पंचायत चुनाव को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई कल, चुनाव टालने के प्रार्थना पत्र पर फैसला सुरक्षित
News In Short
- राजस्थान पंचायत-निकाय चुनाव में देरी को लेकर हाईकोर्ट में होगी सुनवाई ।
- पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने राज्य चुनाव आयोग के खिलाफ अवमानना याचिका की दायर।
- राजस्थान हाई कोर्ट ने पहले ही चुनाव आयोग और आयुक्त को नोटिस कर दिया था जारी।
- मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण और ओबीसी रिजर्वेशन कारण चुनाव में हुई देरी।
- सुनवाई जस्टिस महेन्द्र कुमार गोयल और जस्टिस अनिल कुमार उपमन की बैंच करेगी।
News In Detail
राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव में देरी को लेकर राज्य चुनाव आयोग के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर 18 मई को हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। जस्टिस महेन्द्र कुमार गोयल और जस्टिस अनिल कुमार उपमन की बैंच पूर्व विधायक संयम लोढ़ा और अन्य की याचिका पर सुनवाई करेगी।
पिछली सुनवाई और नोटिस
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग और चुनाव आयुक्त को अवमानना नोटिस जारी किया था। अदालत ने चुनाव आयोग से पूछा कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण का कार्यक्रम तय समय सीमा से बाहर कैसे जारी किया गया।
जानबूझकर चुनाव टालने के आरोप
अवमानना याचिका में पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने आरोप लगाया कि सरकार और आयोग जानबूझकर चुनाव टाल रहे हैं। यह सीधे तौर पर हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना है।
मतदाता सूची और समय सीमा
आयोग ने पंचायत-निकाय चुनाव के लिए 22 अप्रैल तक फाइनल मतदाता सूची जारी करने का कार्यक्रम तय किया है। इससे स्पष्ट है कि चुनाव हाईकोर्ट द्वारा तय 15 अप्रैल की समय सीमा में पूरे नहीं हो सकते।
सरकार और चुनाव आयोग के प्रार्थना पत्र
प्रदेश में चुनाव टालने को लेकर राजस्थान सरकार और चुनाव आयोग ने प्रार्थना पत्र दायर किया। 11 मई को राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई हुई, जिसके बाद कार्यवाहक जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया।
सरकार ने प्रार्थना पत्र में हर माह की परिस्थितियां बताते हुए दिसंबर तक चुनाव टालने की अपील की थी। चुनाव आयोग ने भी अपनी एप्लीकेशन में ओबीसी रिजर्वेशन के निर्धारण से पहले चुनाव कराना संभव नहीं होने के तर्क का समर्थन किया।
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