राजस्थान में 1.85 करोड़ युवा वोटर्स पर कांग्रेस की नजर, पंचायत चुनाव में 50% टिकट यूथ को देने का लक्ष्य
राजस्थान पंचायत चुनाव (Rajasthan Panchayat Chunav) में कांग्रेस इस बार युवा नेताओं को ज्यादा मौका देने की तैयारी में है। पार्टी ने करीब 50 फीसदी टिकट ऐसे उम्मीदवारों को देने का लक्ष्य रखा, जिनकी उम्र 50 साल से कम है। इनमें 35 साल से कम उम्र के युवाओं और पहली बार चुनाव लड़ने वालों पर भी खास ध्यान रहेगा।
कांग्रेस ने हाल ही में हुए नगर निकाय चुनाव में भी युवाओं को टिकट दिए थे। अब पार्टी गांवों में इसी रणनीति को आजमाना चाहती। इसके पीछे एक मकसद 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले नए नेताओं को तैयार करना भी है।
पंचायत चुनाव में कांग्रेस कैसे युवाओं को मौका देगी ?
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने राजस्थान पंचायत चुनाव में टिकट बांटने के लिए लगाए गए 41 जिला आब्जर्वर को युवा दावेदारों पर खास ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। इनमें पांच सांसद और सात विधायक भी शामिल हैं। पार्टी की कोशिश है कि लंबे समय से संगठन में काम कर रहे युवाओं को चुनाव लड़ने का मौका मिले। खासकर यूथ कांग्रेस (Youth Congress) और एनएसयूआई (NSUI) से जुड़े कार्यकर्ताओं को टिकट वितरण में प्राथमिकता दी जाएगी।
कांग्रेस ने जुलाई में ही तय कर लिया था कि निकाय और पंचायत चुनाव में 50 साल से कम उम्र के नेताओं को करीब 50 फीसदी टिकट दिए जाएंगे। अब पार्टी इस फैसले को पंचायत चुनाव में लागू करने की तैयारी कर रही।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने राजस्थान पंचायत चुनाव में टिकट बांटने के लिए लगाए गए 41 जिला आब्जर्वर को युवा दावेदारों पर खास ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। कांग्रेस पार्टी की कोशिश है कि लंबे वक्त से संगठन के लिए पसीना बहा रहे युवाओं को चुनाव लड़ने का मौका मिले। खासकर यूथ कांग्रेस (Youth Congress) और एनएसयूआई (NSUI) से जुड़े कार्यकर्ताओं को टिकट वितरण में तरजीह दी जाएगी।
निकाय चुनाव में कितने Gen-Z उम्मीदवारों को मिला था टिकट?
राजस्थान कांग्रेस ने हाल ही में हुए नगर निकाय चुनाव में भी युवा उम्मीदवारों पर दांव लगाया था। जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में कांग्रेस ने जेन-जी यानी नई पीढ़ी के 12 उम्मीदवार उतारे थे। इनमें चार चुनाव जीतकर पार्षद बने। वहीं, भाजपा ने भी जयपुर में 6 जेन-जी प्रत्याशियों को टिकट दिया था। इनमें दो उम्मीदवार जीते। इस तरह जयपुर में दोनों पार्टियों के कुल 18 जेन-जी उम्मीदवारों में से 6 पार्षद बने।
जयपुर के अलावा जोधपुर, उदयपुर, अजमेर और कोटा में भी युवा उम्मीदवारों को मौका मिला था। इन पांच शहरों में भाजपा और कांग्रेस ने मिलकर 70 जेन-जी उम्मीदवार उतारे थे। इनमें कांग्रेस के 49 और भाजपा के 21 उम्मीदवार थे।
पंचायत चुनाव में टिकट बांटते समय किन युवाओं को मिलेगी तरजीह?
पीसीसी चीफ डोटासरा के मुताबिक, पंचायत चुनाव में उम्मीदवार चुनते समय चार बातों पर खास ध्यान दिया जाएगा। इनमें 50 साल से कम उम्र के नेता, 35 साल से कम उम्र के युवा, पहली बार चुनाव लड़ने वाले कार्यकर्ता और यूथ कांग्रेस या एनएसयूआई से जुड़े लोग शामिल हैं। कांग्रेस ने इसके लिए पंचायत चुनाव टास्क फोर्स भी बनाई है। इसका काम ऐसे युवाओं की ढूंढना है, जो राजनीति में आना चाहते और अपने इलाके में सामाजिक और राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं।
कांग्रेस पार्टी इन युवाओं को संगठन से जोड़ना चाहती, ताकि आगे चलकर वे पंचायत स्तर पर जिम्मेदारी संभाल सकें। पहले चरण के उम्मीदवारों के नाम तय होने के बाद उनकी उम्र और राजनीतिक अनुभव से पता चलेगा कि पार्टी अपने लक्ष्य पर कितना अमल कर रही है।
राजस्थान में 1.85 करोड़ युवा वोटर्स पर नजर
राज्य निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में 18 से 35 साल के करीब 1.85 करोड़ वोटर्स हैं। इनमें से 18 से 25 साल के मतदाताओं की संख्या 77 लाख है। कुल वोटर्स में से 26 से 35 साल की उम्र के मतदाताओं की संख्या करीब 1.08 करोड़ है।
राजस्थान में युवा मतदाताओं की बड़ी संख्या भी कांग्रेस की इस रणनीति की एक वजह है। पार्टी चाहती है कि युवाओं को चुनाव लड़ने का मौका देकर उनके बीच अपनी पहुंच बढ़ाई जाए।हालांकि, युवा उम्मीदवारों को टिकट देने से युवा मतदाता कांग्रेस के पक्ष में ही मतदान करेंगे, यह जरूरी नहीं है। चुनाव में स्थानीय मुद्दे, उम्मीदवार की पहचान और उसका काम भी अहम भूमिका निभाएंगे।
2028 के विधानसभा चुनाव में क्या होगा फायदा?
कांग्रेस की इस रणनीति का मकसद केवल पंचायत चुनाव जीतना नहीं है। पार्टी 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले गांवों में नए नेताओं की टीम भी तैयार करना चाहती है।पंचायत समिति और जिला परिषद चुनाव में जीतने वाले युवा अपने इलाके में पहचान बना सकते हैं। उन्हें स्थानीय समस्याओं पर काम करने और लोगों से सीधे जुड़ने का मौका मिलेगा।
आगे चलकर ऐसे नेताओं को पार्टी संगठन या बड़े चुनावों में जिम्मेदारी दे सकती है। हालांकि, इसका कितना फायदा होगा, यह पंचायत चुनाव के नतीजों और चुने गए प्रतिनिधियों के काम पर निर्भर करेगा।
कांग्रेस के सामने चुनौती यह भी होगी कि युवा उम्मीदवारों को मौका देने के साथ पुराने और अनुभवी कार्यकर्ताओं को कैसे साथ रखा जाए। टिकट नहीं मिलने पर नाराजगी और बगावत की आशंका भी बनी रहती है। अब पंचायत चुनाव के नतीजे बताएंगे कि निकाय चुनाव में आजमाया गया कांग्रेस का युवा फॉर्मूला गांवों में कितना असर दिखा पाता है।