अयोग्यता लागू हो सकती थी। यह प्रावधान करीब तीन दशक से राजस्थान के पंचायतीराज कानून का हिस्सा था।



2026 में कानून में बदलाव कर दो संतान नियम खत्म कर दिया गया है। इसलिए इस बार तीन या इससे अधिक संतान वाला व्यक्ति भी बाकी पात्रताएं पूरी करने पर पंचायतीराज चुनाव लड़ सकता है।



शिक्षा की शर्त इस बार का नया बदलाव नहीं

उम्मीदवारों की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी इस चुनाव में चर्चा है, लेकिन यह बदलाव 2026 का नहीं है। राजस्थान में 2015 में पंचायतीराज चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता का प्रावधान किया गया था। इसे फरवरी 2019 में विधानसभा ने कानून में संशोधन कर हटा दिया था।



इसलिए 2020 के पंचायत चुनाव में भी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता की यह बाध्यता नहीं थी। 2026 में भी यही व्यवस्था जारी है। इस चुनाव में उम्मीदवारों की पात्रता से जुड़ा वास्तविक नया बदलाव दो से अधिक संतान वाली अयोग्यता का हटना है।



महिला आरक्षण भी नया नहीं, 50 प्रतिशत व्यवस्था जारी

महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण को भी 2026 का नया बदलाव नहीं माना जा सकता। यह व्यवस्था पिछले पंचायत चुनाव में भी लागू थी। इस बार 457 प्रधान पदों में 221 और 41 जिला प्रमुख पदों में 20 पद महिलाओं के लिए आरक्षित बताए गए हैं। ग्राम पंचायत स्तर पर भी करीब आधे सरपंच पद महिलाओं के हिस्से आएंगे।



फर्क यह है कि पुनर्गठन के बाद पंचायतों और पंचायत समितियों की संख्या बढ़ने से आरक्षित पदों का नया नक्शा तैयार हुआ है।



इस बार चुनाव का स्केल भी बड़ा

पिछले चुनाव के बाद तैयार आधिकारिक वित्त आयोग के रिकॉर्ड में पंचायतीराज संस्थाओं में 1.28 लाख से ज्यादा सीधे निर्वाचित जनप्रतिनिधि दर्ज थे।



2026 में सिर्फ उपलब्ध पदवार आंकड़ों को जोड़ें तो 1,30,584 वार्ड पंच, 14,403 सरपंच, 8,245 पंचायत समिति सदस्य और 1,403 जिला परिषद सदस्य मिलाकर 1,54,635 सीधे निर्वाचित पद बनते हैं।



हालांकि कुछ प्रकाशित चुनावी आंकड़ों में कुल प्रतिनिधियों की संख्या करीब 1.69 लाख बताई जा रही है। राज्य निर्वाचन आयोग का अंतिम पदवार कुल सामने आने के बाद ही इस अंतर की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।



2026 के चुनाव में असली नया क्या?

छह साल बाद हो रहे पंचायत चुनाव की सबसे बड़ी कहानी सिर्फ मतदान की तारीख नहीं है। इस दौरान राजस्थान का पंचायतीराज ढांचा ही बदल गया है।



33 जिला परिषद अब 41 हैं। 352 पंचायत समितियां बढ़कर 457 हो चुकी हैं। ग्राम पंचायतों की संख्या 14 हजार के पार पहुंच गई है। सरपंच चुनाव में EVM की जगह बैलेट पेपर लौट आया है और दो से अधिक संतान के कारण चुनाव नहीं लड़ पाने वाली करीब तीन दशक पुरानी पाबंदी खत्म हो चुकी है।



इसलिए 2026 में मतदाता सिर्फ नए जनप्रतिनिधि नहीं चुनेंगे, बल्कि पुनर्गठन के बाद तैयार राजस्थान की नई पंचायतीराज व्यवस्था की पहली गांव की सरकार भी बनाएंगे।

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