पुलिस बल कम, अपराध ज्यादा, 2,522 संगीन मामलों में अटक रही गिरफ्तारी
News In Short
- राजस्थान पुलिस में कांस्टेबल के 8,765 और एएसआई के 5,884 पद खाली होने से जांच प्रक्रिया सुस्त।
- पर्याप्त पुलिस बल न होने से हत्या और बलात्कार जैसे 2,522 संगीन मामलों में आरोपी अब भी फरार।
- प्रदेश में संगठित अपराध के मामलों में एक साल के भीतर करीब 6 गुना की भारी वृद्धि दर्ज।
- हत्या के मामलों में लंबित गिरफ्तारियों का आंकड़ा 2024 के 32 के मुकाबले 2025 में 148 तक पहुंचा।
- अतिरिक्त अधीक्षक और उप अधीक्षक जैसे रणनीतिक महत्व के 90 पद अब भी रिक्त पड़े हैं।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान में कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर सामने आए आंकड़े शासन और प्रशासन के लिए चिंता का विषय बन गए हैं। भले ही सरकार प्रदेश में शांति और सुरक्षा का दावा करती हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि पुलिस बल में भारी कमी के कारण अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। पुलिस विभाग में रिक्त पड़े हजारों पदों का सीधा असर अब अपराध नियंत्रण, गश्त और संगीन मामलों में होने वाली गिरफ्तारियों पर दिखने लगा है।
रिक्त पदों की स्थिति
पुलिस विभाग की रीढ़ माने जाने वाले पदों पर रिक्तियों का आंकड़ा बेहद डरावना है। रिपोर्ट के अनुसार सबसे ज्यादा कमी उन पदों पर है जो सीधे तौर पर जनता से संवाद करते हैं और अपराध की पहली सूचना पर कार्यवाही करते हैं।
कांस्टेबल: विभाग में कांस्टेबल के स्वीकृत 63,958 पदों में से 8,765 पद खाली पड़े हैं। गश्त और सुरक्षा व्यवस्था में यह सबसे बड़ी कमी है।
एएसआई (ASI): जांच और केस डायरी तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले एएसआई के 11,408 पदों में से 5,884 पद रिक्त हैं। यानी आधे से ज्यादा पद खाली हैं।
सब-इंस्पेक्टर (SI): थानों के संचालन और जांच अधिकारी के रूप में कार्य करने वाले एसआई के भी 1,724 पद खाली हैं।
वरिष्ठ स्तर पर कमी: केवल निचला स्तर ही नहीं, बल्कि अतिरिक्त अधीक्षक के 42 और उप अधीक्षक के 48 पद भी खाली हैं, जो रणनीतिक निर्णय और प्रशासनिक नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।
संगठित अपराध में बेखौफ अपराधी
सीमित संसाधनों और कम स्टाफ के कारण राजस्थान पुलिस पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। वर्ष 2024 और 2025 के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में अपराध का ग्राफ इंडिविजुअल लेवल कुछ ज्यादा परिवर्तित तो नहीं हुआ लेकिन संगठित अपराध में लगभग 6 गुना वृद्धि हुई है।
हत्या: वर्ष 2024 में हत्या के 1,607 मामले दर्ज हुए, जो 2025 में 1,314 रहे।
बलात्कार: प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगाते हुए 2024 में 6,482 और 2025 में 5,601 बलात्कार के मामले दर्ज किए गए।
संगठित अपराध: सबसे चौंकाने वाली वृद्धि संगठित अपराधों में देखी गई है, जहां मामले 2024 में 189 से बढ़कर 2025 में सीधे 1,250 तक पहुंच गए।
गिरफ्तारी की सुस्त रफ्तार
मानव संसाधन की इस भारी कमी का सबसे दुखद पहलू यह है कि 2,522 गंभीर मामलों में पुलिस अभी तक अपराधियों को सलाखों के पीछे नहीं पहुंचा पाई है। हत्या जैसे जघन्य अपराधों में लंबित गिरफ्तारियां वर्ष 2024 में 32 थीं, जो 2025 में बढ़कर 148 हो गई हैं।
कुल मिलाकर वर्ष 2024 में 408 मामलों में गिरफ्तारियां लंबित थीं, जो 2025 में लगभग तीन गुना बढ़कर 1,200 के करीब पहुंच चुकी हैं। अकेले जनवरी 2026 तक हत्या के मामलों में लंबित गिरफ्तारियों की संख्या 82 तक पहुंच गई है।
विधानसभा में कांग्रेस विधायक प्रमोद जैन भाया के प्रश्न के आए जवाब में मिली जानकारी स्पष्ट करती है कि पुलिस विभाग केवल फाइलों के बोझ तले नहीं दबा है, बल्कि स्टाफ की कमी के कारण जांच और कानून-व्यवस्था की गुणवत्ता से समझौता हो रहा है। जब तक रिक्त पदों को भरकर पुलिस बल को आधुनिक संसाधनों से लैस नहीं किया जाएगा, तब तक अपराधियों पर नकेल कसना और पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाना एक बड़ी चुनौती है।
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