राजस्थान पंचायत चुनाव 2026: पहले जीत की अफवाह में निकाला जुलूस, फिर हार ने बदला खेल
नागौर जिले के माडपुरा गांव से एक दिलचस्प और अजब-गजब वाकया सामने आया है। एक अफवाह ने ऐसा रंग जमाया कि आधिकारिक नतीजे घोषित होने से पूरे तीन घंटे पहले ही प्रत्याशी के समर्थकों ने जीत की खुशी में नाचना-गाना शुरू कर दिया। चुनाव अधिकारी का सर्टिफिकेट मिले ही ढोल-नगाड़ों की थाप पर प्रत्याशी को साफा पहनाकर साफा पहनाया गया, फूलों की मालाएं पहनाई गईं और ढोल-नगाड़ों के साथ गांव में जुलूस भी निकाल दिया गया। लेकिन कुछ घंटों बाद चुनाव अधिकारी के नतीजे ने पूरे जश्न का रंग बदल दिया। जिस प्रत्याशी की जीत मानकर समर्थक नाच रहे थे, वह चुनाव हार चुकी थीं।
रात 11:30 बजे फैली जीत की खबर
घटनाक्रम 24 अक्टूबर 2026 की देर रात का है। माडपुरा ग्राम पंचायत में सरपंच पद के लिए मतदान के बाद मतपत्रों की गिनती चल रही थी। रात करीब 11:30 बजे मतगणना केंद्र के बाहर मौजूद लोगों और समर्थकों के बीच यह बात फैल गई कि मगी देवी प्रजापत चुनाव जीत गई हैं।
हालांकि, उस समय चुनाव अधिकारी (election officer) की ओर से अंतिम परिणाम की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई थी। इसके बावजूद समर्थकों ने इस खबर को सच मान लिया। देखते ही देखते केंद्र के बाहर नारेबाजी शुरू हो गई और जीत का जश्न मनाने की तैयारी होने लगी।
साफा पहनाया, मालाएं डालीं और निकाला जुलूस
जीत की अफवाह फैलते ही समर्थकों ने मगी देवी को साफा पहनाया। फूलों की मालाएं पहनाई गईं। ढोल-नगाड़े बजने लगे और गांव की गलियों में विजयी जुलूस निकाल दिया गया। पटाखे फोड़े गए और मिठाइयां बांटकर एक-दूसरे को बधाई दी जाने लगी।
गांव में कुछ समय के लिए ऐसा माहौल बन गया, मानो सरपंच पद का फैसला हो चुका हो। समर्थकों को भरोसा था कि उनकी प्रत्याशी जीत गई हैं। जश्न देर रात तक चलता रहा। मगर मतगणना पूरी होने और अंतिम आंकड़े सामने आने तक जीत की यह खुशी महज एक अफवाह पर टिकी थी।
रात ढाई बजे आया असली नतीजा
रात करीब 2:30 बजे मतगणना पूरी हुई और चुनाव अधिकारी ने अंतिम परिणाम घोषित किया। नतीजे में मगी देवी विजेता नहीं थीं। सरपंच पद पर रूपी बाई ने जीत दर्ज की।
रिपोर्ट के मुताबिक, रूपी बाई को कुल 1,581 वोट मिले, जबकि मगी देवी को 1,412 वोट ही प्राप्त हुए। इस तरह रूपी बाई ने 169 वोट के अंतर से जीत हासिल की। आधिकारिक नतीजे ने कुछ ही देर पहले तक चल रहे जश्न को मायूसी में बदल दिया।
जश्न थमा, समर्थक लौटने लगे
परिणाम सामने आते ही माडपुरा में माहौल बदल गया। जिन समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों के साथ जुलूस निकाला था, वे अचानक शांत हो गए। बधाइयों और मिठाइयों का दौर थम गया। दूसरी ओर, रूपी बाई की जीत की पुष्टि के बाद उनके समर्थकों में खुशी दिखाई दी।
इस पूरे घटनाक्रम की चर्चा अब पंचायत चुनाव (Panchayat Elections) के बीच हो रही है। मामला यह भी याद दिलाता है कि मतगणना के दौरान शुरुआती रुझान, अधूरी जानकारी या लोगों के बीच फैली बातें अंतिम परिणाम नहीं होतीं।
आधिकारिक घोषणा से पहले जश्न
पंचायत चुनाव में मतपत्रों की गिनती के दौरान प्रत्याशियों और उनके समर्थकों की नजर हर अपडेट पर रहती है। ऐसे में किसी खबर या अनुमान को जीत मान लेना जल्दबाजी साबित हो सकता है। माडपुरा में भी आधिकारिक घोषणा से पहले जश्न मनाया गया, लेकिन अंतिम नतीजे ने तस्वीर पूरी तरह बदल दी।
चुनाव में जीत का फैसला अफवाह या समर्थकों के उत्साह से नहीं, बल्कि मतगणना के अंतिम आंकड़ों और चुनाव अधिकारी की घोषणा से होता है। माडपुरा का यह घटनाक्रम इसी बात की मिसाल बन गया कि परिणाम की आधिकारिक पुष्टि होने तक इंतजार करना ही समझदारी है।