पंचायत चुनाव से पहले 322 पूर्व जनप्रतिनिधियों पर रोक,सूची सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को भेजी गई
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान में 322 पूर्व सरपंच, उपसरपंच, पंच और प्रधान इस बार चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।
- पंचायती राज विभाग ने 5 साल के लिए रोक की सिफारिश की थी।
- सूची में पूर्व मंत्री जाहिदा खान के बेटे साजिद खान और बेटी शहनाज खान के नाम हैं।
- विभाग ने 7 अक्टूबर 2026 को सूची आयोग को भेजी।
- आयोग ने सूची सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को भेज दी है।
राजस्थान पंचायत चुनाव 322 जनप्रतिनिधि बैन का मामला चर्चा में है। इस बार 322 पूर्व सरपंच, उपसरपंच, पंच और प्रधान पंचायत चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। इनमें पूर्व मंत्री के बेटे-बेटी भी शामिल हैं।
पंचायती राज विभाग ने इनकी सूची तैयार करके राज्य निर्वाचन आयोग को भेजी थी। विभाग ने पूर्व सरपंच प्रधान चुनाव लड़ने पर रोक के लिए 5 साल की सिफारिश की थी। सोर्स के अनुसार इसके बाद आयोग ने रोक लगा दी।
पंचायती राज विभाग अयोग्य जनप्रतिनिधि सूची कैसे बनी?
राज्य निर्वाचन आयोग ने सितंबर 2026 में पंचायती राज विभाग को चिट्ठी लिखी। चिट्ठी में जनप्रतिनिधियों से जुड़ा ब्योरा मांगा गया था। आयोग ने तीन तरह के जनप्रतिनिधियों की जानकारी मांगी थी। पहले वे, जिन्होंने कार्यकाल में सरकारी फंड में वित्तीय अनियमितता की। दूसरे वे, जिन्हें पंचायती राज के नियमों के तहत भ्रष्टाचार, गबन और पद के दुरुपयोग में सजा हुई। तीसरे वे, जिन्होंने कार्यकाल का पूरा रिकॉर्ड, वित्तीय ऑडिट या बकाया राशि जमा नहीं कराई।
आयोग के निर्देश पर विभाग ने सभी संभागीय आयुक्तों को चिट्ठी लिखकर ब्योरा मांगा। फिर 7 अक्टूबर 2026 को पंचायती राज विभाग अयोग्य जनप्रतिनिधि सूची आयोग को भेज दी गई। सवाल यह है कि इस सूची में कौन से चर्चित नाम हैं?
राज्य निर्वाचन आयोग 5 साल चुनाव बैन पर सचिव ने क्या कहा?
आयोग के सचिव राजेश वर्मा के अनुसार विभाग से अयोग्य ठहराए गए लोगों की सूची मिल गई है। उन्होंने कहा कि आयोग ऐसे व्यक्तियों को चुनाव लड़ने से रोकेगा। सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को सूची भेज दी गई है।
पंचायती राज विभाग के सचिव जोगाराम के अनुसार संभागीय आयुक्त उन जनप्रतिनिधियों को अयोग्य ठहराता है, जिनके खिलाफ वित्तीय अनियमितता के मामले चल रहे हों।
जाहिदा खान बेटा बेटी चुनाव बैन: सूची में कौन हैं?
सूची में पूर्ववर्ती गहलोत सरकार में मंत्री रहीं जाहिदा खान के बेटे और बेटी का नाम है। दोनों पर अनियमितता के आरोप लगे थे। इसी वजह से जाहिदा खान बेटा बेटी चुनाव बैन की खबर चर्चा में है। पूर्व मंत्री जाहिदा खान को इस बारे में फोन किया गया। उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। उनका पक्ष अभी सामने नहीं आया है।
साजिद खान पूर्व पहाड़ी प्रधान पर क्या आरोप थे?
