राजस्थान पंचायत चुनाव के लिए संकल्प पत्र लाएगी भाजपा, मदन राठौड़ बोले- गांवों में भी देंगे शहर जैसी सुविधाएं
राजस्थान में पंचायत चुनाव (Panchayat Election) की तारीखों के ऐलान के बाद भाजपा ने गांवों के मतदाताओं को साधने की तैयारी तेज कर दी। पार्टी नगरीय निकाय चुनाव की तरह पंचायत के लिए भी अलग संकल्प पत्र जारी करेगी। इसमें गांवों में सड़क, पानी और दूसरी सुविधाएं बढ़ाने को लेकर वादे किए जा सकते।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ रविवार, 11 अक्टूबर को संकल्प पत्र जारी करेंगे। इसकी जानकारी देते हुए राठौड़ ने पंचायत चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की जीत का दावा किया। साथ ही उन्होंने कांग्रेस नेताओं की एकजुटता और गुरुवार को मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन पर भी सवाल उठाए।
पंचायत चुनाव में गांवों के विकास पर रहेगा भाजपा का जोर
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ (Madan Rathore) ने कहा कि 11 अक्टूबर को पंचायत चुनाव के लिए भाजपा संकल्प पत्र (BJP manifesto) जारी करेगी। इसमें ग्रामीण इलाकों के विकास को लेकर पार्टी अपनी योजनाएं और वादे जनता के सामने रखेगी।
राठौड़ ने कहा कि भाजपा चाहती है कि गांवों में रहने वाले लोगों को भी वे सभी सुविधाएं मिलें, जो शहरों में मिलती हैं। पार्टी संकल्प पत्र के जरिए बताएगी कि आने वाले समय में गांवों का विकास किस तरह किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी ने गांवों तक अपने संगठन को मजबूत किया है। केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारों ने कई बड़े काम किए हैं। इसी वजह से पंचायत चुनाव में पार्टी को जनता का समर्थन मिलेगा।
राठौड़ ने कहा कि प्रदेश की जनता भारतीय जनता पार्टी पर भरोसा करती है। लोगों को पता है कि पार्टी जो वादा करती है, उसे पूरा करती है। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव में भी भाजपा इसी भरोसे के साथ जनता के बीच जाएगी।
पंचायत चुनाव में चार चरणों में होगी वोटिंग
राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायतीराज चुनाव का कार्यक्रम जारी कर दिया है। प्रदेश में जिला परिषद, पंचायत समिति, पंच और सरपंच के चुनाव चार चरणों में होंगे। आयोग ने 6 अक्टूबर को पहले तीन चरणों की तारीखों में बदलाव भी किया है। संशोधित कार्यक्रम के मुताबिक जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए 22 अक्टूबर, 28 अक्टूबर, 3 नवंबर और 14 नवंबर को मतदान होगा।
वहीं, पंच और सरपंच के लिए 24 अक्टूबर, 30 अक्टूबर, 5 नवंबर और 16 नवंबर को वोट डाले जाएंगे। पंच और सरपंच के वोटों की गिनती मतदान खत्म होने के बाद होगी। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के वोटों की गिनती 20 नवंबर को होगी।
इसके बाद जिला प्रमुख, उप जिला प्रमुख, प्रधान और उप प्रधान के चुनाव कराए जाएंगे। प्रदेश की 14403 ग्राम पंचायतों, 457 पंचायत समितियों और 41 जिला परिषदों में चुनाव होने हैं। ऐसे में बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए ग्रामीण इलाकों में अपनी पकड़ दिखाने का यह बड़ा मौका होगा।
गहलोत-पायलट की एकजुटता पर मदन राठौड़ का तंज
पंचायत चुनाव के संकल्प पत्र की जानकारी देने के साथ मदन राठौड़ ने कांग्रेस नेताओं पर भी निशाना साधा। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के एक साथ बैठक करने और फोटो खिंचवाने पर सवाल उठाए।
राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस के नेता केवल फोटो खिंचवाने के लिए एक साथ आए हैं। उनके मुताबिक, कांग्रेस नेताओं को बार-बार यह दिखाने की जरूरत पड़ रही है कि वे एकजुट हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिन लोगों के मन में संदेह होता है, उन्हें ही सबके सामने अपनी एकजुटता दिखानी पड़ती है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राठौड़ ने दावा किया कि कांग्रेस नेताओं के बीच आपसी मतभेद हैं। इसी वजह से वे साथ बैठकर तस्वीरें खिंचवा रहे हैं, ताकि जनता को लगे कि पार्टी में सब कुछ ठीक है। उन्होंने कहा कि बीजेपी को इस तरह का दिखावा करने की जरूरत नहीं पड़ती। पार्टी के नेता और कार्यकर्ता मिलकर काम करते हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन पर कांग्रेस को घेरा
मदन राठौड़ ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह मामला कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच का है। बीजेपी का इससे कोई लेना-देना नहीं है।
राठौड़ ने कहा कि अगर कांग्रेस नेताओं को मुख्य चुनाव आयुक्त से कोई शिकायत है तो वे समय लेकर उनसे मिल सकते थे। अपनी बात रखने के लिए तय प्रक्रिया अपनाई जा सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ऐसा करने के बजाय केवल चर्चा में बने रहने के लिए प्रदर्शन कर रही है। उन्होंने कांग्रेस पर लोगों को भ्रमित करने का आरोप भी लगाया। हालांकि, ये राठौड़ के राजनीतिक आरोप हैं।
पंचायत चुनाव से पहले गांवों में सियासी मुकाबला तेज
राजस्थान में पंचायत चुनाव का कार्यक्रम सामने आने के बाद गांवों में राजनीतिक गतिविधियां बढ़ने लगी हैं। भाजपा जहां संकल्प पत्र के जरिए ग्रामीण विकास के मुद्दों को उठाने की तैयारी कर रही है, वहीं कांग्रेस भी स्थानीय स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी है। भारतीय जनता पार्टी के लिए पंचायत चुनाव में राज्य और केंद्र सरकार के कामकाज को जनता के सामने रखने का मौका होगा। वहीं, कांग्रेस स्थानीय समस्याओं और सरकार के कामकाज को लेकर सवाल उठा सकती है।
ऐसे में पंचायत चुनाव का मुकाबला केवल उम्मीदवारों तक सीमित नहीं रहेगा। गांवों में सड़क, पानी, बिजली, रोजगार और दूसरी बुनियादी सुविधाएं भी चुनावी चर्चा का हिस्सा बन सकती हैं। भाजपा के संकल्प पत्र में गांवों के लिए क्या खास घोषणाएं होंगी, यह 11 अक्टूबर को सामने आएगा। फिलहाल पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह पंचायत चुनाव में ग्रामीण विकास को प्रमुख मुद्दा बनाने जा रही है।