साजिद खान पूर्व पहाड़ी प्रधान हैं। वह सितंबर 2021 में भरतपुर (वर्तमान डीग) जिले की पहाड़ी पंचायत समिति से निर्विरोध प्रधान चुने गए थे। निर्विरोध यानी बिना मुकाबले के चुना जाना। साजिद पर दो आरोप लगे थे। पहला आरोप था कि पिछले विधानसभा चुनाव की आचार संहिता के दौरान विकास कार्यों के लिए 54 लाख रुपए का भुगतान हुआ। यह भी आरोप था कि वित्तीय शक्तियां न होने पर भी प्रधान की ओर से 4 करोड़ 50 लाख रुपए का भुगतान किया गया।
एफएफसी योजना में ग्रेवल सड़क (कच्ची सड़क) की मंजूरी नहीं थी। आरोप है कि फिर भी ग्रेवल सड़क की स्वीकृति निकालकर 5 लाख रुपए का भुगतान किया गया। दूसरा आरोप था कि पहाड़ी पंचायत समिति में प्रधान अवैध खनन करवा रहे हैं। भरतपुर जिले के सामाजिक कार्यकर्ता विजय मिश्रा ने खोह थाने में साजिद के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, सत्ता परिवर्तन के बाद फरवरी 2024 में भजनलाल सरकार ने अनियमितता के आरोपों के चलते साजिद को प्रधान पद से निलंबित कर दिया था। इन आरोपों पर साजिद का पक्ष सोर्स में नहीं है।
शहनाज खान पूर्व कामां प्रधान पर क्या आरोप थे?
शहनाज खान पूर्व कामां प्रधान हैं। उन पर पद पर रहते हुए अनियमित भुगतान और विभिन्न योजनाओं की स्वीकृतियां जारी करने में गड़बड़ी का आरोप लगा था। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के अतिरिक्त आयुक्त एवं शासन उप सचिव द्वितीय (जांच) ने आदेश में कहा कि कामां पंचायत समिति में अनियमित भुगतान और स्वीकृतियों में गड़बड़ी हुई है।
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 38(4) की शक्तियों के तहत विभाग ने 6 मार्च 2024 को शहनाज को प्रधान पद से निलंबित किया था। अगस्त 2025 में विभाग ने कामां पंचायत समिति (वार्ड संख्या 13) की उनकी सदस्यता भी रद्द कर दी थी। इन आरोपों पर शहनाज का पक्ष सोर्स में नहीं है।
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 अयोग्यता में क्या प्रावधान है?
कानूनी मामलों के जानकार एडवोकेट प्रतीक कासलीवाल के अनुसार राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 में वित्तीय अनियमितता, गबन या भ्रष्टाचार के मामलों में लिप्त होने पर सरपंच, प्रधान या सदस्य के चुनाव लड़ने पर कड़ी रोक का प्रावधान है। इसे कानूनी भाषा में अयोग्यता कहा जाता है। सोर्स में अयोग्यता की सटीक धारा या अपील की प्रक्रिया नहीं बताई गई है।
अब आगे क्या?
अब नजर इस पर रहेगी कि जिला निर्वाचन अधिकारी इस सूची पर कैसे अमल करते हैं। यह भी देखना होगा कि सूची में शामिल लोग इस रोक को किसी स्तर पर चुनौती देते हैं या नहीं। सोर्स में 322 नामों का पूरा ब्योरा नहीं है। यानी कितने सरपंच, कितने प्रधान, कितने पंच और कितने उपसरपंच हैं, यह नहीं बताया गया।
यह खबर क्यों जरूरी है:
पंचायत चुनाव गांव की सरकार चुनने की प्रक्रिया है। उम्मीदवारों की पात्रता सीधे मतदाताओं से जुड़ी है। सरकारी फंड में गड़बड़ी के आरोपों पर रोक लगने से जवाबदेही का संदेश जाता है। साथ ही यह जानना जरूरी है कि कार्रवाई किस आधार पर हुई और आरोपितों का पक्ष क्या है। जब नाम चर्चित परिवार से जुड़े हों, तब तथ्य और आरोप का फर्क साफ रखना और जरूरी हो जाता है। मतदाता को यह पता होना चाहिए कि कौन चुनाव लड़ सकता है और कौन नहीं।